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बेरोजगारों के रोजगार पर बैंकों का ब्रेक
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युवाओं के रोजगार पर बैंकों का ब्रेक
फर्रुखाबाद। केंद्र और प्रदेश सरकार का पूरा जोर युवाओं को रोजगार मुहैया कराने पर है। इसके लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (एमवाईएसवाई), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजनाएं चल रहीं हैं। बावजूद इसके बैंक लक्ष्य से आधा भी काम नहीं कर सके हैं। इससे सरकार की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हालांकि बैंकों में पत्रावलियां तीन गुनी ज्यादा पड़ी हुई हैं।
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के माध्यम से एमवाईएसवाई, पीएमईजीपी और ओडीओपी योजनाएं संचालित हैं। इनके तहत उद्यमिता विकास केंद्र ने क्रमश: 150, 156 और 69 पत्रावलियां अपने यहां से बैंकों को भेज दी हैं। मगर बैंकों ने युवाओं को रोजगार देने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। आधा वित्तीय वर्ष बीतने के बावजूद सिर्फ पीएमईजीपी में ही 34 के लक्ष्य के सापेक्ष 19 लोगों को लोन दिया गया है।
बैंक मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसकी 150 पत्रावलियां बैंकों में भेजी गईं। इस योजना में लक्ष्य 46 बेरोजगारों को रोजगार देने का है, मगर मात्र 19 लोगों को ही लोन मिला है। ऐसा ही हाल ओडीओपी योजना का है। बैंकों को भले ही 69 पत्रावलियां भेजी गई हों, मगर 20 के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र नौ को ही लोन दिया गया। बैंकों की उदासीनता की वजह से ही बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिल रहा है।
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स्वीकृति के बाद ऋण देने में हीलाहवाली
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के रिकार्ड के मुताबिक बैंकों ने एमवाईएसवाई में 49, ओडीओपी में 17 और पीएमईजीपी में 42 पत्रावलियों को स्वीकृति प्रदान कर दी है, मगर ऋण देने में हीलाहवाली की जा रही है। आवेदक बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
‘तीनों योजनाओं में लक्ष्य से तीन-तीन गुना ज्यादा पत्रावलियां स्वीकृत करके बैंकों को भेज दी गई हैं। अब बैंक अपने स्तर से जांच करके पात्रों को ऋण मुहैया कराएंगे। कितनी भी पत्रावलियां निरस्त होंगी, फिर भी लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाएगा।’
-अशोक कुमार उपाध्याय, प्रबंधक/उपायुक्त
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र, फर्रुखाबाद
‘सरकार की मंशा के अनुरूप बेरोजगारों को रोजगार देने की जो भी योजनाएं हैं, उनमें ऋण मुहैया कराने में बैंक पीछे नहीं रहेंगे। जो आवेदक पात्र पाए जाएंगे, उन्हें हर हाल में ऋण मुहैया कराया जाएगा। अभी भी तीनों योजनाओं में प्रगति संतोषजनक है। लॉकडाउन की वजह से कुछ दिक्कतें आई थीं।’
-दूधनाथ पाल, लीड बैंक प्रबंधक, फर्रुखाबाद
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फर्रुखाबाद। केंद्र और प्रदेश सरकार का पूरा जोर युवाओं को रोजगार मुहैया कराने पर है। इसके लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (एमवाईएसवाई), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजनाएं चल रहीं हैं। बावजूद इसके बैंक लक्ष्य से आधा भी काम नहीं कर सके हैं। इससे सरकार की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हालांकि बैंकों में पत्रावलियां तीन गुनी ज्यादा पड़ी हुई हैं।
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के माध्यम से एमवाईएसवाई, पीएमईजीपी और ओडीओपी योजनाएं संचालित हैं। इनके तहत उद्यमिता विकास केंद्र ने क्रमश: 150, 156 और 69 पत्रावलियां अपने यहां से बैंकों को भेज दी हैं। मगर बैंकों ने युवाओं को रोजगार देने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। आधा वित्तीय वर्ष बीतने के बावजूद सिर्फ पीएमईजीपी में ही 34 के लक्ष्य के सापेक्ष 19 लोगों को लोन दिया गया है।
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बैंक मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसकी 150 पत्रावलियां बैंकों में भेजी गईं। इस योजना में लक्ष्य 46 बेरोजगारों को रोजगार देने का है, मगर मात्र 19 लोगों को ही लोन मिला है। ऐसा ही हाल ओडीओपी योजना का है। बैंकों को भले ही 69 पत्रावलियां भेजी गई हों, मगर 20 के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र नौ को ही लोन दिया गया। बैंकों की उदासीनता की वजह से ही बेरोजगारों को रोजगार नहीं मिल रहा है।
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स्वीकृति के बाद ऋण देने में हीलाहवाली
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के रिकार्ड के मुताबिक बैंकों ने एमवाईएसवाई में 49, ओडीओपी में 17 और पीएमईजीपी में 42 पत्रावलियों को स्वीकृति प्रदान कर दी है, मगर ऋण देने में हीलाहवाली की जा रही है। आवेदक बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
‘तीनों योजनाओं में लक्ष्य से तीन-तीन गुना ज्यादा पत्रावलियां स्वीकृत करके बैंकों को भेज दी गई हैं। अब बैंक अपने स्तर से जांच करके पात्रों को ऋण मुहैया कराएंगे। कितनी भी पत्रावलियां निरस्त होंगी, फिर भी लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाएगा।’
-अशोक कुमार उपाध्याय, प्रबंधक/उपायुक्त
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र, फर्रुखाबाद
‘सरकार की मंशा के अनुरूप बेरोजगारों को रोजगार देने की जो भी योजनाएं हैं, उनमें ऋण मुहैया कराने में बैंक पीछे नहीं रहेंगे। जो आवेदक पात्र पाए जाएंगे, उन्हें हर हाल में ऋण मुहैया कराया जाएगा। अभी भी तीनों योजनाओं में प्रगति संतोषजनक है। लॉकडाउन की वजह से कुछ दिक्कतें आई थीं।’
-दूधनाथ पाल, लीड बैंक प्रबंधक, फर्रुखाबाद