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मैं हूं सह जिला संचालक, मुझे गिरफ्तार कर लो
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डॉ. नरेंद्र पांडेय। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कमालगंज। राम जन्मभूमि के लिए 1990 में बड़ा आंदोलन हुआ था। कस्बा निवासी डॉ. नरेंद्र पांडेय उस समय सह जिला संचालक थे। विहिप व संघ के पदाधिकारियों को अयोध्या जाने से रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन पूरा जतन कर रहा था। सह जिला संचालक के नर्सिंग होम पर भी छापा मारा गया। मगर वह पुलिस के हाथ नहीं आए। किसी तरह वह अयोध्या पहुंचे। कोलकाता के कोठारी बंधुओं ने विवादित परिसर में सबसे पहले गुंबद पर भगवा ध्वज फहराया। उस समय कारसेवकों की भीड़ में वह भी शामिल थे। वापस आकर चार पहिया ठेली पर भगवान राम की फोटो रखकर कस्बे में जुलूस निकाला। विहिप के कानपुर प्रांत अध्यक्ष देवीसहाय पालीवाल के साथ उन्होंने थाने के बाहर जुलूस रोककर थानाध्यक्ष से कहा था कि मैं हूं सह जिला संचालक, मुझे गिरफ्तार कर लो।
वर्तमान में फतेहगढ़ में रह रहे डॉ. नरेंद्र पांडेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में फर्रुखाबाद, कन्नौज व कानपुर देहात के कार्य विभाग संचालक हैं। 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन के समय वह कस्बे में रेलवे रोड स्थित अपने नर्सिंग होम से गतिविधियां संचालित करते थे। अक्तूबर 1990 में भूमि पूजन के लिए अयोध्या चलो के आह्वान को विफल करने के लिए जिले में विहिप व संघ पदाधिकारियों के यहां छापे मारे जा रहे थे। तत्कालीन सह जिला संचालक को भी इसकी भनक थी। उस दिन सुबह 5 बजे उठकर मरीजों को देखा और कहा कि 6 बजे ट्रेन से कानपुर जाना है इसलिए जल्दी देख रहे हैं। करीब 7 बजे पुलिस प्रशासन के तीन गाड़ियां पहुंची।
मरीजों ने कहा कि वह कानपुर चले गए हैं। दोपहर को उद्योगपति मन्नी सिंह की कार से फर्रुखाबाद डॉ. रजनी सरीन के यहां पहुंचे। वहां अन्य पदाधिकारियों से बात कर जिले से कारसेवकों के पहुंचने की रणनीति बनाई। उनके कंपाउंडर विजय मिश्रा के नाम से रिजर्वेशन कराकर मथुरा निकल गए। वहां अलीगढ़ के ज्ञानप्रकाश तिवारी व अन्य कार्यकर्ताओं से विचारविमर्श किया। इटावा होते हुए कानपुर पहुंचकर पदाधिकारियों से मिले। फिर अयोध्या पहुंचे। बंगाल के कोठारी बंधुओं का जत्था उनके आगे ही था। डॉ. नरेंद्र पांडेय ने बताया कि कोलकाता के राम व शरद कोठारी ने पहले गुंबद पर भगवा ध्वज फहराया तो श्रीराम भक्ति में पूरी अयोध्या गूंज उठी। कस्बे में वापस आकर राम जुलूस में काफी भीड़ उमड़ी। थाने पहुंचने पर थानाध्यक्ष ने कहा कि अब गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है।
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वर्तमान में फतेहगढ़ में रह रहे डॉ. नरेंद्र पांडेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में फर्रुखाबाद, कन्नौज व कानपुर देहात के कार्य विभाग संचालक हैं। 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन के समय वह कस्बे में रेलवे रोड स्थित अपने नर्सिंग होम से गतिविधियां संचालित करते थे। अक्तूबर 1990 में भूमि पूजन के लिए अयोध्या चलो के आह्वान को विफल करने के लिए जिले में विहिप व संघ पदाधिकारियों के यहां छापे मारे जा रहे थे। तत्कालीन सह जिला संचालक को भी इसकी भनक थी। उस दिन सुबह 5 बजे उठकर मरीजों को देखा और कहा कि 6 बजे ट्रेन से कानपुर जाना है इसलिए जल्दी देख रहे हैं। करीब 7 बजे पुलिस प्रशासन के तीन गाड़ियां पहुंची।
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मरीजों ने कहा कि वह कानपुर चले गए हैं। दोपहर को उद्योगपति मन्नी सिंह की कार से फर्रुखाबाद डॉ. रजनी सरीन के यहां पहुंचे। वहां अन्य पदाधिकारियों से बात कर जिले से कारसेवकों के पहुंचने की रणनीति बनाई। उनके कंपाउंडर विजय मिश्रा के नाम से रिजर्वेशन कराकर मथुरा निकल गए। वहां अलीगढ़ के ज्ञानप्रकाश तिवारी व अन्य कार्यकर्ताओं से विचारविमर्श किया। इटावा होते हुए कानपुर पहुंचकर पदाधिकारियों से मिले। फिर अयोध्या पहुंचे। बंगाल के कोठारी बंधुओं का जत्था उनके आगे ही था। डॉ. नरेंद्र पांडेय ने बताया कि कोलकाता के राम व शरद कोठारी ने पहले गुंबद पर भगवा ध्वज फहराया तो श्रीराम भक्ति में पूरी अयोध्या गूंज उठी। कस्बे में वापस आकर राम जुलूस में काफी भीड़ उमड़ी। थाने पहुंचने पर थानाध्यक्ष ने कहा कि अब गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है।
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