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सीएनजी न मिलने से मुसीबत में फंसे प्रवासी ऑटो चालक, कमाई न होने से पैट्रोल का भी खर्च नहीं निकल रहा
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कमालगंज तिराहे पर टेंपो लिए खड़ा चालक। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
कमालगंज महाराष्ट्र व हरियाणा के शहरों से लौटे अनेक ऑटो चालक भी लॉकडाउन के बाद घाटे में काम करने को मजबूर हैं। छूट मिलने पर यहां ऑटो से सवारियां ढोने में लगे चालकों को पेट्रोल से पड़ता नहीं खा रहा। बाहरी प्रदेशों में सीएनजी से वाहन चलाने से वे खासा कमा लेते थे लेकिन इस समय इतनी भी कमाई नहीं हो रही कि पेट्रोल का खर्च निकल जाए।
विकास खंड की ग्राम पंचायत समदपुर के गांव मुरादपुर के 25 युवक हरियाणा के गुरुग्राम में ऑटो चलाते थी। कुछ अन्य गांवों के युवक भी महाराष्ट्र व हरियाणा के शहरों में यही काम कर परिवार चला रहे थे। वहां वे दिन में एक हजार से 1200 रुपये तक कमा लेते थे। लॉकडाउन के लंबा खिंचने से कई ऑटो चालक गांव लौट आए।
फर्रुखाबाद जिले में अनुमति मिलने पर चालकों ने गांव से ऑटो निकालकर सवारियां ढोने का काम शुरू किया तो घाटा होने लगा। ये सभी ऑटो वहां सीएनजी से चलते थे। बुधवार दोपहर कस्बे के रेलवे तिराहे पर खड़े मुरादपुर निवासी अश्वनी कुमार ने बताया कि वह होली पर 5 मार्च को ऑटो लेकर गुरुग्राम से अपने गांव आए थे। वह जब तक वापस जाते तब तक लॉकडाउन हो गया।
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कई चालक अपना ऑटो लेकर लॉकडाउन में गांव लौट आए। बताया कि उसने जिले में ही सवारी ढोना शुरूकर किया लेकिन फायदा होने के बजाय जेब से ही पैसे चले गए। गैर प्रांतों में अच्छी सड़कें हैं। 200 रुपये की सीएनजी से 190 से 200 किलोमीटर ऑटो चलता है। फर्रुखाबाद में सीएनजी नहीं है। 200 के पेट्रोल से 25 से 30 किलोमीटर ही ऑटो चलता है। यहां घाटा होने से वापस जाने की सोच रहे हैं।
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विकास खंड की ग्राम पंचायत समदपुर के गांव मुरादपुर के 25 युवक हरियाणा के गुरुग्राम में ऑटो चलाते थी। कुछ अन्य गांवों के युवक भी महाराष्ट्र व हरियाणा के शहरों में यही काम कर परिवार चला रहे थे। वहां वे दिन में एक हजार से 1200 रुपये तक कमा लेते थे। लॉकडाउन के लंबा खिंचने से कई ऑटो चालक गांव लौट आए।
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फर्रुखाबाद जिले में अनुमति मिलने पर चालकों ने गांव से ऑटो निकालकर सवारियां ढोने का काम शुरू किया तो घाटा होने लगा। ये सभी ऑटो वहां सीएनजी से चलते थे। बुधवार दोपहर कस्बे के रेलवे तिराहे पर खड़े मुरादपुर निवासी अश्वनी कुमार ने बताया कि वह होली पर 5 मार्च को ऑटो लेकर गुरुग्राम से अपने गांव आए थे। वह जब तक वापस जाते तब तक लॉकडाउन हो गया।
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कई चालक अपना ऑटो लेकर लॉकडाउन में गांव लौट आए। बताया कि उसने जिले में ही सवारी ढोना शुरूकर किया लेकिन फायदा होने के बजाय जेब से ही पैसे चले गए। गैर प्रांतों में अच्छी सड़कें हैं। 200 रुपये की सीएनजी से 190 से 200 किलोमीटर ऑटो चलता है। फर्रुखाबाद में सीएनजी नहीं है। 200 के पेट्रोल से 25 से 30 किलोमीटर ही ऑटो चलता है। यहां घाटा होने से वापस जाने की सोच रहे हैं।