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असमपुर में डेंगू से युवक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Fri, 07 Oct 2016 11:02 PM IST
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नबावगंज में गुमसुम बैठे अरविंद के परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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थाना क्षेत्र के गांव असमपुर निवासी अरविंद शाक्य (42) की डेंगू से मौत हो गई। गंभीर हालत में उन्हें शहर के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। गांव में दर्जनों लोग बुखार से पीड़ित चल रहे हैं।
गांव असमपुर निवासी अरविंद शाक्य को करीब आठ-दस दिन पहले बुखार आया था। वह आसपास के डाक्टरों से इलाज कराते रहे। हालत बिगड़ जाने पर उन्हें शहर के एक नर्सिंग होम में लाया गया, जहां खून की जांच में डेंगू निकला। उनकी प्लेटलेट्स पांच हजार पाई गई।
प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए उन पर प्लाज्मा की तीन बोतल भी चढ़ाई गईं लेकिन शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। गौरतलब यह है कि गांव में शबनम (14) पुत्री राजेंद्र कुमार, शिवानी (16), अवि (10) और अरविंद का बेटा गौतम (16) एवं गौतम का चचेरा भाई शिवम और चचेरी बहन सविता समेत दर्जनों लोग इस बुखार से पीड़ित चल रहे हैं।
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गौतम का कहना है कि यहां के लोग झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज कराते हैं और हालत बिगड़ जाने पर वह शहर जाते हैं। उसने बताया कि वह अपने पिता की तबियत खराब होने पर मोहम्मदाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया लेकिन वहां कुछ लाभ नहीं हुआ तो शहर के एक जाने-माने नर्सिंग होम लेकर आया।
अरविंद की मौत के बाद गांव में कोहराम मच गया। अरविंद की पत्नी और बच्चे बिलख-बिलख कर रोने लगे। उनके शव को पैतृक गांव असमपुर लाया गया और बाद में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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गांव असमपुर निवासी अरविंद शाक्य को करीब आठ-दस दिन पहले बुखार आया था। वह आसपास के डाक्टरों से इलाज कराते रहे। हालत बिगड़ जाने पर उन्हें शहर के एक नर्सिंग होम में लाया गया, जहां खून की जांच में डेंगू निकला। उनकी प्लेटलेट्स पांच हजार पाई गई।
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प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए उन पर प्लाज्मा की तीन बोतल भी चढ़ाई गईं लेकिन शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। गौरतलब यह है कि गांव में शबनम (14) पुत्री राजेंद्र कुमार, शिवानी (16), अवि (10) और अरविंद का बेटा गौतम (16) एवं गौतम का चचेरा भाई शिवम और चचेरी बहन सविता समेत दर्जनों लोग इस बुखार से पीड़ित चल रहे हैं।
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गौतम का कहना है कि यहां के लोग झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज कराते हैं और हालत बिगड़ जाने पर वह शहर जाते हैं। उसने बताया कि वह अपने पिता की तबियत खराब होने पर मोहम्मदाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया लेकिन वहां कुछ लाभ नहीं हुआ तो शहर के एक जाने-माने नर्सिंग होम लेकर आया।
अरविंद की मौत के बाद गांव में कोहराम मच गया। अरविंद की पत्नी और बच्चे बिलख-बिलख कर रोने लगे। उनके शव को पैतृक गांव असमपुर लाया गया और बाद में अंतिम संस्कार कर दिया गया।