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आरोग्य मेला कहीं डॉक्टर तो कहीं मरीजों का टोटा
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फैजबाग में मरीजों का इंतजार करती आयुष डॉ.कल्पना कटियार। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। तीन माह बाद रविवार को शहर के चार अस्पतालों और ग्रामीण क्षेत्र के 28 सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का आयोजन हुआ, लेकिन आरोग्य मेले फीके रहे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कहीं डॉक्टर ही नहीं आए तो कहीं मरीजों का टोटा रहा। ज्यादातर अस्पतालों में मरीजों की संख्या कम ही रही। इस कारण डॉक्टरों को इंतजार करना पड़ा।
विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद मुख्यमंत्री आरोग्य मेला नौ जनवरी से बंद कर दिया गया था। इसके बाद विधानपरिषद चुनाव की आचार संहिता लग गई। इस कारण तीन माह बाद 10 अप्रैल को आरोग्य मेला शासन के निर्देश पर फिर शुरू किया गया है।
इसके लिए शहर के चार और ग्रामीण क्षेत्र के 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आरोग्य मेले में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई। रामनवमी का त्योहार होने की वजह से लोगों ने अस्पतालों का रुख कम किया। कई अस्पतालों में डॉक्टर नहीं पहुंचे तो कहीं डॉक्टरों को मरीजों का इंतजार करना पड़ा। आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने आरोग्य मेले से किनारा कर लिया।
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नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भोलेपुर में दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी। डॉ. संध्या वर्मा आई ही नहीं, जबकि डॉ. स्मिता शाक्य करीब 12:15 बजे आईं। रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर 15 मिनट रुकने के बाद चली गईं। पूरे दिन में मात्र दो मरीज पहुंचे।
फार्मासिस्ट अखिलेश ने देेखकर उन्हें दवाई दी। एलटी विनय कुमार बैठे रहे, लेकिन जांच के लिए कोई मरीज नहीं आया। सीएचओ ज्योति व स्टाफ नर्स ड्यूटी पर मौजूद रहीं। हालांकि दवाओं की कमी नहीं रही। इसके अलावा पीएचसी नौलक्खा में डॉ. नवनीत गुप्ता ने आठ मरीजों को देेखकर दवाएं दी।
सीएचसी बरौन के अंतर्गत बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रमन्ना गुलजारबाग में लगे आरोग्य मेले में दोपहर 12:40 बजे डॉ. ऋषिनाथ गुप्ता और डॉ. ऋतू सिंह (दंत चिकित्सक) की कुर्सी खाली पड़ी थी। पूछने पर बताया गया कि डॉक्टर ड्यूटी पर आए ही नहीं। यहां मरीजों की जांच करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। फार्मासिस्ट विमलेश पाल के भरोसे चले आरोग्य मेले में तीन मरीज पहुंचे। फार्मासिस्ट ने ही देखकर दवाएं दीं।
शमसाबाद। क्षेत्र की पीएचसी फैजबाग में एमबीबीएस डॉ. विवेक विलियम दुबे और कई कर्मचारी नहीं पहुंचे। आयुष डॉ. कल्पना कटियार आरोग्य मेले में पहुंचीं और 10 मरीज देखे। इनमें सर्वाधिक मरीज खुजली से पीड़ित थे। फार्मासिस्ट ने मरीजों को दवाएं दीं। किसी मरीज की जांच नहीं की गई।
मोहम्मदाबाद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिमसेपुर पर आरोग्य मेले में तीन डॉक्टरों की ड्यूटी थी। आयुर्वेद चिकित्सक विधात्री मिश्रा नहीं पहुंचीं। डॉ. सौरभ कटियार और डॉ. राजीव कुमार ने आरोग्य मेले में पहुंचे 27 मरीज देखे। इनमें सर्वाधिक मरीज खुजली से पीड़ित थे। सभी को दवाएं दी गईं। पीएचसी में एलटी की तैनाती न होने से बुखार आदि के मरीजों की जांच नहीं हो सकी।
कंपिल। पीएचसी बरखेड़ा में दोपहर 12 बजे सन्नाटा पसरा था। डॉ. अनुपम राजपूत ड्यूटी पर मौजूद थे, जबकि डॉ. रजनीलता की कुर्सी खाली पड़ी थी। फार्मासिस्ट मनोज, लैब सहायक अनूप कुमार, एएनएम तस्मीन बैठी मिलीं। बताया गया अभी तक एक भी मरीज नहीं आया है। आशा भावना को टीकाकरण के लिए बच्चों को बुलाने के लिए भेजा गया है। अस्पताल में टीका लगवाने के लिए दो बच्चे मौजूद रहे। इससे टीकाकरण तक ही आरोग्य मेला सीमित रहा। पीएचसी बिल्सड़ी में लगे आरोग्य मेले में एक-दो मरीजों ही पहुंचे।
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विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद मुख्यमंत्री आरोग्य मेला नौ जनवरी से बंद कर दिया गया था। इसके बाद विधानपरिषद चुनाव की आचार संहिता लग गई। इस कारण तीन माह बाद 10 अप्रैल को आरोग्य मेला शासन के निर्देश पर फिर शुरू किया गया है।
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इसके लिए शहर के चार और ग्रामीण क्षेत्र के 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आरोग्य मेले में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई। रामनवमी का त्योहार होने की वजह से लोगों ने अस्पतालों का रुख कम किया। कई अस्पतालों में डॉक्टर नहीं पहुंचे तो कहीं डॉक्टरों को मरीजों का इंतजार करना पड़ा। आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने आरोग्य मेले से किनारा कर लिया।
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नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भोलेपुर में दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी। डॉ. संध्या वर्मा आई ही नहीं, जबकि डॉ. स्मिता शाक्य करीब 12:15 बजे आईं। रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर 15 मिनट रुकने के बाद चली गईं। पूरे दिन में मात्र दो मरीज पहुंचे।
फार्मासिस्ट अखिलेश ने देेखकर उन्हें दवाई दी। एलटी विनय कुमार बैठे रहे, लेकिन जांच के लिए कोई मरीज नहीं आया। सीएचओ ज्योति व स्टाफ नर्स ड्यूटी पर मौजूद रहीं। हालांकि दवाओं की कमी नहीं रही। इसके अलावा पीएचसी नौलक्खा में डॉ. नवनीत गुप्ता ने आठ मरीजों को देेखकर दवाएं दी।
सीएचसी बरौन के अंतर्गत बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रमन्ना गुलजारबाग में लगे आरोग्य मेले में दोपहर 12:40 बजे डॉ. ऋषिनाथ गुप्ता और डॉ. ऋतू सिंह (दंत चिकित्सक) की कुर्सी खाली पड़ी थी। पूछने पर बताया गया कि डॉक्टर ड्यूटी पर आए ही नहीं। यहां मरीजों की जांच करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। फार्मासिस्ट विमलेश पाल के भरोसे चले आरोग्य मेले में तीन मरीज पहुंचे। फार्मासिस्ट ने ही देखकर दवाएं दीं।
शमसाबाद। क्षेत्र की पीएचसी फैजबाग में एमबीबीएस डॉ. विवेक विलियम दुबे और कई कर्मचारी नहीं पहुंचे। आयुष डॉ. कल्पना कटियार आरोग्य मेले में पहुंचीं और 10 मरीज देखे। इनमें सर्वाधिक मरीज खुजली से पीड़ित थे। फार्मासिस्ट ने मरीजों को दवाएं दीं। किसी मरीज की जांच नहीं की गई।
मोहम्मदाबाद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिमसेपुर पर आरोग्य मेले में तीन डॉक्टरों की ड्यूटी थी। आयुर्वेद चिकित्सक विधात्री मिश्रा नहीं पहुंचीं। डॉ. सौरभ कटियार और डॉ. राजीव कुमार ने आरोग्य मेले में पहुंचे 27 मरीज देखे। इनमें सर्वाधिक मरीज खुजली से पीड़ित थे। सभी को दवाएं दी गईं। पीएचसी में एलटी की तैनाती न होने से बुखार आदि के मरीजों की जांच नहीं हो सकी।
कंपिल। पीएचसी बरखेड़ा में दोपहर 12 बजे सन्नाटा पसरा था। डॉ. अनुपम राजपूत ड्यूटी पर मौजूद थे, जबकि डॉ. रजनीलता की कुर्सी खाली पड़ी थी। फार्मासिस्ट मनोज, लैब सहायक अनूप कुमार, एएनएम तस्मीन बैठी मिलीं। बताया गया अभी तक एक भी मरीज नहीं आया है। आशा भावना को टीकाकरण के लिए बच्चों को बुलाने के लिए भेजा गया है। अस्पताल में टीका लगवाने के लिए दो बच्चे मौजूद रहे। इससे टीकाकरण तक ही आरोग्य मेला सीमित रहा। पीएचसी बिल्सड़ी में लगे आरोग्य मेले में एक-दो मरीजों ही पहुंचे।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिमसेपुर में मरीज को दवा लिखते डॉ. सौरभ कटियार। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरखेड़ा में बैठी डॉ. अनुपम राजपूत व एएनएम। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD