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किशोर पर झूठा मुकदमा लिखाने में तीन दरोगा फंसे
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फर्रुखाबाद। नौ साल पूर्व किशोर के खिलाफ आर्म्स एक्ट का झूठा मुकदमा लिखाकर राजकीय संप्रेक्षण भेजने में तत्कालीन मऊदरवाजा एसओ और दो दरोगा फंस गए हैं।
किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट ने किशोर अपचारी को मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया।
झूठी रिपोर्ट लिखाने वाले तीनों पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने का आदेश डीएम व एसपी को दिया है।
वर्ष 2013 में मऊदरवाजा थानाध्यक्ष रहे श्रीकांत शर्मा ने मारपीट व फायरिंग की सूचना पर अर्रापहाड़पुर में 15 नवंबर की रात 11 बजे दबिश दी थी।
कुछ देर बाद बजरिया चौकी प्रभारी रहे दरोगा इंद्रेश कुमार यादव भी वहां पहुंच गए। पुलिस के मुताबिक वहां गांव के दो लोग एक घर के बाहर खड़े मिले।
इसमें एक किशोर था, उसके हाथ में लाइसेंसी राइफल थी। दोनों को पकड़ कर पुलिस थाने ले गई। पुलिस ने किशोर के खिलाफ आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज किया। उसको राजकीय किशोर संप्रेक्षण गृह और दूसरे को जेल भेजा था।
किशोर की पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड में भेजी गई। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद सुनवाई हुई। किशोर ने आर्म्स एक्ट के मुकदमे में जमानत करा ली।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान किशोर से राइफल बरामद होने का मामला झूठा निकला, वह उसके पिता के नाम थी और पुलिस ने घर से बरामद की थी।
किशोर के खिलाफ पुलिस ने गलत रिपोर्ट लिखाई और संप्रेक्षण गृह भेजा था।
किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट राजेंद्र कुमार सिंह ने तत्कालीन मऊदरवाजा थानाध्यक्ष श्रीकांत यादव, बजरिया चौकी प्रभारी इंद्रेश कुमार व दरोगा कमल कुमार तिवारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए डीएम और एसपी को निर्णय की प्रति भेजी है।
इसमें कहा कि पुलिस कर्मियों को पता था कि गलत रिमांड पर जेल भेजना अपराध है, फिर भी उनके द्वारा ऐसा कृत्य किया गया।
पुलिस कर्मियों ने डीएम को भी भ्रम में रखकर किशोर के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्राप्त की गई। तीनों के खिलाफ कार्रवाई से बोर्ड को एक माह के अंदर अवगत कराया जाए।
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किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट ने किशोर अपचारी को मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया।
झूठी रिपोर्ट लिखाने वाले तीनों पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने का आदेश डीएम व एसपी को दिया है।
वर्ष 2013 में मऊदरवाजा थानाध्यक्ष रहे श्रीकांत शर्मा ने मारपीट व फायरिंग की सूचना पर अर्रापहाड़पुर में 15 नवंबर की रात 11 बजे दबिश दी थी।
कुछ देर बाद बजरिया चौकी प्रभारी रहे दरोगा इंद्रेश कुमार यादव भी वहां पहुंच गए। पुलिस के मुताबिक वहां गांव के दो लोग एक घर के बाहर खड़े मिले।
इसमें एक किशोर था, उसके हाथ में लाइसेंसी राइफल थी। दोनों को पकड़ कर पुलिस थाने ले गई। पुलिस ने किशोर के खिलाफ आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज किया। उसको राजकीय किशोर संप्रेक्षण गृह और दूसरे को जेल भेजा था।
किशोर की पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड में भेजी गई। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद सुनवाई हुई। किशोर ने आर्म्स एक्ट के मुकदमे में जमानत करा ली।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान किशोर से राइफल बरामद होने का मामला झूठा निकला, वह उसके पिता के नाम थी और पुलिस ने घर से बरामद की थी।
किशोर के खिलाफ पुलिस ने गलत रिपोर्ट लिखाई और संप्रेक्षण गृह भेजा था।
किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट राजेंद्र कुमार सिंह ने तत्कालीन मऊदरवाजा थानाध्यक्ष श्रीकांत यादव, बजरिया चौकी प्रभारी इंद्रेश कुमार व दरोगा कमल कुमार तिवारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए डीएम और एसपी को निर्णय की प्रति भेजी है।
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इसमें कहा कि पुलिस कर्मियों को पता था कि गलत रिमांड पर जेल भेजना अपराध है, फिर भी उनके द्वारा ऐसा कृत्य किया गया।
पुलिस कर्मियों ने डीएम को भी भ्रम में रखकर किशोर के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्राप्त की गई। तीनों के खिलाफ कार्रवाई से बोर्ड को एक माह के अंदर अवगत कराया जाए।
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