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कट रहे खेत, फसलें बहीं
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Fri, 08 Jul 2016 11:04 PM IST
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कटरी तौफीक में सड़क न कटे इसके लिए खेतों के किनारे मेड़ बनाते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा के कटान से ग्राम सभा ऊगरपुर और कटरी तौफीक में ग्रामीणों के खेत कटने लगे हैं। खेत कटने से उनकी सिवाला और मक्का की फसल भी बह गई। वहीं ऊगरपुर में गंगा किनारे रखीं झोपड़ियां भी बह गईं। हालांकि एक-दो दिन से गंगा का जलस्तर घटने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
नरौरा और हरिद्वार से पानी छोड़े जाने के चलते गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा। इसके चलते गांव ऊगरपुर और कटरी तौफीक में जिन ग्रामीणों के खेत गंगा किनारे हैं, उनके खेत कटने लगे हैं। गांव ऊगरपुर में रामरतन, चेतराम, अनिल कुमार, ज्ञान सिंह समेत करीब आधा दर्जन और गांव कटरी तौफीक में धर्मपाल, नन्हेंलाल, गिरीशचंद्र, राजाराम आदि ग्रामीणों के करीब दो-दो बीघा खेत कट गए हैं।
इन ग्रामीणों का कहना है कि उनके खेतों में सिवाला और मक्का की फसल खड़ी थी, जो बह गई। अगर कटान बढ़ा तो सभी के पूरे खेत कट जाएंगे और फसल बह जाएगी। वहीं गांव ऊगरपुर में गंगा किनारे रखीं उदयवीर, पूसेलाल, शिवसागर, मुरारीलाल की झोपड़ियां बह चुकी हैं। इन लोगों ने ऊंचे स्थान पर डेरा जमा रखा है। गांव किनारे तक पानी आ जाने के चलते कई ग्रामीण तो करीब एक सप्ताह पहले ही ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर गए हैं।
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हालांकि एक-दो दिन से गंगा का जलस्तर घटा है। इससे ग्रामीणों को राहत मिली है। बाढ़ कहीं गांव की सड़क न काट दे। इसके चलते ग्रामीण खेत किनारे मेड़ बना रहे हैं, जिससे बाढ़ का पानी सड़क तक न आ सके।
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नरौरा और हरिद्वार से पानी छोड़े जाने के चलते गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा। इसके चलते गांव ऊगरपुर और कटरी तौफीक में जिन ग्रामीणों के खेत गंगा किनारे हैं, उनके खेत कटने लगे हैं। गांव ऊगरपुर में रामरतन, चेतराम, अनिल कुमार, ज्ञान सिंह समेत करीब आधा दर्जन और गांव कटरी तौफीक में धर्मपाल, नन्हेंलाल, गिरीशचंद्र, राजाराम आदि ग्रामीणों के करीब दो-दो बीघा खेत कट गए हैं।
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इन ग्रामीणों का कहना है कि उनके खेतों में सिवाला और मक्का की फसल खड़ी थी, जो बह गई। अगर कटान बढ़ा तो सभी के पूरे खेत कट जाएंगे और फसल बह जाएगी। वहीं गांव ऊगरपुर में गंगा किनारे रखीं उदयवीर, पूसेलाल, शिवसागर, मुरारीलाल की झोपड़ियां बह चुकी हैं। इन लोगों ने ऊंचे स्थान पर डेरा जमा रखा है। गांव किनारे तक पानी आ जाने के चलते कई ग्रामीण तो करीब एक सप्ताह पहले ही ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर गए हैं।
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हालांकि एक-दो दिन से गंगा का जलस्तर घटा है। इससे ग्रामीणों को राहत मिली है। बाढ़ कहीं गांव की सड़क न काट दे। इसके चलते ग्रामीण खेत किनारे मेड़ बना रहे हैं, जिससे बाढ़ का पानी सड़क तक न आ सके।