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हड़ताल से लौटे एंबुलेंस कर्मी, शपथ बना पत्र बाधा
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लोहिया अस्पताल में बैठक में मौजूद एंबुलेंस कर्मचारी।
- फोटो : FARRUKHABAD
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हड़ताल से लौटे एंबुलेंस कर्मी
फर्रुखाबाद। शासन और कंपनी से वार्ता के बाद सहमति बनते ही एंबुलेंस के कर्मचारी वापस आने लगे हैं। मगर यहां शपथ पत्र काम शुरू करने में बाधा बन गया है। इसलिए अजमंस की स्थिति बनी हुई है। जीवीके कंपनी जिले के 90 चालक और ईएमटी को बर्खास्त भी कर चुकी है।
लखनऊ में हड़ताल खत्म होने का ऐलान होते ही शनिवार सुबह से ही एंबुलेंस के पुराने चालकों और ईएमटी का पहुंचना शुरू हो गया है। करीब 100 कर्मियों ने प्रोग्राम मैनेजर से संपर्क साधा। दोबारा कार्यभार ग्रहण कराने की बात कही, तो प्रोग्राम मैनेजर सौरभ चौहान ने एक शपथ पत्र दिया।
उस शपथ पत्र पर जो शर्तें लिखी गई हैं, वह कर्मचारी बंधुआ मजदूर की श्रेणी में लाने की कोशिश करना बता रहे हैं। लिहाजा अधिकांश कर्मियों ने शपथ पत्र भरने से इनकार कर दिया। देर रात तक लोहिया अस्पताल में पुराने कर्मचारी भटकते रहे, मगर उनसे काम शुरू नहीं कराया गया। लिहाजा अभी भी अजमंस की स्थिति बनी हुई है।
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कंपनी ने एक अगस्त तक काम पर वापस आने का अल्टीमेटम दिया था। ऐसे में स्थानीय अ धिकारियों की सहमति पर जिले के 90 कर्मियों को बर्खास्त कर दिया। इन्हें दोबारा काम पर लेना काफी मुश्किल होगा। कर्मियों का कहना है कि काम पर आएंगे, तो सभी कर्मचारी आएंगे। ऐसे में फिलहाल गतिरोध खत्म होना मुश्किल लग रहा है।
एस्मा में नामजदों की तलाश में घूमी पुलिस
जीवीके कंपनी के प्रोग्राम मैनेजर सौरभ चौहान के पत्र को संज्ञान में लेकर सीएमओ ने सात कर्मियों पर एस्मा का मुकदमा दर्ज कराया था। कर्मियों के वापस आने की सूचना आवास विकास चौकी प्रभारी विशेष कुमार को लगी तो वह पुलिस के साथ कई बार नामजद कर्मियों की तलाश में अस्पताल पहुंचे। हालांकि उन्हें कोई नहीं मिला। चौकी प्रभारी ने बताया कि नामजदों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
‘कंपनी के निर्देश हैं कि बिना शपथ पत्र भरे किसी भी कर्मचारी को काम पर न लिया जाए। करीब 20 कर्मियों ने काम शुरू किया है। उनकी कोशिश है कि आगे कभी हड़ताल की स्थिति न बने।’- सौरभ चौहान, प्रोग्राम मैनेजर जीवीके कंपनी।
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फर्रुखाबाद। शासन और कंपनी से वार्ता के बाद सहमति बनते ही एंबुलेंस के कर्मचारी वापस आने लगे हैं। मगर यहां शपथ पत्र काम शुरू करने में बाधा बन गया है। इसलिए अजमंस की स्थिति बनी हुई है। जीवीके कंपनी जिले के 90 चालक और ईएमटी को बर्खास्त भी कर चुकी है।
लखनऊ में हड़ताल खत्म होने का ऐलान होते ही शनिवार सुबह से ही एंबुलेंस के पुराने चालकों और ईएमटी का पहुंचना शुरू हो गया है। करीब 100 कर्मियों ने प्रोग्राम मैनेजर से संपर्क साधा। दोबारा कार्यभार ग्रहण कराने की बात कही, तो प्रोग्राम मैनेजर सौरभ चौहान ने एक शपथ पत्र दिया।
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उस शपथ पत्र पर जो शर्तें लिखी गई हैं, वह कर्मचारी बंधुआ मजदूर की श्रेणी में लाने की कोशिश करना बता रहे हैं। लिहाजा अधिकांश कर्मियों ने शपथ पत्र भरने से इनकार कर दिया। देर रात तक लोहिया अस्पताल में पुराने कर्मचारी भटकते रहे, मगर उनसे काम शुरू नहीं कराया गया। लिहाजा अभी भी अजमंस की स्थिति बनी हुई है।
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कंपनी ने एक अगस्त तक काम पर वापस आने का अल्टीमेटम दिया था। ऐसे में स्थानीय अ धिकारियों की सहमति पर जिले के 90 कर्मियों को बर्खास्त कर दिया। इन्हें दोबारा काम पर लेना काफी मुश्किल होगा। कर्मियों का कहना है कि काम पर आएंगे, तो सभी कर्मचारी आएंगे। ऐसे में फिलहाल गतिरोध खत्म होना मुश्किल लग रहा है।
एस्मा में नामजदों की तलाश में घूमी पुलिस
जीवीके कंपनी के प्रोग्राम मैनेजर सौरभ चौहान के पत्र को संज्ञान में लेकर सीएमओ ने सात कर्मियों पर एस्मा का मुकदमा दर्ज कराया था। कर्मियों के वापस आने की सूचना आवास विकास चौकी प्रभारी विशेष कुमार को लगी तो वह पुलिस के साथ कई बार नामजद कर्मियों की तलाश में अस्पताल पहुंचे। हालांकि उन्हें कोई नहीं मिला। चौकी प्रभारी ने बताया कि नामजदों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
‘कंपनी के निर्देश हैं कि बिना शपथ पत्र भरे किसी भी कर्मचारी को काम पर न लिया जाए। करीब 20 कर्मियों ने काम शुरू किया है। उनकी कोशिश है कि आगे कभी हड़ताल की स्थिति न बने।’- सौरभ चौहान, प्रोग्राम मैनेजर जीवीके कंपनी।