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दूसरे चेचिस नंबर पर एंबुलेंस को घोषित कर दिया फिट
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दूसरे वाहन के चेसिस नंबर पर एंबुलेंस फिट
फर्रुखाबाद। एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत एंबुलेंस को दूसरे वाहन के चेसिस नंबर पर फिटनेस का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। जब मामला खुला तो विभाग में हड़कंप मच गया। रिकार्ड रूम से फाइल निकलवाकर जांच शुरू कर दी गई। आरआई ने एंबुलेंस का निरीक्षण और लिपिक ने सत्यापन किया था।
जनपद उन्नाव से एक वर्ष पहले एनओसी लेकर आई एंबुलेंस यहां के एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत हुई थी। एंबुलेंस का पंजीकरण नंबर यूपी 35 एटी 4005 है। इसका रजिस्ट्रेशन शहर कोतवाली के मोहल्ला खतराना निवासी सर्वेश कुमार के नाम है। दो दिन पहले फिटनेस के लिए एंबुलेंस को कार्यालय मंगवाया गया था। पंजीयन प्रमाण पत्र में इसका चेसिस नंबर 385056 सीयू 2708923 है।
फिटनेस के लिए फार्म पर चेसिस नंबर उतारा गया तो ये 850568 यू 7917810 निकला। आरआई जीवन कुमार ने एंबुलेंस का निरीक्षण कर इसी नंबर को देखकर हस्ताक्षर कर दिए। फाइल वरिष्ठ लिपिक राजेंद्र कुमार के पास पहुंची और उन्होंने भी सत्यापन कर दिया। मंगलवार को एंबुलेंस का फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। बुधवार को कार्यालय के रिकार्ड रूम से दस्तावेज बाहर दलालों के पास पहुंच गए। इसके बाद दूसरे चेसिस नंबर से फिटनेस की बात खुली। फिर क्या था। विभाग में हड़कंप मच गया।
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विभाग के रिकार्ड रूम से फाइल निकलवाकर देखी गई। फाइल की फोटोकॉपी बाहर कैसे पहुंच गई इस पर आरआई ने कर्मचारियों को फटकार लगाई। कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे खंगाल कर देखा गया कि फाइल की फोटोकॉपी बाहर कैसे पहुंची लेकिन कुछ पता नहीं चला।
सूत्रों के मुताबिक एंबुलेंस की फिटनेस जारी करने के लिए 1000 रुपये अधिकारी व 500 रुपये लिपिक के नाम से लिए जाते हैं। ऐसे में रुपये के लालच में फाइल की अनदेखी कर फिटनेेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।
आरआई जीवन कुमार ने बताया कि उन्होंने निरीक्षण के बाद अपने कंप्यूटर पर एंबुलेंस के छह फोटो अपलोड किए हैं। लिपिक राजेंद्र के पटल से सत्यापन में गलती हुई है। फिटनेस प्रमाण पत्र पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं करवाए गए है। लिपिक के पटल से ही फिटनेस का प्रमाण पत्र प्रिंट करके जारी कर दिया गया है।
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फर्रुखाबाद। एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत एंबुलेंस को दूसरे वाहन के चेसिस नंबर पर फिटनेस का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। जब मामला खुला तो विभाग में हड़कंप मच गया। रिकार्ड रूम से फाइल निकलवाकर जांच शुरू कर दी गई। आरआई ने एंबुलेंस का निरीक्षण और लिपिक ने सत्यापन किया था।
जनपद उन्नाव से एक वर्ष पहले एनओसी लेकर आई एंबुलेंस यहां के एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत हुई थी। एंबुलेंस का पंजीकरण नंबर यूपी 35 एटी 4005 है। इसका रजिस्ट्रेशन शहर कोतवाली के मोहल्ला खतराना निवासी सर्वेश कुमार के नाम है। दो दिन पहले फिटनेस के लिए एंबुलेंस को कार्यालय मंगवाया गया था। पंजीयन प्रमाण पत्र में इसका चेसिस नंबर 385056 सीयू 2708923 है।
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फिटनेस के लिए फार्म पर चेसिस नंबर उतारा गया तो ये 850568 यू 7917810 निकला। आरआई जीवन कुमार ने एंबुलेंस का निरीक्षण कर इसी नंबर को देखकर हस्ताक्षर कर दिए। फाइल वरिष्ठ लिपिक राजेंद्र कुमार के पास पहुंची और उन्होंने भी सत्यापन कर दिया। मंगलवार को एंबुलेंस का फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। बुधवार को कार्यालय के रिकार्ड रूम से दस्तावेज बाहर दलालों के पास पहुंच गए। इसके बाद दूसरे चेसिस नंबर से फिटनेस की बात खुली। फिर क्या था। विभाग में हड़कंप मच गया।
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विभाग के रिकार्ड रूम से फाइल निकलवाकर देखी गई। फाइल की फोटोकॉपी बाहर कैसे पहुंच गई इस पर आरआई ने कर्मचारियों को फटकार लगाई। कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे खंगाल कर देखा गया कि फाइल की फोटोकॉपी बाहर कैसे पहुंची लेकिन कुछ पता नहीं चला।
सूत्रों के मुताबिक एंबुलेंस की फिटनेस जारी करने के लिए 1000 रुपये अधिकारी व 500 रुपये लिपिक के नाम से लिए जाते हैं। ऐसे में रुपये के लालच में फाइल की अनदेखी कर फिटनेेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।
आरआई जीवन कुमार ने बताया कि उन्होंने निरीक्षण के बाद अपने कंप्यूटर पर एंबुलेंस के छह फोटो अपलोड किए हैं। लिपिक राजेंद्र के पटल से सत्यापन में गलती हुई है। फिटनेस प्रमाण पत्र पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं करवाए गए है। लिपिक के पटल से ही फिटनेस का प्रमाण पत्र प्रिंट करके जारी कर दिया गया है।