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दुश्वारियां: पीठ पर बैग, कंधे पर मुल्लू और कजरी
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फर्रुखाबाद। गैरप्रांतों में मजदूरी कर जीवनयापन करने वालों के सामने दुश्वारियां ऐसी कि सुनते ही मन व्यथित और आंखों में आंसू आ जाते हैं। एक बिहार का परिवार अलीगढ़ तक अलग-अलग वाहनों से आया और वहां से पैदल ही चल पड़ा, तो तीसरे दिन यहां पहुंचा। उसकी आवाज गले से फूटी, मगर पत्नी बोली, पीठ पर बैग, कंधों पर मुल्लू और कजरी को लेकर चलना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं। अब हरदोई के सवायजपुर स्थित रिश्तेदारी तक दूरी तय करनी है।
लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में भट्ठा मजदूरी करते जयपाल पुत्र द्वारिका प्रसाद बिहार के निवासी हैं। उनके साथ पत्नी बसंती देवी, पुत्री झुनझुन (7), कजरी (3) और पुत्र मुल्लू (5) तथा भाई अनुज पाल था। कहते हैं कि क्या-क्या नहीं सहा। भूख से व्याकुल बच्चों को कुछ समाजसेवियों ने बिस्कुट आदि दे दिए। बसंती देवी बताती हैं कि बच्चे पैदल चलने से हार गए, तो कभी मैं, तो कभी देवर और कभी पति कंधों पर उठाते। अब पूरा सामान और कंधों पर बच्चों को, कुछ न पूछो, क्या-क्या दिक्कतें हुई हैं। अब यहां से बताया गया कि बसों की व्यवस्था की गई है। फर्रुखाबाद में आने पर रास्ते में भरपेट भोजन भी मिल गया। 48 घंटों का सफर बेहद कठिन रहा।
दोगुना किराया वसूला, बीच रास्ते में उतारा
कमालगंज। दूसरे प्रदेशों से लौट रहे लोगों की मुसीबत अपने क्षेत्र के करीब आकर भी कम नहीं हो रहीं। मजबूरी का फायदा उठाकर दोगुना किराया वसूला जा रहा है। शनिवार रात 11 बजे रामपुर डिपो की बस से ऊपर व नीचे बैठकर लोग कमालगंज रेलवे तिराहे के पास उतरे। ये लोग दिल्ली से मुरादाबाद तक पैदल आए थे। मुरादाबाद से बस से फर्रुखाबाद तक के लिए वहां के अधिकारियों ने भिजवाया। फर्रुखाबाद आने पर लोगों ने कहा तो चालक कमालगंज तक बस ले आया, लेकिन 20 के बजाय 40 रुपये किराया मांगने पर विवाद हो गया। वहीं लाल रंग की एक बस फर्रुखाबाद से कन्नौज के लिए चली तो उसने 200 रुपये प्रति यात्री किराया वसूला। फतेहगढ़ निवासी राजू कटियार ने बताया कि शनिवार रात कन्नौज के लिए जिन आठ लोगों के पास 100 रुपये ही बचे थे, उन लोगों को बस वाले ने फतेहगढ़ में उतार दिया।
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लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में भट्ठा मजदूरी करते जयपाल पुत्र द्वारिका प्रसाद बिहार के निवासी हैं। उनके साथ पत्नी बसंती देवी, पुत्री झुनझुन (7), कजरी (3) और पुत्र मुल्लू (5) तथा भाई अनुज पाल था। कहते हैं कि क्या-क्या नहीं सहा। भूख से व्याकुल बच्चों को कुछ समाजसेवियों ने बिस्कुट आदि दे दिए। बसंती देवी बताती हैं कि बच्चे पैदल चलने से हार गए, तो कभी मैं, तो कभी देवर और कभी पति कंधों पर उठाते। अब पूरा सामान और कंधों पर बच्चों को, कुछ न पूछो, क्या-क्या दिक्कतें हुई हैं। अब यहां से बताया गया कि बसों की व्यवस्था की गई है। फर्रुखाबाद में आने पर रास्ते में भरपेट भोजन भी मिल गया। 48 घंटों का सफर बेहद कठिन रहा।
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दोगुना किराया वसूला, बीच रास्ते में उतारा
कमालगंज। दूसरे प्रदेशों से लौट रहे लोगों की मुसीबत अपने क्षेत्र के करीब आकर भी कम नहीं हो रहीं। मजबूरी का फायदा उठाकर दोगुना किराया वसूला जा रहा है। शनिवार रात 11 बजे रामपुर डिपो की बस से ऊपर व नीचे बैठकर लोग कमालगंज रेलवे तिराहे के पास उतरे। ये लोग दिल्ली से मुरादाबाद तक पैदल आए थे। मुरादाबाद से बस से फर्रुखाबाद तक के लिए वहां के अधिकारियों ने भिजवाया। फर्रुखाबाद आने पर लोगों ने कहा तो चालक कमालगंज तक बस ले आया, लेकिन 20 के बजाय 40 रुपये किराया मांगने पर विवाद हो गया। वहीं लाल रंग की एक बस फर्रुखाबाद से कन्नौज के लिए चली तो उसने 200 रुपये प्रति यात्री किराया वसूला। फतेहगढ़ निवासी राजू कटियार ने बताया कि शनिवार रात कन्नौज के लिए जिन आठ लोगों के पास 100 रुपये ही बचे थे, उन लोगों को बस वाले ने फतेहगढ़ में उतार दिया।
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