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अख्तर के रावण को मारेंगे राम
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Fri, 23 Sep 2016 11:14 PM IST
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कसबा में इस बार पुतले बनाने का काम एक पखवारा पहले से ही शुरू हो गया है। पिछले 50 वर्षाें से अख्तर हुसैन कसबे में पुतले बनाकर एक मिसाल कायम किए हुए हैं।
क्षेत्र में रामलीला का दौर शुरू हो गया है। जगह-जगह पुतला बनने का काम शुरू हो गया है। रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनना शुरू हो गए हैं। कसबा में इस बार 28 फीट का रावण, 25 फीट का कुंभकरण और 18 फीट मेघनाथ के पुतले तैयार किए जा रहे हैं।
पिछले लगभग 50 वर्षाें से कसबा निवासी अख्तर हुसैन रामलीला के किरदारों के पुतले बनाकर एक मिसाल कायम किए हुए हैं। इनका कहना है कि उन्होंने दस साल की उम्र से ही ये काम शुरू कर दिए थे। तब से लगातार वही रामलीला के पुतले बनाते आ रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि वह मैनपुरी, मोहम्मदाबाद, याकूतगंज, फतेहगढ़ आदि जगहों पर भी पुतले बना चुके हैं। बताया कि पुतले बनाने में बांस, सुतली, रद्दी, लेई और धागा की आवश्यकता होती है। उन्होंने मोहर्रम पर कई ताजिए भी बनाए हैं, जिसमें उन्हें ईनाम भी मिला है।
उन्होंने बताया उम्र अधिक हो जाने के कारण अपने भतीजे अशरफ हुसैन को सहयोग के लिए काम पर लगाया है। वह सिर्फ देखरेख करते हैं। तीनों पुतलों में करीब 35-36 हजार रुपये की लागत आती है।
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क्षेत्र में रामलीला का दौर शुरू हो गया है। जगह-जगह पुतला बनने का काम शुरू हो गया है। रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनना शुरू हो गए हैं। कसबा में इस बार 28 फीट का रावण, 25 फीट का कुंभकरण और 18 फीट मेघनाथ के पुतले तैयार किए जा रहे हैं।
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पिछले लगभग 50 वर्षाें से कसबा निवासी अख्तर हुसैन रामलीला के किरदारों के पुतले बनाकर एक मिसाल कायम किए हुए हैं। इनका कहना है कि उन्होंने दस साल की उम्र से ही ये काम शुरू कर दिए थे। तब से लगातार वही रामलीला के पुतले बनाते आ रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि वह मैनपुरी, मोहम्मदाबाद, याकूतगंज, फतेहगढ़ आदि जगहों पर भी पुतले बना चुके हैं। बताया कि पुतले बनाने में बांस, सुतली, रद्दी, लेई और धागा की आवश्यकता होती है। उन्होंने मोहर्रम पर कई ताजिए भी बनाए हैं, जिसमें उन्हें ईनाम भी मिला है।
उन्होंने बताया उम्र अधिक हो जाने के कारण अपने भतीजे अशरफ हुसैन को सहयोग के लिए काम पर लगाया है। वह सिर्फ देखरेख करते हैं। तीनों पुतलों में करीब 35-36 हजार रुपये की लागत आती है।