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उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से प्रशासन सतर्क
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मेला रामनगरिया में सजी आस्था की नगरी।
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से गंगा में बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट हो गया है। पांचाल घाट स्थित मेला रामनगरिया व ढाईघाट पर कल्पवासियों को गंगा में जलस्तर बढ़ने को लेकर सतर्क कर दिया गया है। इसके साथ उन्हें गंगा किनारे से राउटी हटाने के भी निर्देश दिए गए।
एसडीएम सदर अनिल कुमार ने बताया कि शाम तक हरिद्वार से कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि ग्लेशियर टूटने से गंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए उन्होंने सीओ के साथ मेला रामगरिया में कल्पवासियों और दुकानदारों को सतर्क रहने को कहा है। हरिद्वार से देर रात तक जानकारी मिलने की संभावना है। फिलहाल मेले में चौकसी बढ़ा दी गई है।
दूसरी ओर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुशील कुमार सिंह ने बताया कि हरिद्वार तक गंगा में कितना पानी आया और कितना छोड़ा जाएगा, इसकी सूचना शाम तक नहीं मिल सकी। छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा तय होने पर उसी हिसाब से बचाव के इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हरिद्वार से फर्रुखाबाद तक गंगा में पानी आने में तीन से चार दिन लग जाते हैं।
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शमसाबाद के ढाईघाट गंगा तट पर लगी कल्पवासियों की राउटी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। गंगा का जल स्तर बढ़ने की आशंका से पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया। थानाध्यक्ष ने बताया मेले में कल्पवास कर रहे साधु-संतों को गंगा से दूर जाने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं। कल्पवासियों को गंगा से दूर हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
कल्पवासियों की चिंताए बढ़ीं
हरिद्वार से गंगा में पानी छोड़ा गया, तो गंगा पुत्रों के करीब 90 घाटों में पानी भर जाएगा। गंगा के किनारे से परिक्रमा मार्ग की दूरी करीब 150 से 200 फीट है। गंगा पुत्र मनोज कुमार का कहना है कि करीब तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी गंगा में छोड़ा जाता है, तो घाट डूब जाएंगे। साथ ही नीचे पड़ी राउटियां भी प्रभावित होंगी।
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एसडीएम सदर अनिल कुमार ने बताया कि शाम तक हरिद्वार से कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि ग्लेशियर टूटने से गंगा का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए उन्होंने सीओ के साथ मेला रामगरिया में कल्पवासियों और दुकानदारों को सतर्क रहने को कहा है। हरिद्वार से देर रात तक जानकारी मिलने की संभावना है। फिलहाल मेले में चौकसी बढ़ा दी गई है।
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दूसरी ओर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुशील कुमार सिंह ने बताया कि हरिद्वार तक गंगा में कितना पानी आया और कितना छोड़ा जाएगा, इसकी सूचना शाम तक नहीं मिल सकी। छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा तय होने पर उसी हिसाब से बचाव के इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हरिद्वार से फर्रुखाबाद तक गंगा में पानी आने में तीन से चार दिन लग जाते हैं।
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शमसाबाद के ढाईघाट गंगा तट पर लगी कल्पवासियों की राउटी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। गंगा का जल स्तर बढ़ने की आशंका से पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया। थानाध्यक्ष ने बताया मेले में कल्पवास कर रहे साधु-संतों को गंगा से दूर जाने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं। कल्पवासियों को गंगा से दूर हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
कल्पवासियों की चिंताए बढ़ीं
हरिद्वार से गंगा में पानी छोड़ा गया, तो गंगा पुत्रों के करीब 90 घाटों में पानी भर जाएगा। गंगा के किनारे से परिक्रमा मार्ग की दूरी करीब 150 से 200 फीट है। गंगा पुत्र मनोज कुमार का कहना है कि करीब तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी गंगा में छोड़ा जाता है, तो घाट डूब जाएंगे। साथ ही नीचे पड़ी राउटियां भी प्रभावित होंगी।