जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने हाथ खड़े किए

Farrukhabad Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
फर्रुखाबाद। गेहूं की फसलों में आग लगने से किसान लगातार तबाह हो रहे हैं और उनके घरों में शादी विवाह की तैयारियों पर ग्रहण लग रहा है वहीं दूसरी ओर इस नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन और मंडी समिति के पास कोई इंतजाम नहीं है। फसल बीमा योजना लागू होने के बाद भी सभी जिम्मेदार अधिकारी अपने-अपने हाथ खड़े कर रहे हैं। नुकसान को दैवीय आपदा की श्रेणी में लाने के लिए तमाम नियम कानून और शासनादेश का पेंच है और गेहूं किसानों को आर्थिक मदद मिलने की संभावना इन सब अव्यवस्‍थाओं के बीच क्षीण है।
जिले में अप्रैल महीने के दौरान अनुमानित तौर पर करीब दो दर्जन गावों में गेहूं की फसलें आग की भेंट चढ़ चुकी हैं। सबसे बड़ी आग शनिवार को अमृतपुर तहसील अंतर्गत गंगा नदी के कटरी क्षेत्र में लगी थी। जिसमें तीन गांव के किसानों को लगभग 25 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। इसके अलावा अन्य स्‍थानों पर भी आग की बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। अनुमानित तौर पर दो दर्जन गावों में गेहूं की फसलें आग की भेंट चढ़ चुकी हैं जबकि इनमें कुछ स्‍थानों पर दमकल पहुंचने से पहले ग्रामीणों ने खुद ही आग पर काबू पा लिया। फायर ब्रिगेड फतेहगढ़ के मुताबिक अब तक सात स्‍थानों पर गेहूं की फसलों में आग लगी जहां दमकल पहुंची और घटना पर काबू पाया।
आग से किसानों को लगातार नुकसान हो रहा है और तहसीलों से लेकर मंडी समिति तक में किसानों को आर्थिक मुआवजा दिए जाने का कोई इंतजाम नहीं है। सदर तहसीलदार इस्लाम मोहम्मद ने कहा कि फसलें जलने पर मुआवजा की राशि दिए जाने के लिए शासनादेश में नियम हैं। हाईटेंशन तारों की चिंगारी से आग लगने पर मुआवजा तय किया जाता है लेकिन इसकी वास्तविकता भी दिखवाई जाती है कि आग किस कारण से लगी। बताया कि ऐसे किसानों को चिंहित कर तहसील से सूची मंडी समिति में भेजी दी जाती है मुआवजा वहीं से मिलता है। बताया कि किसानों की सूची तैयार करवाई जा रही है।
कायमगंज के तहसीलदार रामजी लाल ने बताया कि उनके क्षेत्र में अब तक 11 घटनाएं आग की हुई हैं। इनमें आठ घटनाओं में किसानों को आर्थिक सहायता के लिए मंजूरी दी गई है। तीन घटनाओं में अभी जांच पड़ताल हो रही है। बताया कि इनमें पांच घटनाएं तारों की चिंगारी से हुई जिनके संबंध में चिट्ठी बिजली विभाग को भेज दी गई। कहा ‌कि चिंहित किसानों की सूची मंडी समिति को भेज दी गई है मुआवजा वहीं से मिलेगा।
दूसरी ओर मंडी समिति सातनपुर के सचिव धर्मेंद्र सिंह यादव ने मुआवजा दिए जाने की बात पर कहा कि अभी किसी भी किसान का दावा पत्र उन्हें नहीं मिला है। बताया कि सातनपुर के अलावा कायमगंज, मोहम्मदाबाद और फर्रुखाबाद मंडी का चार्ज भी उन्हीं के पास है। इन मंडियों में अभी तक कोई दावा पत्र प्राप्त नहीं हो सका है। मंडी सचिव ने तो यहां तक कहा कि किसानों को आर्थिक सहायता नहीं मिलती है बल्कि उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है कि हिम्मत रखें और अगले साल फिर से फसल लगाएं।


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