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मजदूर शिक्षा, सम्मान, सुविधा से है वंचित

Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
Farrukhabad
Farrukhabad Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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कायमगंज। देश के 46 करोड़ मजदूरों में से असगंठित क्षेत्र के 93 प्रतिशत श्रमिकों के लिए विश्व मई दिवस मात्र औपचारिकता है। सरकार की कागजी आर्थिक नीतियों से देश का मजदूर शिक्षा सम्मान व सुविधा से वंचित है। यह विचार नगर के मोहल्ला सधवाड़ा स्थित कृष्णा प्रेस परिसर में विश्व बंधु परिषद की ओर से आयोजित गोष्ठी में प्रो. रामबाबू मिश्र ने कहीं।
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गोष्ठी में कामरेड कर्मवीर शाक्य ने कहा कि एक मई 1886 में आठ घंटे कार्य दिवस की मांग को लेकर लगभग तीन लाख श्रमिकों ने हड़ताल की थी। पुलिस से संघर्ष में कई श्रमिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसके बाद पेरिस में इंटरनेशनल लेबर कांग्रेस ने एक मई 1890 को मई दिवस मनाने की घोषणा की। परम मिश्रा एडवोकेट ने कहा कि यूएनओ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में करीब बाइस लाख मजदूर दुर्घटनाओं और बीमारियों से मरते हैं। हंसा मिश्रा ने कहा कि भारत में महिला श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के अभाव में शोषण की शिकार होती है। गोपाल अग्निहोत्री ने कहा कि भारत में बाल श्रम की समस्या विकराल है। सरकार के तमाम प्रयास के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। लडै़तेलाल उत्तम ने कहा कि पूंजीपतियों ने श्रम नियमों की हमेशा अनदेखी की है। इसके अलावा राहुल शाक्य एडवोकेट, बाल किशन एडवोकेट, भगवती प्रसाद यादव ने भी विचार रखे। इस दौरान देवेंद्र गंगवार, वीरेंद्र कुमार, रविनाथ सिंह यादव, विनोद गंगवार, लालाराम शाक्य, राजकुमार, कैलाश चंद्र गौतम, सत्यप्रकाश चतुर्वेदी, शामोस बाबू एडवोकेट, श्रृद्वा मिश्रा, राशिद अली राशिद, शायर वहाब अहमद बहार आदि लोग मौजूद रहे।
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