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डीआर विश्वकर्मा, रामेंद्र त्रिपाठी, मीना सम्मानित
Farrukhabad
Updated Mon, 15 Dec 2014 05:30 AM IST
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फर्रुखाबाद। साहित्यिक सांस्कृतिक आध्यात्मिक संस्था वाग्विभा का द्वितीय वार्षिकोत्सव रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि परियोजना अधिकारी समेत अन्य लोगों को सम्मानित किया गया।
रविवार को मोहल्ला नुनहाई स्थित हिंदी भवन में आयोजित वाग्विभा के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि परियोजना अधिकारी डा. डीआर विश्वकर्मा ने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर व दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान रामेंद्र मोहन त्रिपाठी को वाग्विभा सम्मान दिया गया। मुख्य अतिथि परियोजना अधिकारी डा. विश्वकर्मा को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित सुदर्शनलाल शुक्ल स्मृति सम्मान से नवाजा गया। विशिष्ट शिक्षाविद् का सम्मान प्रधानाचार्या मीना यादव को दिया गया। नारायणी देवी चतुर्वेदी स्मृति सम्मान कवि सचिन अग्रवाल को मिला। संस्था सचिव गरिमा पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। आगरा से आए कवि रामेंद्र मोहन त्रिपाठी ने गजल ‘तन के लोभी मिले थे बहुत भीड़ में, मन चुरा लेने वाले के लाले रहे, जिंदगी डाकघर सी बनी ही रही, पत्र डाले गए फिर निकाले गए’ सुनाई तो समूचा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अलीगढ़ से आए युवा गजलकार सचिन अग्रवाल ने गजल सुनाई ‘बहाजिर जिंदगी का लिखके किस्सा रख दिया हमने, मगर सच वो था जो एक खाली पन्ना रख दिया हमने’। हास्य व्यंग के रचनाकार महेंद्र तिवारी ने रचनाएं सुनाकर लोगों को खूब गुदगुदाया। अभिषेक मुखर्जी, गीता भारद्वाज और उत्कर्ष अग्निहोत्री ने भी काव्य पाठ किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कवि डा. शिवओम अंबर, डा. रामबाबू पाठक, बीके सिंह, सुभाषचंद्र चतुर्वेदी, आलोक गौड़, अरविंद पालीवाल, उपकार मंणि उपकार, नलिन श्रीवास्तव, निमिष टंडन, सुरेंद्र पांडेय, अलका पांडेय, इंद्रा पांडेय, मधु गौड़, अनीता पालीवाल, अनिल मिश्रा, संजय गर्ग और राजीव मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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रविवार को मोहल्ला नुनहाई स्थित हिंदी भवन में आयोजित वाग्विभा के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि परियोजना अधिकारी डा. डीआर विश्वकर्मा ने सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर व दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान रामेंद्र मोहन त्रिपाठी को वाग्विभा सम्मान दिया गया। मुख्य अतिथि परियोजना अधिकारी डा. विश्वकर्मा को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित सुदर्शनलाल शुक्ल स्मृति सम्मान से नवाजा गया। विशिष्ट शिक्षाविद् का सम्मान प्रधानाचार्या मीना यादव को दिया गया। नारायणी देवी चतुर्वेदी स्मृति सम्मान कवि सचिन अग्रवाल को मिला। संस्था सचिव गरिमा पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। आगरा से आए कवि रामेंद्र मोहन त्रिपाठी ने गजल ‘तन के लोभी मिले थे बहुत भीड़ में, मन चुरा लेने वाले के लाले रहे, जिंदगी डाकघर सी बनी ही रही, पत्र डाले गए फिर निकाले गए’ सुनाई तो समूचा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अलीगढ़ से आए युवा गजलकार सचिन अग्रवाल ने गजल सुनाई ‘बहाजिर जिंदगी का लिखके किस्सा रख दिया हमने, मगर सच वो था जो एक खाली पन्ना रख दिया हमने’। हास्य व्यंग के रचनाकार महेंद्र तिवारी ने रचनाएं सुनाकर लोगों को खूब गुदगुदाया। अभिषेक मुखर्जी, गीता भारद्वाज और उत्कर्ष अग्निहोत्री ने भी काव्य पाठ किया।
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इस अवसर पर वरिष्ठ कवि डा. शिवओम अंबर, डा. रामबाबू पाठक, बीके सिंह, सुभाषचंद्र चतुर्वेदी, आलोक गौड़, अरविंद पालीवाल, उपकार मंणि उपकार, नलिन श्रीवास्तव, निमिष टंडन, सुरेंद्र पांडेय, अलका पांडेय, इंद्रा पांडेय, मधु गौड़, अनीता पालीवाल, अनिल मिश्रा, संजय गर्ग और राजीव मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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