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तीन माह में 35 नमूने, नौ ही फेल!
Farrukhabad
Updated Sat, 05 Jul 2014 05:33 AM IST
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फर्रु खाबाद। खाने पीने की चीजाें में धड़ल्ले से मिलावट की जा रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की लापरवाही से मिलावटखोराें के हौसले बुलंद हैं। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि तीन महीने यानी 90 दिनाें में सिर्फ 35 नमूने ही लिए गए, जिसमें लैब जांच के दौरान नौ ही नमूने फेल हुए।
चालू सत्र में अप्रैल से जून तक खाद्य सुरक्षा विभाग ने 35 नमूने भरे। इनमें दूध, खोवा, पनीर, घी, क्रीम, मिठाई, तेल, मसाले, कोल्डड्रिंक, चायपत्ती, सुपाड़ी व पान मसाला के नमूने थेे। इनमें से सरसाें के तेल क ा एक, मसाला का एक, दाल के दो, मिठाई के दो व पानमसाले के तीन नमूने फेल हो गए। जिन दुकानदारों की दुकानों से नमूने फेल हुए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी चल रही है। बता दें कि सैंपलिंग, जांच और कार्रवाई तक की लंबी प्रक्रिया के चलते मिलावटखोर खुलेआम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते रहते हैं। और उनका बाल बांका नहीं होता।
वर्ष 2013 में अप्रैल से दिसंबर तक महकमे ने 74 सैंपल भरे थे। इन्हें जांच के लिए लखनऊ की विभागीय प्रयोगशाला में भेजा गया था। इनमें से 17 नमूनाें में मिलावट पाई गई थी। इनमें से दूध, पनीर, मिठाई, सरसाें के तेल, वनस्पति घी, पैक वाटर का एक एक नमूना था। खोवा, सब्जी मसाला, अनाज, दाल, ब्रेकरी के दो नमूने फे ल हुए थे। लैब जांच में फेल हुए नमूनों के दुकानदाराें पर एसीजेएम व एडीएम कोर्ट में मुकदमे चल रहे हैं। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल शंखवार ने बताया कि विभाग मिलावटखोरी रोकने के लिए छापामारी कर नमूने लेने की कार्रवाई कर रहा है। वे मानते हैं कि जांच रिपोर्ट और कार्रवाई तक की प्रक्रिया बेहद लंबी होने से मिलावट के गोरखधंधे पर प्रभावी रूप से लगाम नहीं लग पा रही है। फिर भी विभाग इस ओर चौकन्ना है। समय-समय पर छापे और शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई करते हुए मिलावट पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।
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पुलिस फोर्स मिलने में आती दिक्कत
मिलावट रोकने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा महकमे की है। मुख्य खाद्य निरीक्षक और खाद्य निरीक्षक छापामारी अभियान चलाते हैं। यह नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजते हैं। वहां से रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाती है। छापे के दौरान दुकानदाराें के विरोध से बचने के लिए खाद्य निरीक्षक बिना पुलिस के अभियान शुरू नहीं कर पाते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों की मानें तो पुलिस इन्हें हर समय नहीं मिलती है। छापा के दौरान दुकानदार सूचनाएं फै लाकर सचेत करने लगते हैं। दुकानें बंद होेने लगती हैं। इससे साल भर में नमूनाें क ी संख्या 100 के पार नहीं पहुंच पाती है। लखनऊ की विभागीय प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने में एक से डेढ़ माह लग जाता है। न्यायालय में वाद का निर्णय होने में लंबा वक्त लग जाता है। इससे प्रभावी कार्रवाई ठंडी रहती है।
किस चीज में क्या मिलाते हैं मिलावटखोर
खोवा: घुइया व आलू की मिलावट।
दूध: अरारोट व यूरिया।
बेसन: मक्का, मटर व हल्दी।
आटा: चावल की पॉलिश।
हल्दी: पीला रंग।
सरसों का तेल: आरजीमोन, पॉम ऑयल।
मिठाई: चांदी की जगह एल्यूमिनियम वर्क, मिलावटी खोवा।
घी: पॉम आयल।
मसाले: चोकर, पिसी हुई लाल ईंट, लकड़ी का रंगीन बुरादा।
क्या कहते हैं चिकित्सक
डा.केएम द्विवेदी का कहना है कि मिलावटी चीजें स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। यह गुर्दे, आंत, सांस नली पर प्रभाव डालती हैं। मिलावटी चीजें पेट रोग, त्वचा रोग, नेत्र रोगाें को बढ़ावा देती हैं।
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चालू सत्र में अप्रैल से जून तक खाद्य सुरक्षा विभाग ने 35 नमूने भरे। इनमें दूध, खोवा, पनीर, घी, क्रीम, मिठाई, तेल, मसाले, कोल्डड्रिंक, चायपत्ती, सुपाड़ी व पान मसाला के नमूने थेे। इनमें से सरसाें के तेल क ा एक, मसाला का एक, दाल के दो, मिठाई के दो व पानमसाले के तीन नमूने फेल हो गए। जिन दुकानदारों की दुकानों से नमूने फेल हुए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी चल रही है। बता दें कि सैंपलिंग, जांच और कार्रवाई तक की लंबी प्रक्रिया के चलते मिलावटखोर खुलेआम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते रहते हैं। और उनका बाल बांका नहीं होता।
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वर्ष 2013 में अप्रैल से दिसंबर तक महकमे ने 74 सैंपल भरे थे। इन्हें जांच के लिए लखनऊ की विभागीय प्रयोगशाला में भेजा गया था। इनमें से 17 नमूनाें में मिलावट पाई गई थी। इनमें से दूध, पनीर, मिठाई, सरसाें के तेल, वनस्पति घी, पैक वाटर का एक एक नमूना था। खोवा, सब्जी मसाला, अनाज, दाल, ब्रेकरी के दो नमूने फे ल हुए थे। लैब जांच में फेल हुए नमूनों के दुकानदाराें पर एसीजेएम व एडीएम कोर्ट में मुकदमे चल रहे हैं। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल शंखवार ने बताया कि विभाग मिलावटखोरी रोकने के लिए छापामारी कर नमूने लेने की कार्रवाई कर रहा है। वे मानते हैं कि जांच रिपोर्ट और कार्रवाई तक की प्रक्रिया बेहद लंबी होने से मिलावट के गोरखधंधे पर प्रभावी रूप से लगाम नहीं लग पा रही है। फिर भी विभाग इस ओर चौकन्ना है। समय-समय पर छापे और शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई करते हुए मिलावट पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।
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पुलिस फोर्स मिलने में आती दिक्कत
मिलावट रोकने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा महकमे की है। मुख्य खाद्य निरीक्षक और खाद्य निरीक्षक छापामारी अभियान चलाते हैं। यह नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजते हैं। वहां से रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाती है। छापे के दौरान दुकानदाराें के विरोध से बचने के लिए खाद्य निरीक्षक बिना पुलिस के अभियान शुरू नहीं कर पाते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों की मानें तो पुलिस इन्हें हर समय नहीं मिलती है। छापा के दौरान दुकानदार सूचनाएं फै लाकर सचेत करने लगते हैं। दुकानें बंद होेने लगती हैं। इससे साल भर में नमूनाें क ी संख्या 100 के पार नहीं पहुंच पाती है। लखनऊ की विभागीय प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने में एक से डेढ़ माह लग जाता है। न्यायालय में वाद का निर्णय होने में लंबा वक्त लग जाता है। इससे प्रभावी कार्रवाई ठंडी रहती है।
किस चीज में क्या मिलाते हैं मिलावटखोर
खोवा: घुइया व आलू की मिलावट।
दूध: अरारोट व यूरिया।
बेसन: मक्का, मटर व हल्दी।
आटा: चावल की पॉलिश।
हल्दी: पीला रंग।
सरसों का तेल: आरजीमोन, पॉम ऑयल।
मिठाई: चांदी की जगह एल्यूमिनियम वर्क, मिलावटी खोवा।
घी: पॉम आयल।
मसाले: चोकर, पिसी हुई लाल ईंट, लकड़ी का रंगीन बुरादा।
क्या कहते हैं चिकित्सक
डा.केएम द्विवेदी का कहना है कि मिलावटी चीजें स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। यह गुर्दे, आंत, सांस नली पर प्रभाव डालती हैं। मिलावटी चीजें पेट रोग, त्वचा रोग, नेत्र रोगाें को बढ़ावा देती हैं।