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बंद मंडी समिति में अन्ना पशु छोड़ने आए प्रधान, सचिव व लेखपाल को खदेड़ा
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नवाबगंज (फर्रुखाबाद)। थाना क्षेत्र के गांव कनासी में बंद पड़ी मंडी समिति परिसर को अन्ना पशुओं के रखने के लिए चिह्नित किया गया है। रविवार को लेखपाल, सचिव और प्रधान ने करीब 60 अन्ना पशुओं को पकड़ा और इनको मंडी समिति परिसर में छोड़ने के लिए पहुंचे। ग्रामीणों ने विरोध कर अफसरों व अन्ना पशुओं को खदेड़ना शुरू कर दिया। किसी तरह प्रधान, लेखपाल व सचिव जान बचाकर गांव से निकल सके। इसकी जानकारी पुलिस को दी गई।
शासन के आदेश पर अन्ना पशुओं को पकड़ कर एक स्थान पर रखने का अभियान चल रहा है। गांव अठरुइया और समैचीपुर में अन्ना पशुओं को रखने की कोई जगह चिह्नित नहीं है। कनासी गांव में बंद पड़ी मंडी समिति परिसर को अन्ना पशुुओं को रखने के लिए चिह्नित किया गया है। रविवार को कनासी के प्रधान शेरसिंह, सचिव गिरंद राजपूत और लेखपाल सुशील त्रिपाठी ने अन्ना पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया। उन्होंने शाम तक करीब 60 अन्ना पशुओं को पकड़ा। इनको वाहनों से लेकर कनासी गांव में बंद पड़ी मंडी समिति परिसर में छोड़ने के लिए ले गए। वहां पशुओं को वाहनों से उतारता हुआ गांव के लोगों ने देख लिया।
गांव के करीब 30-40 लोग लाठी-डंडे लेकर आए और पशुओं को छोड़ने का विरोध करने लगे। इसको लेकर लेखपाल, सचिव की गांव वालों से नोकझोंक शुरू हो गई। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने लाठी से अन्ना पशुओं को वहां से खदेड़ दिया। सचिव, लेखपाल और प्रधान से धक्कामुक्की कर दी। माहौल बिगड़ता देखकर प्रधान, सचिव और लेखपाल वहां से भाग निकले। ग्रामीणों ने तीनों लोगों को गांव के बाहर तक खदेड़ दिया। देर शाम प्रधान चुपचाप घर पहुंचे। सचिव व लेखपाल ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। सचिव और लेखपाल ने बताया कि इस घटना की सोमवार को जिलाधिकारी को जानकारी दी जाएगी। प्रधान ने बताया कि बंद पड़ी मंडी में ग्रामीण अवैध कब्जा किए हैं। इसके चलते वह विरोध कर रहे हैं।
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शासन के आदेश पर अन्ना पशुओं को पकड़ कर एक स्थान पर रखने का अभियान चल रहा है। गांव अठरुइया और समैचीपुर में अन्ना पशुओं को रखने की कोई जगह चिह्नित नहीं है। कनासी गांव में बंद पड़ी मंडी समिति परिसर को अन्ना पशुुओं को रखने के लिए चिह्नित किया गया है। रविवार को कनासी के प्रधान शेरसिंह, सचिव गिरंद राजपूत और लेखपाल सुशील त्रिपाठी ने अन्ना पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया। उन्होंने शाम तक करीब 60 अन्ना पशुओं को पकड़ा। इनको वाहनों से लेकर कनासी गांव में बंद पड़ी मंडी समिति परिसर में छोड़ने के लिए ले गए। वहां पशुओं को वाहनों से उतारता हुआ गांव के लोगों ने देख लिया।
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गांव के करीब 30-40 लोग लाठी-डंडे लेकर आए और पशुओं को छोड़ने का विरोध करने लगे। इसको लेकर लेखपाल, सचिव की गांव वालों से नोकझोंक शुरू हो गई। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने लाठी से अन्ना पशुओं को वहां से खदेड़ दिया। सचिव, लेखपाल और प्रधान से धक्कामुक्की कर दी। माहौल बिगड़ता देखकर प्रधान, सचिव और लेखपाल वहां से भाग निकले। ग्रामीणों ने तीनों लोगों को गांव के बाहर तक खदेड़ दिया। देर शाम प्रधान चुपचाप घर पहुंचे। सचिव व लेखपाल ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। सचिव और लेखपाल ने बताया कि इस घटना की सोमवार को जिलाधिकारी को जानकारी दी जाएगी। प्रधान ने बताया कि बंद पड़ी मंडी में ग्रामीण अवैध कब्जा किए हैं। इसके चलते वह विरोध कर रहे हैं।
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