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फर्रुखाबादः बरेली-इटावा राजमार्ग को चौड़ा करने के लिए कटेंगे 53 हजार पेड़
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मोहम्मदाबाद क्षेत्र में काली नदी पुल से पहले इटावा-बरेली हाईवे किनारे खड़े पेड़। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। बरेली-इटावा राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने के लिए 53 हजार पेड़ों पर आरी चलेगी। जिले में इस राजमार्ग का 49.04 किलोमीटर हिस्सा आता है। वन विभाग ने कटने वाले पेड़ों को चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया है। रामगंगा से काली नदी पुल तक सड़क के दोनों ओर करीब 15 प्रजाति के पेड़ लगे हैं।
इटावा-बरेली हाईवे की चौड़ाई अभी सात मीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग में चले जाने के बाद अब इसे 14 मीटर चौड़ा करके फोरलेन किया जाएगा। इसके चलते इंजीनियरों ने मध्य सड़क से दोनों ओर सात-सात मीटर जगह खाली करने के लिए जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी थी। जिला प्रशासन ने वन विभाग को इस चौड़ाई में आने वाले पेड़ों की कटान करवाने के निर्देश दिए थे।
इसी के चलते वन विभाग ने टीम लगाकर पेड़ों की गिनती कराई, तो रामगंगा से काली नदी पुल तक 49.04 किमी लंबाई में 53,711 पेड़ चिह्नित हुए। इनमें 41,028 पेड़ शून्य से एक फीट व्यास मोटाई और 12,683 पेड़ एक फीट व्यास से अधिक मोटाई के निकले। काटे जाने वाले पेड़ों में नीम, यूकेलिप्टस, सागौन, शीशम, कैसिया, सिरम, आम, बालम खीरा, कदम, अर्जुन समेत करीब 15 प्रजातियां शामिल हैं।
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वन विभाग ने रामगंगा की ओर पेड़ों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। दो दिन में करीब एक किलोमीटर दूरी तक चिन्हांकन किया जा चुका है। यह काम होने के बाद वन विभाग लकड़ी की मात्रा निकाल कर रिपोर्ट वन निगम को सौंप देगा।
इसके बाद वन निगम पेड़ों की कटान शुरू करेगा। चिन्हांकन के काम में एक महीने से अधिक का समय लग सकता है। हालांकि अब यह साफ हो गया कि आने वाले दिनों में सड़क का निर्माण होने से जिले की जनता को काफी फायदा होगा।
पर्यावरण को होगा बड़ा नुकसान
पेड़ों की कटान से पर्यावरण को खासा नुकसान होगा। इस मार्ग पर हजारों पेड़ 20-20 साल पुराने हैं। ऐसे में साफ है कि दोबारा पेड़ों को बड़ा होने में काफी समय लगेगा।
फर्रुखाबाद के धन से इटावा में होगी हरियाली
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण काटे गए पेड़ों से दोगुने पौधे लगाने के लिए क्षतिपूर्ति निधि देता है। वन विभाग के पास अपनी जमीन नहीं है। लिहाजा पौधरोपण के लिए मिलने वाली क्षतिपूर्ति निधि इटावा के खाते में चली गई। इस निधि से वहां पौधे लगाए जाएंगे। प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी राजकुमार ने बताया कि हाईवे के किनारे जो भी जमीन बचेगी, उसमें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ही पौधरोपण करेगा।
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इटावा-बरेली हाईवे की चौड़ाई अभी सात मीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग में चले जाने के बाद अब इसे 14 मीटर चौड़ा करके फोरलेन किया जाएगा। इसके चलते इंजीनियरों ने मध्य सड़क से दोनों ओर सात-सात मीटर जगह खाली करने के लिए जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी थी। जिला प्रशासन ने वन विभाग को इस चौड़ाई में आने वाले पेड़ों की कटान करवाने के निर्देश दिए थे।
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इसी के चलते वन विभाग ने टीम लगाकर पेड़ों की गिनती कराई, तो रामगंगा से काली नदी पुल तक 49.04 किमी लंबाई में 53,711 पेड़ चिह्नित हुए। इनमें 41,028 पेड़ शून्य से एक फीट व्यास मोटाई और 12,683 पेड़ एक फीट व्यास से अधिक मोटाई के निकले। काटे जाने वाले पेड़ों में नीम, यूकेलिप्टस, सागौन, शीशम, कैसिया, सिरम, आम, बालम खीरा, कदम, अर्जुन समेत करीब 15 प्रजातियां शामिल हैं।
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वन विभाग ने रामगंगा की ओर पेड़ों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। दो दिन में करीब एक किलोमीटर दूरी तक चिन्हांकन किया जा चुका है। यह काम होने के बाद वन विभाग लकड़ी की मात्रा निकाल कर रिपोर्ट वन निगम को सौंप देगा।
इसके बाद वन निगम पेड़ों की कटान शुरू करेगा। चिन्हांकन के काम में एक महीने से अधिक का समय लग सकता है। हालांकि अब यह साफ हो गया कि आने वाले दिनों में सड़क का निर्माण होने से जिले की जनता को काफी फायदा होगा।
पर्यावरण को होगा बड़ा नुकसान
पेड़ों की कटान से पर्यावरण को खासा नुकसान होगा। इस मार्ग पर हजारों पेड़ 20-20 साल पुराने हैं। ऐसे में साफ है कि दोबारा पेड़ों को बड़ा होने में काफी समय लगेगा।
फर्रुखाबाद के धन से इटावा में होगी हरियाली
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण काटे गए पेड़ों से दोगुने पौधे लगाने के लिए क्षतिपूर्ति निधि देता है। वन विभाग के पास अपनी जमीन नहीं है। लिहाजा पौधरोपण के लिए मिलने वाली क्षतिपूर्ति निधि इटावा के खाते में चली गई। इस निधि से वहां पौधे लगाए जाएंगे। प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी राजकुमार ने बताया कि हाईवे के किनारे जो भी जमीन बचेगी, उसमें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ही पौधरोपण करेगा।