{"_id":"6205516a5d4c9e54115c6ba7","slug":"30-patients-waiting-in-six-bed-dialysis-unit-farrukhabad-news-knp6799335158","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह बेड की डायलिसिस यूनिट में 30 मरीज की वेटिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह बेड की डायलिसिस यूनिट में 30 मरीज की वेटिंग
विज्ञापन
लोहिया अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में भर्ती मरीज से हालचाल लेते प्रभारी जहीर खान। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में तीन माह पहले शुरू हुई छह बेड की डायलिसिस यूनिट से किडनी के मरीजों को सहूलियत तो मिली, लेकिन मरीजों की संख्या के हिसाब से यह सुविधा नाकाफी है। हालात यह हैं कि 30 मरीज प्रतीक्षा में हैं। यदि बेडों की संख्या बढ़ जाए तो मरीजों को डायलिसिस के लिए इंतजार न करना पड़े।
डायलिसिस की सुविधा न होने से पहले जिले के मरीजों को कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में जाना पड़ता था। निजी अस्पतालों में खर्च अधिक और सुविधा कम होने से किडनी के मरीजों को समस्या होती थी। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में 10 नवंबर 2021 को नि:शुल्क डायलिसिस यूनिट का शुभारंभ हुआ था।
पहले तो जिले के मरीज आते थे, लेकिन यूनिट शुरू होने की जानकारी होने पर एटा, कन्नौज और हरदोई जिले के मरीज भी डायलिसिस के लिए यहां आने लगे। जनवरी में 122 और फरवरी के 10 दिन में 50 मरीजों की डायलिसिस की जा चुकी है। एक डायलिसिस में करीब साढ़े चार घंटे लगते हैं। फिलहाल दो शिफ्टों में काम हो रहा है। मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा है कि यूनिट में 30 मरीज प्रतीक्षा में चल रहे हैं। यूनिट में तीसरी शिफ्ट भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन
पिछले साल 10 नवंबर को यूनिट का शुभारंभ हुआ था। शुरुआत में कम ही मरीज डायलिसिस के लिए आते थे, तब बिना इंतजार उनकी डायलिसिस हो जाती थी। धीरे-धीरे मरीजों को यूनिट शुरू होने की जानकारी हुई तो लखनऊ और कानपुर जाने वाले मरीज लोहिया अस्पताल पहुंचने लगे। इसके अलावा अन्य जिलों से भी मरीज आने लगे। आलम यह है कि तीन महीने में ही मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई कि डायलिसिस के लिए मरीजों को प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। ऐसे में यदि यूनिट में बेडों की संख्या बढ़ जाए तो और अधिक मरीजों को लाभ मिले
छिबरामऊ के मुन्नालाल हर चौथे दिन डायलिसिस कराने आगरा जाते थे। डायलिसिस में दो दिन और हजारों रुपये का खर्चा होता था। अखबार में यहां यूनिट खुलने की जानकारी हुई तो अब यहीं डायलिसिस करवा रहे हैं। इससे उनका पैसा भी समय भी बचा। काम भी कर लेते हैं। गांधीनगर के बुजुर्ग प्रमोद मिश्रा का कहना है कि यहां जब से डायलिसिस यूनिट शुरू हुई तब से बड़ी राहत मिली है। यहां निजी यूनिटों से भी अच्छी व्यवस्था है।
डायलिसिस सेंटर के मैनेजर जहीर खान कहते हैं कि जो मरीज डायलिसिस पर आ जाता है, उसे बहुत दिक्कत होती है। हमारी कोशिश रहती है कि सबसे पहले उन्हें लाभ दिया जाए, जिसको सबसे पहले डायलिसिस की जरूरत है। दो महीने में तीसरी शिफ्ट भी शुरू करने की कोशिश है। इसके बाद हर दिन पांच और मरीजों की डायलिसिस हो सकेगी।
विज्ञापन
डायलिसिस की सुविधा न होने से पहले जिले के मरीजों को कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में जाना पड़ता था। निजी अस्पतालों में खर्च अधिक और सुविधा कम होने से किडनी के मरीजों को समस्या होती थी। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में 10 नवंबर 2021 को नि:शुल्क डायलिसिस यूनिट का शुभारंभ हुआ था।
विज्ञापन
पहले तो जिले के मरीज आते थे, लेकिन यूनिट शुरू होने की जानकारी होने पर एटा, कन्नौज और हरदोई जिले के मरीज भी डायलिसिस के लिए यहां आने लगे। जनवरी में 122 और फरवरी के 10 दिन में 50 मरीजों की डायलिसिस की जा चुकी है। एक डायलिसिस में करीब साढ़े चार घंटे लगते हैं। फिलहाल दो शिफ्टों में काम हो रहा है। मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा है कि यूनिट में 30 मरीज प्रतीक्षा में चल रहे हैं। यूनिट में तीसरी शिफ्ट भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन
पिछले साल 10 नवंबर को यूनिट का शुभारंभ हुआ था। शुरुआत में कम ही मरीज डायलिसिस के लिए आते थे, तब बिना इंतजार उनकी डायलिसिस हो जाती थी। धीरे-धीरे मरीजों को यूनिट शुरू होने की जानकारी हुई तो लखनऊ और कानपुर जाने वाले मरीज लोहिया अस्पताल पहुंचने लगे। इसके अलावा अन्य जिलों से भी मरीज आने लगे। आलम यह है कि तीन महीने में ही मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई कि डायलिसिस के लिए मरीजों को प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। ऐसे में यदि यूनिट में बेडों की संख्या बढ़ जाए तो और अधिक मरीजों को लाभ मिले
छिबरामऊ के मुन्नालाल हर चौथे दिन डायलिसिस कराने आगरा जाते थे। डायलिसिस में दो दिन और हजारों रुपये का खर्चा होता था। अखबार में यहां यूनिट खुलने की जानकारी हुई तो अब यहीं डायलिसिस करवा रहे हैं। इससे उनका पैसा भी समय भी बचा। काम भी कर लेते हैं। गांधीनगर के बुजुर्ग प्रमोद मिश्रा का कहना है कि यहां जब से डायलिसिस यूनिट शुरू हुई तब से बड़ी राहत मिली है। यहां निजी यूनिटों से भी अच्छी व्यवस्था है।
डायलिसिस सेंटर के मैनेजर जहीर खान कहते हैं कि जो मरीज डायलिसिस पर आ जाता है, उसे बहुत दिक्कत होती है। हमारी कोशिश रहती है कि सबसे पहले उन्हें लाभ दिया जाए, जिसको सबसे पहले डायलिसिस की जरूरत है। दो महीने में तीसरी शिफ्ट भी शुरू करने की कोशिश है। इसके बाद हर दिन पांच और मरीजों की डायलिसिस हो सकेगी।