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कोरोना के संकट में खुशियों के अममानों पर ‘लॉक’
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राज।
- फोटो : FARRUKHABAD
26 नेपाली 26 दिनों से क्वारंटीन सेंटर में ‘कैद’
फर्रुखाबाद।लॉकडाउन में पंजाब में मजदूरी न मिलने पर नेपाल को निकले 26 युवक फर्रुखाबाद में 26 दिनों से ‘कैद’ हैं। 14 दिनों का क्वारंटीन पीरियड पूरा करने के बावजूद उन्हें छुट्टी नहीं दी जा रही। शासन से अनुमति का इंतजार है। इस बीच किसी की शादी की तिथि निकल गई तो कोई घर में हुए नए मेहमान का चेहरा देखने को तरस रहा है।
24 अप्रैल को पंजाब से लौट रहे 26 युवकों को पांचालघाट स्थित नाव से गंगा पार करने के बाद ग्रामीणों ने रोक लिया था। सिटी मजिस्ट्रेट ने युवकों को फतेहगढ़ के शेल्टरहोम में क्वारंटीन कर दिया था। वह स्वस्थ हैं और अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें तो खाना मिल रहा है, लेकिन अब उन्हें परिजनों की चिंता सता रही है।
शेल्टर होम में क्वारंटीन अवधि में ही निकल गई शादी की तारीख
फतेहगढ़ के शेल्टरहोम में क्वारंटीन नेपाल के ललितपुर निवासी राज ने बताया कि एक मई को उसकी शादी की तिथि तय थी। घर में शादी की सभी तैयारियां कर ली गई थीं। इसके चलते ही वह पंजाब से पैदल ही घर के लिए चल दिया था। पर 24 अप्रैल की रात से उसे यहां क्वारंटीन कर दिया गया। वह पूरी तरह स्वस्थ है।
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उसने घर जाने के लिए शेल्टहोम इंचार्ज से अनुमति मांगी तो उन्होंने देने से इनकार कर दिया। कहा कि शासन से जब अनुमति मिलेगी तभी जा सकोगे। इसके चलते परिजनों को शादी का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। अब वह कब अपने घर पहुंच सकेगा, इसका भी कुछ पता नहीं है। अब घर पहुंचने पर ही शादी की अगली तारीख तय होगी।
नहीं पहुंच सका पत्नी के पास, बेटी को गोद में लेने की आस
नेपाल के गांव नोलप्रासी निवासी चक्र नारायण कार्की ने भी दर्द बयां किया। कहा कि पत्नी के प्रसव होने की वजह से वह पंजाब से निकला था। फतेहगढ़ में आकर फंस गया। घर में कमाने वाला भी वही है। दो माह पहले ही वह कमाने पंजाब गया था। मजदूरी कर कुछ पैसे एकत्र किए। इसी बीच लॉकडाउन हो गया।
इससे काम मिलना भी बंद हो गया। कुछ दिन काम शुरू होने का इंतजार किया। उम्मीद समाप्त होने घर का रुख किया तो सवारी भी नहीं मिली। इस पर वहां से पैदल ही निकल पड़ा। सोचा था कि बच्चे के जन्म पर तो वह कम से कम घर में होगा। लेकिन क्वारंटीन कर दिया गया। फोन पर परिजनों से बात हुई तो पता चला कि 17 मई को पत्नी ने पुत्री को जन्म दिया। इस दौरान भी वह घर नहीं पहुंच सका। अब शासन के आदेश का इंतजार है।
घर में पत्नी की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं
बाग्लुंग निवासी बृज कुमार की पत्नी को प्रसव होने को है। इससे वह काफी चिंतित है। बृज कुमार ने बताया कि घर में पत्नी अकेली रहती है। इस समय यदि पत्नी को प्रसव हो गया तो उसका साथ देने वाला सिर्फ ईश्वर ही होगा। वह घर जाना चाहता है। कुछ इसी तरह कंचनपुर निवासी बालविक्रम ने भी अपना दर्द बयां किया।
वहीं बुटल खैरेनी निवासी संदेश का कहना है कि उसकी मां की तबियत खराब है। डाक्टर ने आपरेशन बताया है। जब वह घर पहुंचेगा, तभी अपनी मां का इलाज करा सकेगा। नेपाल निवासी अधिकांश युवकों ने अपनी-अपनी पीड़ा बताई। सभी को घर जाने की लालसा लगी है।
‘नेपाल के लोगों को उनके घर भेजने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही नेपाल के लोगों को उनके घर भेजा जाएगा।’
- विवेक श्रीवास्तव, एडीएम फर्रुखाबाद
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फर्रुखाबाद।लॉकडाउन में पंजाब में मजदूरी न मिलने पर नेपाल को निकले 26 युवक फर्रुखाबाद में 26 दिनों से ‘कैद’ हैं। 14 दिनों का क्वारंटीन पीरियड पूरा करने के बावजूद उन्हें छुट्टी नहीं दी जा रही। शासन से अनुमति का इंतजार है। इस बीच किसी की शादी की तिथि निकल गई तो कोई घर में हुए नए मेहमान का चेहरा देखने को तरस रहा है।
24 अप्रैल को पंजाब से लौट रहे 26 युवकों को पांचालघाट स्थित नाव से गंगा पार करने के बाद ग्रामीणों ने रोक लिया था। सिटी मजिस्ट्रेट ने युवकों को फतेहगढ़ के शेल्टरहोम में क्वारंटीन कर दिया था। वह स्वस्थ हैं और अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें तो खाना मिल रहा है, लेकिन अब उन्हें परिजनों की चिंता सता रही है।
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शेल्टर होम में क्वारंटीन अवधि में ही निकल गई शादी की तारीख
फतेहगढ़ के शेल्टरहोम में क्वारंटीन नेपाल के ललितपुर निवासी राज ने बताया कि एक मई को उसकी शादी की तिथि तय थी। घर में शादी की सभी तैयारियां कर ली गई थीं। इसके चलते ही वह पंजाब से पैदल ही घर के लिए चल दिया था। पर 24 अप्रैल की रात से उसे यहां क्वारंटीन कर दिया गया। वह पूरी तरह स्वस्थ है।
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उसने घर जाने के लिए शेल्टहोम इंचार्ज से अनुमति मांगी तो उन्होंने देने से इनकार कर दिया। कहा कि शासन से जब अनुमति मिलेगी तभी जा सकोगे। इसके चलते परिजनों को शादी का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। अब वह कब अपने घर पहुंच सकेगा, इसका भी कुछ पता नहीं है। अब घर पहुंचने पर ही शादी की अगली तारीख तय होगी।
नहीं पहुंच सका पत्नी के पास, बेटी को गोद में लेने की आस
नेपाल के गांव नोलप्रासी निवासी चक्र नारायण कार्की ने भी दर्द बयां किया। कहा कि पत्नी के प्रसव होने की वजह से वह पंजाब से निकला था। फतेहगढ़ में आकर फंस गया। घर में कमाने वाला भी वही है। दो माह पहले ही वह कमाने पंजाब गया था। मजदूरी कर कुछ पैसे एकत्र किए। इसी बीच लॉकडाउन हो गया।
इससे काम मिलना भी बंद हो गया। कुछ दिन काम शुरू होने का इंतजार किया। उम्मीद समाप्त होने घर का रुख किया तो सवारी भी नहीं मिली। इस पर वहां से पैदल ही निकल पड़ा। सोचा था कि बच्चे के जन्म पर तो वह कम से कम घर में होगा। लेकिन क्वारंटीन कर दिया गया। फोन पर परिजनों से बात हुई तो पता चला कि 17 मई को पत्नी ने पुत्री को जन्म दिया। इस दौरान भी वह घर नहीं पहुंच सका। अब शासन के आदेश का इंतजार है।
घर में पत्नी की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं
बाग्लुंग निवासी बृज कुमार की पत्नी को प्रसव होने को है। इससे वह काफी चिंतित है। बृज कुमार ने बताया कि घर में पत्नी अकेली रहती है। इस समय यदि पत्नी को प्रसव हो गया तो उसका साथ देने वाला सिर्फ ईश्वर ही होगा। वह घर जाना चाहता है। कुछ इसी तरह कंचनपुर निवासी बालविक्रम ने भी अपना दर्द बयां किया।
वहीं बुटल खैरेनी निवासी संदेश का कहना है कि उसकी मां की तबियत खराब है। डाक्टर ने आपरेशन बताया है। जब वह घर पहुंचेगा, तभी अपनी मां का इलाज करा सकेगा। नेपाल निवासी अधिकांश युवकों ने अपनी-अपनी पीड़ा बताई। सभी को घर जाने की लालसा लगी है।
‘नेपाल के लोगों को उनके घर भेजने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही नेपाल के लोगों को उनके घर भेजा जाएगा।’
- विवेक श्रीवास्तव, एडीएम फर्रुखाबाद