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पशु चिकित्सालय में अन्ना गोवंश, गोसदन खाली

Wed, 29 May 2019 11:07 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 29 May 2019 11:07 PM IST
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पशु चिकित्सालय में अन्ना गोवंश, गोसदन खाली
जिले में पशु चिकित्सालय का इस्तेमाल जिम्मेदार ही तबेले के रूप में कर रहे हैं। यहां पशुओं के इलाज के बजाय आश्रय स्थल बना दिया गया है। इसमें एक सैकड़ा से अधिक गोवंश बंद हैं जबकि पास में ही करोड़ों खर्च कर बनाए गए गोसदन में लापरवाही के चलते पानी का भी इंतजाम नहीं किया गया। दो माह पूर्व धनराशि आवंटन के बाद भी न बोरिंग हुई और न ही सबमर्सिबल लगाया गया।
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शहर व ग्रामीण क्षेत्र में राहगीर से लेकर किसान तक निराश्रित गोवंश से त्रस्त हैं। इससे निजात के लिए जिले में 26 गोसदनों का निर्माण कराकर उसमें गोवंश रखे जाने थे। इनमें 24 गोसदनों का निर्माण कराया गया है।
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लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले 20 गोसदनों में पानी की व्यवस्था के लिए प्रशासन ने बोरिंग व सबमर्सिबल लगवाने की क्षेत्र पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपकर धनराशि हस्तांतरित कर दी। लापरवाही के चलते गोसदनों में बोरिंग का काम शुरू तक नहीं कराया गया।
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इस पर जिलाधिकारी ने जिला स्तरीय अधिकारियों को नामित कर यह गोसदन गोद दे दिए। इससे काम में तेजी आ सके। मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव नगला बाग रठौरा स्थित गोसदन जिला पिछड़ा वर्ग अधिकारी राजेश बघेल को गोद दिया गया।


वह निरीक्षण करने गए तो गोसदन खाली था। उसमें सबमर्सिबल लगना तो दूर बोरिंग तक नहीं मिली। टीन शेड में पुआल नहीं डाला गया और भूसा रखने का भी इंतजाम नहीं जबकि पास में बना पशु चिकित्सालय तबेला नजर आ रहा था। इसमें पशुओं के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। इसे गोवंश आश्रय स्थल बना दिया गया है। पिछड़ा वर्ग अधिकारी ने बताया कि प्रधान व सचिव के रुचि न लेने से गोसदन की व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है।


जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डा.राजकिशोर ने बताया कि नगला बाग रठौरा पशु चिकित्सालय में डाक्टर की तैनाती न होने से इसे अस्थायी आश्रय स्थल बनाया गया है। कितने गोसदनों में बोरिंग व सबमर्सिबल लग चुका है, इसकी रिपोर्ट खंड विकास अधिकारियों द्वारा उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है।


जनपद में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में 119 आश्रय स्थलों को गोवंश के भरण-पोषण के लिए एक करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। अब शासन से 50 लाख रुपये फिर मिले हैं। इन्हें आश्रय स्थलों के लिए भेजा जाना है। इससे पूर्व ग्रामीण क्षेत्र में सभी खंड विकास अधिकारियों से, जबकि शहर व कस्बों में ईओ से आश्रय स्थलों का सत्यापन कर उनमें बंद गोवंश की संख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।



कई आश्रय स्थलों में आंकड़ेबाजी के खेल के चलते बीडीओ व ईओ सत्यापन रिपोर्ट देने से कतरा रहे हैं। इससे धनराशि आवंटन लटका है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा.राजकिशोर ने बताया कि सभी बीडीओ व ईओ से सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध कराने को पत्र भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद सत्यापन रिपोर्ट नहीं दी गई और न ही धनराशि की मांग की गई। इसके चलते धनराशि का आवंटन नहीं किया गया।


पशु चिकित्सालय बना अन्ना गोवंश का आश्रयस्थल
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