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11 घंटे में ही चटक गई पटरी
Updated Sun, 09 Dec 2018 10:55 PM IST
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कमालगंज (फर्रुखाबाद)। कमालगंज में शनिवार को हुए मालगाड़ी के हादसे के बाद ठीक हुआ रेलवे ट्रैक 11 घंटे भी ट्रेनों की मामूली रफ्तार नहीं सहन कर सका। रविवार को उसी जगह रेलवे पटरी चटक गई, जहां हादसा हुआ था। गनीमत रही कि समय रहते चटकी पटरी को देख लिया गया। इससे रेलवे प्रशासन की लापरवाही भी साफ नजर आती है।
शनिवार तड़के कमालगंज से करीब एक किलोमीटर दूर दीप केसरी मंदिर के पास मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी। इस हादसे में मालगाड़ी का गार्ड भी घायल हो गया था। अफसरों ने मौके पर पहुंचकर रेलवे ट्रैक को ठीक कराना शुरू किया था। रेलवे अफसरों ने दावा किया कि शनिवार रात करीब 12.10 बजे ट्रैक को ठीक कर दिया गया। ट्रैक भले ही रात में ठीक कर दिया गया हो लेकिन रविवार सुबह करीब 6 बजे कमालगंज रेलवे स्टेशन से फर्रुखाबाद से कानपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को गुजारा गया। इसके बाद करीब आठ से दस ट्रेनें इस ट्रैक से दस किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारी गईं। पर शाम करीब 4.55 बजे उत्सर्ग एक्सप्रेस जब दीप केसरी मंदिर के पास से गुजर रही थी, तभी ट्रैक पर काम कर रहे एक कर्मचारी की नजर चटकी पटरी पर पड़ गई। इससे बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
कसबा के रहने वाले सर्वेश कुमार, रमेशचंद्र, ललित गुप्ता और रामकुमार आदि का कहना था कि अगर रेलवे कर्मचारी की नजर चटकी पटरी पर नहीं पड़ती तो सवारियों से भरी ट्रेनें इसी चटकी पटरी से गुजरतीं और हादसे का सबब भी बन सकती थीं। उनका कहना था कि इसे रेलवे अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही ही कहेंगे कि 11 घंटे में ठीक कराए गए ट्रैक पर पटरी फिर चटक गई। इससे रेलवे अधिकारियों को अब इस ट्रैक की गंभीरता से जांच करने की जरूरत है। आखिर बार-बार पटरियां क्यों चटक रहीं हैं।
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शनिवार तड़के कमालगंज से करीब एक किलोमीटर दूर दीप केसरी मंदिर के पास मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी। इस हादसे में मालगाड़ी का गार्ड भी घायल हो गया था। अफसरों ने मौके पर पहुंचकर रेलवे ट्रैक को ठीक कराना शुरू किया था। रेलवे अफसरों ने दावा किया कि शनिवार रात करीब 12.10 बजे ट्रैक को ठीक कर दिया गया। ट्रैक भले ही रात में ठीक कर दिया गया हो लेकिन रविवार सुबह करीब 6 बजे कमालगंज रेलवे स्टेशन से फर्रुखाबाद से कानपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को गुजारा गया। इसके बाद करीब आठ से दस ट्रेनें इस ट्रैक से दस किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारी गईं। पर शाम करीब 4.55 बजे उत्सर्ग एक्सप्रेस जब दीप केसरी मंदिर के पास से गुजर रही थी, तभी ट्रैक पर काम कर रहे एक कर्मचारी की नजर चटकी पटरी पर पड़ गई। इससे बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
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कसबा के रहने वाले सर्वेश कुमार, रमेशचंद्र, ललित गुप्ता और रामकुमार आदि का कहना था कि अगर रेलवे कर्मचारी की नजर चटकी पटरी पर नहीं पड़ती तो सवारियों से भरी ट्रेनें इसी चटकी पटरी से गुजरतीं और हादसे का सबब भी बन सकती थीं। उनका कहना था कि इसे रेलवे अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही ही कहेंगे कि 11 घंटे में ठीक कराए गए ट्रैक पर पटरी फिर चटक गई। इससे रेलवे अधिकारियों को अब इस ट्रैक की गंभीरता से जांच करने की जरूरत है। आखिर बार-बार पटरियां क्यों चटक रहीं हैं।
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