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सफाई कर्मियों के 1.24 करोड़ एनएससी में खेल की जांच शुरू
Updated Sat, 27 Oct 2018 10:41 PM IST
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फर्रुखाबाद। पंचायती राज विभाग में वर्ष 2011 में 1.24 करोड़ रुपये से ज्यादा के एनएससी खरीद में हुए खेल की जांच शुरू हो गई है। इसकी जिम्मेदारी डीडीओ ओमप्रकाश पांडेय व डीडीएजी राजकुमार सिंह की समिति को दी गई है। शुक्रवार को डीडीओ ने संबंधित विभाग से जरूरी अभिलेख मांगे हैं।
पंचायती राज विभाग में मार्च 2011 में 993 सफाई कर्मचारियों के एरियर से पोस्ट ऑफिस में एनएससी के लिए एक करोड़ 24 लाख रुपये के छह चेक काटे गए थे। इसमें से एक करोड़ 16 लाख रुपये पोस्ट ऑफिस में एनएससी के लिए जमा करा दिए गए थे। आठ लाख रुपये आर्यावर्त ग्रामीण बैंक में जमा कराए गए थे, जबकि आठ लाख रुपये का भुगतान किया जाना चाहिए था।
लगभग आठ साल गुजरने के बाद भी सफाई कर्मियों को कोई भुगतान नहीं किया गया। न ही किसी तरह के कागजात उनके पास हैं। कई बार इस मामले को लेकर प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन हल नहीं निकला। बाद में सफाई कर्मचारी यूनियन ने मामले की शिकायत शासन स्तर पर की। एक सप्ताह पूर्व मामले की जांच डीडीओ ओमप्रकाश पांडेय और डीडीएजी की समिति को शासन ने सौंपी है। शुक्रवार को डीडीओ ने पंचायती राज विभाग से उस समय में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों का डाटा मांगा है। डीडीओ ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि मामले की जांच के लिए संबंधित विभाग से कागजात मांगे हैं। कागजात मिलने के बाद ही मामले की जांच आगे बढ़ सकेगी।
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साढ़े सात साल में दोगुना होता था धन
सफाई कर्मचारी नेता अरविंद वाल्मीकि ने बताया कि साढ़े सात साल में हमारे रुपये दोगुने हो जाने चाहिए थे, लेकिन अभी तक हम लोगों को यही नहीं पता है कि हमारे रुपये गए कहां। हालांकि अधिकारियों का कहना है अब नियमों में बदलाव हो गया है अब करीब साढ़े नौ साल में रुपये दोगुने होते हैं।
कई अधिकारी आएंगे जद में
शासन स्तर से यह जांच शुरू होने के बाद कई अधिकारी इसकी जद में आएंगे। दरअसल डीडीओ ने विभाग से तीन दिन में अब तक कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों का डाटा मांगा है, कि 2011 से 2018 तक कितने अधिकारी व कर्मचारी विभाग में तैनात रहे हैं। गौरतलब है कि 1 अप्रैल 2011 से अब तक कुल छह जिला जिला पंचायत राज अधिकारियों की तैनाती रही है।
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पंचायती राज विभाग में मार्च 2011 में 993 सफाई कर्मचारियों के एरियर से पोस्ट ऑफिस में एनएससी के लिए एक करोड़ 24 लाख रुपये के छह चेक काटे गए थे। इसमें से एक करोड़ 16 लाख रुपये पोस्ट ऑफिस में एनएससी के लिए जमा करा दिए गए थे। आठ लाख रुपये आर्यावर्त ग्रामीण बैंक में जमा कराए गए थे, जबकि आठ लाख रुपये का भुगतान किया जाना चाहिए था।
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लगभग आठ साल गुजरने के बाद भी सफाई कर्मियों को कोई भुगतान नहीं किया गया। न ही किसी तरह के कागजात उनके पास हैं। कई बार इस मामले को लेकर प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन हल नहीं निकला। बाद में सफाई कर्मचारी यूनियन ने मामले की शिकायत शासन स्तर पर की। एक सप्ताह पूर्व मामले की जांच डीडीओ ओमप्रकाश पांडेय और डीडीएजी की समिति को शासन ने सौंपी है। शुक्रवार को डीडीओ ने पंचायती राज विभाग से उस समय में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों का डाटा मांगा है। डीडीओ ओमप्रकाश पांडेय ने बताया कि मामले की जांच के लिए संबंधित विभाग से कागजात मांगे हैं। कागजात मिलने के बाद ही मामले की जांच आगे बढ़ सकेगी।
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साढ़े सात साल में दोगुना होता था धन
सफाई कर्मचारी नेता अरविंद वाल्मीकि ने बताया कि साढ़े सात साल में हमारे रुपये दोगुने हो जाने चाहिए थे, लेकिन अभी तक हम लोगों को यही नहीं पता है कि हमारे रुपये गए कहां। हालांकि अधिकारियों का कहना है अब नियमों में बदलाव हो गया है अब करीब साढ़े नौ साल में रुपये दोगुने होते हैं।
कई अधिकारी आएंगे जद में
शासन स्तर से यह जांच शुरू होने के बाद कई अधिकारी इसकी जद में आएंगे। दरअसल डीडीओ ने विभाग से तीन दिन में अब तक कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों का डाटा मांगा है, कि 2011 से 2018 तक कितने अधिकारी व कर्मचारी विभाग में तैनात रहे हैं। गौरतलब है कि 1 अप्रैल 2011 से अब तक कुल छह जिला जिला पंचायत राज अधिकारियों की तैनाती रही है।