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शिक्षक के पुत्र की हत्या में चचेरे भाइयों को आजीवन कारावास
Updated Thu, 25 Oct 2018 11:16 PM IST
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फर्रुखाबाद। हत्या की रंजिश में शिक्षक के पुत्र की हत्या के मामले में विशेष अदालत ईसीएक्ट के न्यायाधीश बलजोर सिंह ने गुरुवार को दो चचेरे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 20-20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा का आदेश दिया है। इस हत्याकांड के एक अभियुक्त की जेल में मौत हो गई थी, दूसरा नाबालिग होने के कारण उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई।
मोहम्मदाबाद कोतवाली के गांव रामनगर कुड़रिया निवासी बादशाह के पुत्र की हत्या कर दी गई थी। इसमें गांव निवासी शिक्षक राजाराम राजपूत और उनके पुत्रों को आरोपी बनाया गया था। इसी की रंजिश चल रही थी। राजाराम राजपूत चार नवंबर 2010 को पुत्र गोविंद के साथ बाइक से फर्रुखाबाद जा रहे थे। गांव चौखंडा ठेके के पास बादशाह के पुत्र अवधेश व नन्हे लाल के पुत्र (किशोर) बाइक से मिले। दोनों को देखकर राजाराम के पुत्र ने बाइक को घुमा लिया और वापस जाने लगा। किशोर और अवधेश ने बाइक से उसका पीछा किया। मदनापुर गांव के मोड़ पर बादशाह और नन्हे लाल तमंचा लिए खड़े थे। इन लोगों के ललकारने पर गोविंद घबरा गया और बाइक गिर गई। तभी किशोर और अवधेश भी बाइक से पीछे से आ गए। चारों लोगों को देखकर राजाराम और उसका पुत्र गोविंद जान बचाने को खेत की ओर भागे। बादशाह, किशोर, अवधेश व नन्हे लाल ने बाबूराम के खेत में गोली मार कर गोविंद की हत्या कर दी।
राजाराम ने पुत्र गोविंद की हत्या करने की बादशाह, अवधेश, नन्हे लाल व किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच कर चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिला कारागार में निरुद्ध बादशाह की 1 मई 2015 को मौत हो गई। किशोर की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई। आरोपी अवधेश व नन्हेलाल पर मुकदमा ईसीएक्ट कोर्ट में चला। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता केपी सिंह ने दलीलें पेश की। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों को दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
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मोहम्मदाबाद कोतवाली के गांव रामनगर कुड़रिया निवासी बादशाह के पुत्र की हत्या कर दी गई थी। इसमें गांव निवासी शिक्षक राजाराम राजपूत और उनके पुत्रों को आरोपी बनाया गया था। इसी की रंजिश चल रही थी। राजाराम राजपूत चार नवंबर 2010 को पुत्र गोविंद के साथ बाइक से फर्रुखाबाद जा रहे थे। गांव चौखंडा ठेके के पास बादशाह के पुत्र अवधेश व नन्हे लाल के पुत्र (किशोर) बाइक से मिले। दोनों को देखकर राजाराम के पुत्र ने बाइक को घुमा लिया और वापस जाने लगा। किशोर और अवधेश ने बाइक से उसका पीछा किया। मदनापुर गांव के मोड़ पर बादशाह और नन्हे लाल तमंचा लिए खड़े थे। इन लोगों के ललकारने पर गोविंद घबरा गया और बाइक गिर गई। तभी किशोर और अवधेश भी बाइक से पीछे से आ गए। चारों लोगों को देखकर राजाराम और उसका पुत्र गोविंद जान बचाने को खेत की ओर भागे। बादशाह, किशोर, अवधेश व नन्हे लाल ने बाबूराम के खेत में गोली मार कर गोविंद की हत्या कर दी।
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राजाराम ने पुत्र गोविंद की हत्या करने की बादशाह, अवधेश, नन्हे लाल व किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच कर चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिला कारागार में निरुद्ध बादशाह की 1 मई 2015 को मौत हो गई। किशोर की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई। आरोपी अवधेश व नन्हेलाल पर मुकदमा ईसीएक्ट कोर्ट में चला। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता केपी सिंह ने दलीलें पेश की। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों को दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
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