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लोहिया अस्पताल में ए निगेटिव और एबी पॉजेटिव ब्लड नहीं
Updated Wed, 26 Sep 2018 12:14 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड का टोटा हो गया है। वहां ए निगेटिव और एबी पॉजिटिव ब्लड नहीं है। ऐसे में इन ग्रुप के रोगियों के आने पर उनकी जान पर बन सकती है।
लोहिया अस्पताल के ब्लड बैंक में 900 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता है। इस अस्पताल में प्रतिदिन ब्लड की 18 से 20 यूनिट की खपत होती है। अस्पताल में फर्रुखाबाद के अलावा हरदोई, बदायूं, शाहजहांपुर, एटा, मैनपुरी, कन्नौज के मरीज आते हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या भी अधिक होती है। इस समय लोहिया अस्पताल की ब्लड बैंक में ए निगेटिव और एबी पॉजिटिव ब्लड नहीं है। ऐसे में इन ग्रुप के गंभीर रोगियों के अस्पताल में आने पर दिक्कत आ सकती है।
अस्पताल प्रशासन के पास इन ग्रुप के ब्लड की भरपाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मंगलवार को शहर के गांव चांदपुर निवासी राजेश कुमार की बेटी शिवानी को तेज बुखार आने से उसकी हालत खराब हो गई। परिवार वालों ने उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उसे ब्लड चढ़ाने की जरूरत बताई गई। शिवानी का ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव होने से उसका पिता लोहिया अस्पताल पहुंचा। यहां इस ग्रुप का ब्लड नहीं था। हालांकि बाद में राजेश ने बताया कि उसकी बच्ची की हालत में सुधार हुआ है। निजी अस्पताल के डॉक्टर ने ब्लड चढ़ाए जाने की बात कही थी। इस पर वह ब्लड बैंक पहुंचा था।
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उधर, ब्लड बैंक के सहायक गिरीश बाबू का कहना है कि इस तरह की स्थिति बनने पर वह खून दान करने वाले लोगों को बुलाते हैं। उनके खून दान करने से व्यवस्था हो जाती है। कभी-कभी दिक्कत आती है।
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फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड का टोटा हो गया है। वहां ए निगेटिव और एबी पॉजिटिव ब्लड नहीं है। ऐसे में इन ग्रुप के रोगियों के आने पर उनकी जान पर बन सकती है।
लोहिया अस्पताल के ब्लड बैंक में 900 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता है। इस अस्पताल में प्रतिदिन ब्लड की 18 से 20 यूनिट की खपत होती है। अस्पताल में फर्रुखाबाद के अलावा हरदोई, बदायूं, शाहजहांपुर, एटा, मैनपुरी, कन्नौज के मरीज आते हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या भी अधिक होती है। इस समय लोहिया अस्पताल की ब्लड बैंक में ए निगेटिव और एबी पॉजिटिव ब्लड नहीं है। ऐसे में इन ग्रुप के गंभीर रोगियों के अस्पताल में आने पर दिक्कत आ सकती है।
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अस्पताल प्रशासन के पास इन ग्रुप के ब्लड की भरपाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मंगलवार को शहर के गांव चांदपुर निवासी राजेश कुमार की बेटी शिवानी को तेज बुखार आने से उसकी हालत खराब हो गई। परिवार वालों ने उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उसे ब्लड चढ़ाने की जरूरत बताई गई। शिवानी का ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव होने से उसका पिता लोहिया अस्पताल पहुंचा। यहां इस ग्रुप का ब्लड नहीं था। हालांकि बाद में राजेश ने बताया कि उसकी बच्ची की हालत में सुधार हुआ है। निजी अस्पताल के डॉक्टर ने ब्लड चढ़ाए जाने की बात कही थी। इस पर वह ब्लड बैंक पहुंचा था।
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उधर, ब्लड बैंक के सहायक गिरीश बाबू का कहना है कि इस तरह की स्थिति बनने पर वह खून दान करने वाले लोगों को बुलाते हैं। उनके खून दान करने से व्यवस्था हो जाती है। कभी-कभी दिक्कत आती है।