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शिकायतों के निस्तारण में जनपद अधिकारी फिसड्डी
Updated Mon, 24 Sep 2018 10:52 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। आईजीआरएस पोर्टल पर होने वाली शिकायतों के निस्तारण में जनपद के अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। शिकायतें निस्तारण में प्रदेश में जनपद 67वें पायदान पर पहुंच गया है। पिछले माह जिला टॉप 15 में शामिल था। सत्यापन में कई शिकायतें सी श्रेणी में आने से रैंकिंग इतनी नीचे चली गई है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सुबह दस से 12 बजे तक कार्यालय में बैठकर फरियादें सुनने का आदेश दिया है। अधिकारी कार्यालयों में बैठकर लोगों की फरियादें सुनते भी हैं। इन शिकायतों को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। निस्तारण के बाद उसकी आख्या को भी आईजीआरएस पोर्टल पर डालना होता है। इसके बाद भी अधिकारी शिकायतों के निस्तरण में गंभीर नहीं हैं। इसके चलते शिकायत निस्तारण के मामले में अगस्त में जनपद की प्रदेश में रैंकिंग 67वें नंबर पर पहुंच गई है। हालांकि अगस्त की रैंकिंग में फर्रुखाबाद ही नहीं मंडल के अन्य जिलों की भी हालत ठीक नहीं है। मंडल में फर्रुखाबाद दूसरे स्थान पर है। वहीं, इटावा प्रदेश में 64वीं रैंक के साथ मंडल में पहले स्थान पर है। प्रदेश की रैंकिंग में औरैया 75वें, कानपुर नगर 72वें व कानपुर देहात 73वें पायदान पर है।
सी श्रेणी में क्यों वापस आती हैं शिकायतें
आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों को संबंधित विभागों के अधिकारियों के पास निस्तारण के लिए भेज दिया जाता है। कुछ अधिकारी व कर्मचारी इसमें रुचि नहीं लेते हैं। वह शिकायतों का गलत निस्तारण कर आख्या पोर्टल पर अपलोड कर देते हैं। इसके बाद शासन से शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर पर फोन कर इसकी जांच की जाती है। इसमें संबंधित व्यक्ति यदि निस्तारण से संतुष्ट नहीं होता है तो उस शिकायत को सी श्रेणी में वापस भेज दिया जाता है। इससे जनपद की रैंकिंग नीचे चली जाती है। अगस्त में 619 शिकायतें वापस आई हैं।
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जनपद में जो भी शिकायतें सी श्रेणी में वापस आईं थीं। उनकी जांच कर निस्तारण कराया जा रहा है। अब जो शिकायत गलत निस्तारित हुई होगी तो उसकी जांच पहले निस्तारित कर चुके अधिकारी का उच्चाधिकारी जांच निस्तारित करेगा। ज्यादा से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण कराया जा रहा है। - विवेक श्रीवास्तव, एडीएम
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फर्रुखाबाद। आईजीआरएस पोर्टल पर होने वाली शिकायतों के निस्तारण में जनपद के अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। शिकायतें निस्तारण में प्रदेश में जनपद 67वें पायदान पर पहुंच गया है। पिछले माह जिला टॉप 15 में शामिल था। सत्यापन में कई शिकायतें सी श्रेणी में आने से रैंकिंग इतनी नीचे चली गई है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सुबह दस से 12 बजे तक कार्यालय में बैठकर फरियादें सुनने का आदेश दिया है। अधिकारी कार्यालयों में बैठकर लोगों की फरियादें सुनते भी हैं। इन शिकायतों को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। निस्तारण के बाद उसकी आख्या को भी आईजीआरएस पोर्टल पर डालना होता है। इसके बाद भी अधिकारी शिकायतों के निस्तरण में गंभीर नहीं हैं। इसके चलते शिकायत निस्तारण के मामले में अगस्त में जनपद की प्रदेश में रैंकिंग 67वें नंबर पर पहुंच गई है। हालांकि अगस्त की रैंकिंग में फर्रुखाबाद ही नहीं मंडल के अन्य जिलों की भी हालत ठीक नहीं है। मंडल में फर्रुखाबाद दूसरे स्थान पर है। वहीं, इटावा प्रदेश में 64वीं रैंक के साथ मंडल में पहले स्थान पर है। प्रदेश की रैंकिंग में औरैया 75वें, कानपुर नगर 72वें व कानपुर देहात 73वें पायदान पर है।
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सी श्रेणी में क्यों वापस आती हैं शिकायतें
आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों को संबंधित विभागों के अधिकारियों के पास निस्तारण के लिए भेज दिया जाता है। कुछ अधिकारी व कर्मचारी इसमें रुचि नहीं लेते हैं। वह शिकायतों का गलत निस्तारण कर आख्या पोर्टल पर अपलोड कर देते हैं। इसके बाद शासन से शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर पर फोन कर इसकी जांच की जाती है। इसमें संबंधित व्यक्ति यदि निस्तारण से संतुष्ट नहीं होता है तो उस शिकायत को सी श्रेणी में वापस भेज दिया जाता है। इससे जनपद की रैंकिंग नीचे चली जाती है। अगस्त में 619 शिकायतें वापस आई हैं।
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जनपद में जो भी शिकायतें सी श्रेणी में वापस आईं थीं। उनकी जांच कर निस्तारण कराया जा रहा है। अब जो शिकायत गलत निस्तारित हुई होगी तो उसकी जांच पहले निस्तारित कर चुके अधिकारी का उच्चाधिकारी जांच निस्तारित करेगा। ज्यादा से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण कराया जा रहा है। - विवेक श्रीवास्तव, एडीएम