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सास-ससुर दोषमुक्त, पति को पांच साल की सजा
Updated Thu, 13 Sep 2018 12:25 AM IST
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फर्रुखाबाद। अपर जिला जज छाया नैन ने दहेज हत्या के मुकदमे में सास-ससुर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। पत्नी को खुदकुशी के लिए प्रेेरित करने में पति को दोषी पाकर पांच साल की सजा सुनाई। पांच हजार रुपये जुर्माना किया किया।
जहानगंज थाना क्षेत्र गांव बेहटा निवासी रामविलास ने पुत्री शकुंतलादेवी की शादी कन्नौज के थाना तालग्राम के गांव किशनपुर निवासी राजेश के साथ की थी। शादी के बाद से ससुराल वाले दहेज में एक लाख रुपये और सोने की चेन की मांग कर शकुंतला को प्रताड़ित करने लगे।
17 सितंबर 1998 को शकुंतला ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस पर पिता रामविलास ने पति राजेश, ससुर प्रेमचंद्र व सास फूलमती का आरोपी बनाया था। पुलिस ने जांच कर अदालत में आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने दलीलें पेश की।
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सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने आरोपी सास-ससुर को साक्ष्य के अभाव में मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया। पति राजेश को दहेज उत्पीड़न के आरोप में दोषी पाकर एक साल की सजा और एक हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
धारा 306 के जुर्म में पति को पांच साल की सजा सुनाई और पांच हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान किया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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जहानगंज थाना क्षेत्र गांव बेहटा निवासी रामविलास ने पुत्री शकुंतलादेवी की शादी कन्नौज के थाना तालग्राम के गांव किशनपुर निवासी राजेश के साथ की थी। शादी के बाद से ससुराल वाले दहेज में एक लाख रुपये और सोने की चेन की मांग कर शकुंतला को प्रताड़ित करने लगे।
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17 सितंबर 1998 को शकुंतला ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस पर पिता रामविलास ने पति राजेश, ससुर प्रेमचंद्र व सास फूलमती का आरोपी बनाया था। पुलिस ने जांच कर अदालत में आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने दलीलें पेश की।
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सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने आरोपी सास-ससुर को साक्ष्य के अभाव में मुकदमे से दोषमुक्त कर दिया। पति राजेश को दहेज उत्पीड़न के आरोप में दोषी पाकर एक साल की सजा और एक हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
धारा 306 के जुर्म में पति को पांच साल की सजा सुनाई और पांच हजार रुपये जुर्माना किया। जुर्माना अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान किया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।