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ट्रेन के सफर से पहले जूझना पड़ता है जाम से
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फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ना आसान नहीं है। शहर में कहीं भी जाम में फंसकर आपकी ट्रेन छूट सकती है। ट्रैफिक व्यवस्था पंगु हो चुकी है। जाम खुलवाने को पता नहीं पुलिस को कितनी देर में जानकारी मिले। स्टेशन पहुंच भी गए तो टिकट मिलना मुश्किल है।
वहां भी किसी भी समय नेटवर्क धोखा दे जाता है। इससे ट्रेन का सफर करना है तो एक-दो घंटे पहले ही घर से निकलना होगा। स्टेशन पर उतरने के बाद सवारी बैठाने को लेकर टेंपो चालकों में जमकर खींचतान होती है। इससे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सोमवार दोपहर 11.45 बजे स्टेशन जाने को निकले तो लालगेट से जाम शुरू हो गया। वहां से किसी तरह आगे बढ़े तो देवरामपुर रेलवे क्रासिंग खुली होने के बावजूद वाहन फंसे थे। पुलिस कर्मी के मौजूद न होने हर कोई जल्दी निकलने के प्रयास में वाहन फंसते जा रहे थे।
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स्टेशन गेट तक 12.30 बज गए, जबकि यह दूरी महज ढाई किलोमीटर है। वहां टेंपो भी आड़े-तिरछे खड़े कर चालक सवारियां भरने का प्रयास कर रहे थे। जो यातायात भी बाधित कर रहे थे। स्टेशन परिसर में वाहन स्टैंड के निकट आधा दर्जन से अधिक ई-रिक्शा खड़े थे। इन पर जीआरपी की भी नजर नहीं जाती।
टिकट न मिलने से युवक ने तोड़ा शीशा, कर्मचारियों ने धुना : सोमवार तड़के 4.30 बजे टिकट काउंटर पर यात्रियों की भीड़ थी। आनंद विहार-कानपुर एक्सप्रेस स्टेशन पर खड़ी थी। अंत्योदय एक्सप्रेस, लखनऊ-बांद्रा व जयपुर-लखनऊ एक्सप्रेस ट्रेन के भी आने का समय हो रहा था।
इसी बीच नेटवर्क फेल हो गया। इस पर कर्मचारी ने मैनुअल टिकट बनाना शुरू किया। जल्दी टिकट लेने को लेकर जमकर धक्कामुक्की हुई। इस दौरान एक युवक भड़क गया और गालीगलौज करते हुए घूंसा मारकर टिकट काउंटर का शीशा तोड़ दिया। इससे वहां हंगामा हो गया।
रेलवे कर्मचारियों ने यात्रियों के सहयोग से उसे पकड़ लिया। इसी बीच आरपीएफ भी पहुंच गई और युवक की जमकर धुनाई कर दी। किसी तरह युवक भीड़ में मौका पाकर भाग गया। हालांकि आधा घंटे बाद नेटवर्क ठीक होने पर कंप्यूटराइज्ड टिकट बननी शुरू हो गईं।
विभागीय सूत्रों की मानें तो चार-पांच दिन से तड़के नेटवर्क फेल हो रहा है। इस दौरान कई ट्रेनों का समय होने से यात्रियों की भीड़ होने से हंगामा होना आम बात है।
इन दिनों भीषण गर्मी में हर किसी को ठंडे पानी की चाह होती है। स्टेशन पर लगे वाटर कूलर पर यात्रियों की बोतल भरने के लिए लाइन लगती है।
हैंडपंप पर भी भीड़ रहती है। वहीं परिसर में खड़े होने वाले टेंपो चालकों से वसूली की जाती है। इसी वजह से इन पर रोक नहीं लगाई जाती।
ट्रेन के सफर से पहले जूझना पड़ता है जाम से
ट्रेन पकड़ना हो तो एक घंटा पहले निकलें
रेलवे स्टेशन गेट पर टेंपो चालकों का कब्जा
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वहां भी किसी भी समय नेटवर्क धोखा दे जाता है। इससे ट्रेन का सफर करना है तो एक-दो घंटे पहले ही घर से निकलना होगा। स्टेशन पर उतरने के बाद सवारी बैठाने को लेकर टेंपो चालकों में जमकर खींचतान होती है। इससे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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सोमवार दोपहर 11.45 बजे स्टेशन जाने को निकले तो लालगेट से जाम शुरू हो गया। वहां से किसी तरह आगे बढ़े तो देवरामपुर रेलवे क्रासिंग खुली होने के बावजूद वाहन फंसे थे। पुलिस कर्मी के मौजूद न होने हर कोई जल्दी निकलने के प्रयास में वाहन फंसते जा रहे थे।
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स्टेशन गेट तक 12.30 बज गए, जबकि यह दूरी महज ढाई किलोमीटर है। वहां टेंपो भी आड़े-तिरछे खड़े कर चालक सवारियां भरने का प्रयास कर रहे थे। जो यातायात भी बाधित कर रहे थे। स्टेशन परिसर में वाहन स्टैंड के निकट आधा दर्जन से अधिक ई-रिक्शा खड़े थे। इन पर जीआरपी की भी नजर नहीं जाती।
टिकट न मिलने से युवक ने तोड़ा शीशा, कर्मचारियों ने धुना : सोमवार तड़के 4.30 बजे टिकट काउंटर पर यात्रियों की भीड़ थी। आनंद विहार-कानपुर एक्सप्रेस स्टेशन पर खड़ी थी। अंत्योदय एक्सप्रेस, लखनऊ-बांद्रा व जयपुर-लखनऊ एक्सप्रेस ट्रेन के भी आने का समय हो रहा था।
इसी बीच नेटवर्क फेल हो गया। इस पर कर्मचारी ने मैनुअल टिकट बनाना शुरू किया। जल्दी टिकट लेने को लेकर जमकर धक्कामुक्की हुई। इस दौरान एक युवक भड़क गया और गालीगलौज करते हुए घूंसा मारकर टिकट काउंटर का शीशा तोड़ दिया। इससे वहां हंगामा हो गया।
रेलवे कर्मचारियों ने यात्रियों के सहयोग से उसे पकड़ लिया। इसी बीच आरपीएफ भी पहुंच गई और युवक की जमकर धुनाई कर दी। किसी तरह युवक भीड़ में मौका पाकर भाग गया। हालांकि आधा घंटे बाद नेटवर्क ठीक होने पर कंप्यूटराइज्ड टिकट बननी शुरू हो गईं।
विभागीय सूत्रों की मानें तो चार-पांच दिन से तड़के नेटवर्क फेल हो रहा है। इस दौरान कई ट्रेनों का समय होने से यात्रियों की भीड़ होने से हंगामा होना आम बात है।
इन दिनों भीषण गर्मी में हर किसी को ठंडे पानी की चाह होती है। स्टेशन पर लगे वाटर कूलर पर यात्रियों की बोतल भरने के लिए लाइन लगती है।
हैंडपंप पर भी भीड़ रहती है। वहीं परिसर में खड़े होने वाले टेंपो चालकों से वसूली की जाती है। इसी वजह से इन पर रोक नहीं लगाई जाती।
ट्रेन के सफर से पहले जूझना पड़ता है जाम से
ट्रेन पकड़ना हो तो एक घंटा पहले निकलें
रेलवे स्टेशन गेट पर टेंपो चालकों का कब्जा