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चुनाव)न मौके मिले न ही संसद पहुंची नारी
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देश की सबसे बड़ी पंचायत में अभी तक जनपद से एक भी महिला चुनकर नहीं पहुंची है। राजनीतिक दलों में महज बीजेपी ने एक बार महिला नेता को लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया। हालांकि विधानसभा व निकाय और जिला पंचायत चुनाव में कुछ महिलाओं ने अपनी धमक का अहसास जरूर कराया।
1952 से फर्रुखाबाद लोकसभा सीट है। यहां से खुर्शीद आलम खान, सलमान खुर्शीद, राम मनोहर लोहिया, दयाराम शाक्य आदि के नाम शामिल हैं। लेकिन अब तक इस धरती पर किसी महिला प्रत्याशी को संसद तक पहुंचने का मौका नहीं मिला।
बीजेपी ने 2009 के चुनाव में कायमगंज की पूर्व पालिका अध्यक्ष मिथलेश अग्रवाल पर दांव जरूर खेला था। लेकिन वह चुनाव हार गईं। इसके बाद से और इससे पहले किसी भी पार्टी ने यह कदम नहीं उठाया।
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ऐसा नहीं है कि राजनीति में फर्रुखाबाद की महिलाओं कीं भागीदारी नहीं रही है। जब उन्हें मौका मिला है तो उन्होंने उसे खूब भुनाया भी है। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद कायमगंज विधानसभा से विधायक रही हैं।
इसके अलावा सपा नेता उर्मिला राजपूत विधायक रही हैं। उधर बीजेपी के पूर्व ऊर्जा मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की पत्नी प्रभा द्विवेदी ने भी सदर विधानसभा क्षेत्र से दो बार जीत दर्ज की। बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रही थीं।
जिला पंचायत चुनाव में भी महिला शक्ति ने अपना दमखम दिखाया है। वर्तमान सांसद मुकेश राजपूत पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर आसीन रह चुके हैं। इसके बाद जब यह सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई तो उनकी पत्नी सौभाग्यवती राजपूत ने इस कुर्सी पर कब्जा जमा लिया। वर्तमान में सपा की ज्ञानदेवी कठेरिया इस पद पर काबिज हैं।
निकाय चुनावों में महिला नेताओं ने जमकर अपना लोहा मनवाया है। जनपद में पूर्व विधायक की पत्नी दमयंती सिंह फर्रुखाबाद नगर पालिका अध्यक्ष रहीं। कायमगंज नगर पालिका में भी मिथलेश अग्रवाल पालिका अध्यक्ष बनीं।
उन्होंने भी लगातार तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज की। अभी की बात की जाए तो जनपद के छह में से तीन निकाय सदर में वत्सला अग्रवाल, कमालगंज में प्रीति महेश्वरी और शमसाबाद में कृष्णा देवी अध्यक्ष के पद पर आसीन हैं।
संसद तक पहुंचने का किसी महिला को नहीं मिला मौका
एक बार बीजेपी ने ही खेला दांव
विधानसभा व जिला पंचायत में महिलाओं ने दिखाया दमखम
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1952 से फर्रुखाबाद लोकसभा सीट है। यहां से खुर्शीद आलम खान, सलमान खुर्शीद, राम मनोहर लोहिया, दयाराम शाक्य आदि के नाम शामिल हैं। लेकिन अब तक इस धरती पर किसी महिला प्रत्याशी को संसद तक पहुंचने का मौका नहीं मिला।
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बीजेपी ने 2009 के चुनाव में कायमगंज की पूर्व पालिका अध्यक्ष मिथलेश अग्रवाल पर दांव जरूर खेला था। लेकिन वह चुनाव हार गईं। इसके बाद से और इससे पहले किसी भी पार्टी ने यह कदम नहीं उठाया।
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ऐसा नहीं है कि राजनीति में फर्रुखाबाद की महिलाओं कीं भागीदारी नहीं रही है। जब उन्हें मौका मिला है तो उन्होंने उसे खूब भुनाया भी है। पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद कायमगंज विधानसभा से विधायक रही हैं।
इसके अलावा सपा नेता उर्मिला राजपूत विधायक रही हैं। उधर बीजेपी के पूर्व ऊर्जा मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की पत्नी प्रभा द्विवेदी ने भी सदर विधानसभा क्षेत्र से दो बार जीत दर्ज की। बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रही थीं।
जिला पंचायत चुनाव में भी महिला शक्ति ने अपना दमखम दिखाया है। वर्तमान सांसद मुकेश राजपूत पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर आसीन रह चुके हैं। इसके बाद जब यह सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई तो उनकी पत्नी सौभाग्यवती राजपूत ने इस कुर्सी पर कब्जा जमा लिया। वर्तमान में सपा की ज्ञानदेवी कठेरिया इस पद पर काबिज हैं।
निकाय चुनावों में महिला नेताओं ने जमकर अपना लोहा मनवाया है। जनपद में पूर्व विधायक की पत्नी दमयंती सिंह फर्रुखाबाद नगर पालिका अध्यक्ष रहीं। कायमगंज नगर पालिका में भी मिथलेश अग्रवाल पालिका अध्यक्ष बनीं।
उन्होंने भी लगातार तीन बार इस सीट पर जीत दर्ज की। अभी की बात की जाए तो जनपद के छह में से तीन निकाय सदर में वत्सला अग्रवाल, कमालगंज में प्रीति महेश्वरी और शमसाबाद में कृष्णा देवी अध्यक्ष के पद पर आसीन हैं।
संसद तक पहुंचने का किसी महिला को नहीं मिला मौका
एक बार बीजेपी ने ही खेला दांव
विधानसभा व जिला पंचायत में महिलाओं ने दिखाया दमखम