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कोर्ट के आदेशों की अवहेलना में एआरटीओ तलब
Updated Tue, 31 Oct 2017 11:50 PM IST
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फर्रुखाबाद। कोर्ट के आदेशों की अवहेलना में एआरटीओ तलब किए गए है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अतीकउद्दीन ने एमबी एक्ट के पांच मामलों के प्रार्थना पत्रों पर आख्या मांगी थी। न देने पर सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी को नोटिस जारी किया गया और एसीजेएम ने दो नंबर को कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
शहर कोतवाली क्षेत्र निवासी संजीव, गबोविंद, नेत्रपाल, अजय कुमार वर्मा और अरुणा शंकर के वाहनों का एआरटीओ ने चालान किया था। इन लोगों ने अदालत में एआरटीओ कार्यालय से आख्या मंगाए जाने का प्रार्थना पत्र दिया था। एसीजेएम के लगातार आख्या मांगने पर एआरटीओ ने रिपोर्ट नहीं पेश की। तब संजीव कुमार के अधिवक्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र दिया, इसमें कहा कि वैन का 26 सितंबर को चालान किया गया था।
6500 रुपये जुर्माना जमा कराया गया, लेकिन कागज वापस करने से मना कर दिया। जब जुर्माना राशि जमा कर दी गई तो एआरटीओ को कागज अपने पास रखने और चालानी कोर्ट में भेजने का कोई अधिकार नहीं है। पीड़ित ने एआरटीओ से रिपोर्ट मंगा कर चालान में लगे आरसी, बीमा व लाइसेंस को वापस दिलाने की गुहार लगाई। उधर, एसीजेएम ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर नोटिस जारी किया।
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इसमें कहा गया कि प्रार्थना पत्रों पर अनेकों तिथियां लगने के बाद रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई। ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायालय के आदेशों के प्रति उदासीनता और लापरवाही बरती जा रही है। इस कारण प्रार्थना पत्रों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। न्यायालय के प्रति जो आचरण बरता जा रहा है। उससे प्रतीत होता है कि आपके नजरिए में न्यायालय का कोई महत्व नहीं है। 2 नवंबर को 12:30 बजे कोर्ट में सभी प्रार्थनापत्रों की आख्या लेकर उपस्थित नहीं हुए तो संबंधित के खिलाफ न्यायालय के आदेशों की अवमानना की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-एमबी एक्ट के मामलों में लगातार रिपोर्ट मांगने पर भी नहीं उपलब्ध कराई
अमर उजाला ब्यूरो
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शहर कोतवाली क्षेत्र निवासी संजीव, गबोविंद, नेत्रपाल, अजय कुमार वर्मा और अरुणा शंकर के वाहनों का एआरटीओ ने चालान किया था। इन लोगों ने अदालत में एआरटीओ कार्यालय से आख्या मंगाए जाने का प्रार्थना पत्र दिया था। एसीजेएम के लगातार आख्या मांगने पर एआरटीओ ने रिपोर्ट नहीं पेश की। तब संजीव कुमार के अधिवक्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र दिया, इसमें कहा कि वैन का 26 सितंबर को चालान किया गया था।
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6500 रुपये जुर्माना जमा कराया गया, लेकिन कागज वापस करने से मना कर दिया। जब जुर्माना राशि जमा कर दी गई तो एआरटीओ को कागज अपने पास रखने और चालानी कोर्ट में भेजने का कोई अधिकार नहीं है। पीड़ित ने एआरटीओ से रिपोर्ट मंगा कर चालान में लगे आरसी, बीमा व लाइसेंस को वापस दिलाने की गुहार लगाई। उधर, एसीजेएम ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर नोटिस जारी किया।
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इसमें कहा गया कि प्रार्थना पत्रों पर अनेकों तिथियां लगने के बाद रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई। ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायालय के आदेशों के प्रति उदासीनता और लापरवाही बरती जा रही है। इस कारण प्रार्थना पत्रों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। न्यायालय के प्रति जो आचरण बरता जा रहा है। उससे प्रतीत होता है कि आपके नजरिए में न्यायालय का कोई महत्व नहीं है। 2 नवंबर को 12:30 बजे कोर्ट में सभी प्रार्थनापत्रों की आख्या लेकर उपस्थित नहीं हुए तो संबंधित के खिलाफ न्यायालय के आदेशों की अवमानना की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-एमबी एक्ट के मामलों में लगातार रिपोर्ट मांगने पर भी नहीं उपलब्ध कराई
अमर उजाला ब्यूरो