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15 पशु बीमार, अस्पताल में डॉक्टर न दवाएं
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अमृतपुर पशु अस्पताल में खड़े पैरवेट। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
अमृतपुर। गांव हरसिंहपुर गहलवार में 15 पशु बीमार हैं, जबकि अमृतपुर पशु चिकित्सालय में न तो डॉक्टर हैं और न ही दवाएं। इससे अस्पताल पैरावेट के सहारे चल रहा है। पशुपालक झोलाछापों से इलाज कराने पर मजबूर हैं।
तहसील अमृतपुर में बने पशु अस्पताल में करीब तीन साल से डॉक्टर की तैनाती नहीं है। चौकीदार माया देवी अस्पताल को खोलती हैं। पैरावेट जगलाल, नरेंद्र, रामदीन अस्पताल में बैठकर पशुओं का इलाज करते हैं। इससे ग्रामीण पशुओं का इलाज झोलाछाप से कराने पर मजबूर हैं। क्षेत्र के गांव हरसिंहपुर में करीब 15 से अधिक पशु मुंहपका, खुरपका की बीमारी से ग्रस्त हैं।
गांव के शंभुदयाल, सोनू, अनिल कुमार, प्रशांत आदि का कहना है कि वह अस्पताल में कई बार गए, लेकिन कोई नहीं मिला। इससे पशुओं का इलाज झोलाछाप से करा रहे हैं। पशुओं का टीकाकरण भी नहीं हुआ।
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ॲगांव हरसिंहपुर गहलवार निवासी सत्य प्रकाश कहते हैं कि अस्पताल में डॉक्टर न होने से पशुओं का सही से इलाज नहीं हो पा रहा है। वह अपनी भैंस का इलाज झोलाछाप से करा रहे हैं।
अमृतपुर निवासी शिवधार का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर न होने से पशुओं के इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। भैंस को खुरपका और मुंहपका की बीमारी होने से परेशान हैं।
अमृतपुर अस्पताल में डिप्टी सीवीओ का पद सृजित है। तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। हर गांव में जल्द ही टीकाकरण कराया जाएगा। -डॉ. राजकिशोर सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, फर्रुखाबाद।
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तहसील अमृतपुर में बने पशु अस्पताल में करीब तीन साल से डॉक्टर की तैनाती नहीं है। चौकीदार माया देवी अस्पताल को खोलती हैं। पैरावेट जगलाल, नरेंद्र, रामदीन अस्पताल में बैठकर पशुओं का इलाज करते हैं। इससे ग्रामीण पशुओं का इलाज झोलाछाप से कराने पर मजबूर हैं। क्षेत्र के गांव हरसिंहपुर में करीब 15 से अधिक पशु मुंहपका, खुरपका की बीमारी से ग्रस्त हैं।
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गांव के शंभुदयाल, सोनू, अनिल कुमार, प्रशांत आदि का कहना है कि वह अस्पताल में कई बार गए, लेकिन कोई नहीं मिला। इससे पशुओं का इलाज झोलाछाप से करा रहे हैं। पशुओं का टीकाकरण भी नहीं हुआ।
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ॲगांव हरसिंहपुर गहलवार निवासी सत्य प्रकाश कहते हैं कि अस्पताल में डॉक्टर न होने से पशुओं का सही से इलाज नहीं हो पा रहा है। वह अपनी भैंस का इलाज झोलाछाप से करा रहे हैं।
अमृतपुर निवासी शिवधार का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर न होने से पशुओं के इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। भैंस को खुरपका और मुंहपका की बीमारी होने से परेशान हैं।
अमृतपुर अस्पताल में डिप्टी सीवीओ का पद सृजित है। तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। हर गांव में जल्द ही टीकाकरण कराया जाएगा। -डॉ. राजकिशोर सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, फर्रुखाबाद।