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चुनाव)पुलिस कर्मियों को नहीं मिलता मतदान का मौका
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निर्वाचन आयोग मतदाताओं को जागरूक करने और ज्यादा से ज्यादा मतदान कराने में करोड़ों खर्च कर देता है। नए मतदाता बनाने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है लेकिन जनपद में तैनात पुलिस कर्मियों को ही वोट करने को नहीं मिलता है। आलम यह है कि 26 साल की नौकरी में पुलिस कर्मियों को वोट करने का मौका नहीं मिला।
जनपद की पुलिस लाइन में सैकड़ों पुलिस कर्मी हैं। साथ ही अधिकारियों की सुरक्षा व थानों में तैनात पुलिस कर्मियों की संख्या भी हजार से ज्यादा होगी। मतदान के समय पुलिस कर्मी बहुत महत्वपूर्ण भुमिका निभाते हैं। शांति व्यस्था का जिम्मा उन्हीं पर होता है।
इतना ही नहीं चुनाव से पहले चारों ओर के माहौल को देखना और फिर पोलिंग बूथ की व्यवस्थाएं देखना आदि सारे काम उनके ही होते हैं। इसके बावजूद इन्हें अपना जनप्रतिनिधि को चुनने का मौका नहीं मिल पाता है।
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एक पुलिस कर्मी ने बताया कि जिन लोगों की ड्यूटी चुनाव में लगती है उन्हें तो वोट करने का मौका मिलता है। हम लोगों को नहीं मिल पाता है।
जनपद के एक आला अधिकारी की सुरक्षा में लगे आगरा निवासी पुलिस कर्मी ने बताया कि आठ साल से पुलिस विभाग में नौकरी कर रहा हूं। आज तक मतादान का अवसर नहीं मिला। बताया कि कई बार मतदान करने का मन होता है लेकिन जा ही नहीं पाते।
एक थाने में तैनात एसआई ने बताया कि पिछले 26 साल से पुलिस की नौकरी में हैं। इस दौरान करीब 20 चुनाव भी करवा चुके हैं लेकिन मतदान का अवसर नहीं मिला।
चुनाव ड्यूटी में लगाए गए मतदान कार्मिकों को चाहे वह पुलिस विभाग के हों या किसी और विभाग के सभी को चुनाव ड्यूटी पर रवाना होने से पहले पोस्टल बैलेट से मतदान करने की प्रक्रिया बताई जाती है।
ताकि वह लोग सही से मतदान कर सकें। इसके बावजूद ज्यादातर लोग मतदान नहीं कर पाते हैं। पिछले चुनाव में चारों विधानसभा क्षेत्रों में पुलिस कर्मचारियों समेत कुल 6 हजार 10 कार्मिकों को पोस्टल बैलेट दिए गए थे। इसमें पुलिस विभाग के लोग भी शामिल थे।
महज एक हजार सात सौ 90 पोस्टल बैलेट ही वापस आए। इससे चार हजार से ज्यादा पोस्टल बैलेट बरबाद हो गए।
पुलिस कर्मियों को नहीं मिलता मतदान का मौका
मतदान में लगे पुलिस कर्मियों को ही मिलते पोस्टल बैलेट
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जनपद की पुलिस लाइन में सैकड़ों पुलिस कर्मी हैं। साथ ही अधिकारियों की सुरक्षा व थानों में तैनात पुलिस कर्मियों की संख्या भी हजार से ज्यादा होगी। मतदान के समय पुलिस कर्मी बहुत महत्वपूर्ण भुमिका निभाते हैं। शांति व्यस्था का जिम्मा उन्हीं पर होता है।
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इतना ही नहीं चुनाव से पहले चारों ओर के माहौल को देखना और फिर पोलिंग बूथ की व्यवस्थाएं देखना आदि सारे काम उनके ही होते हैं। इसके बावजूद इन्हें अपना जनप्रतिनिधि को चुनने का मौका नहीं मिल पाता है।
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एक पुलिस कर्मी ने बताया कि जिन लोगों की ड्यूटी चुनाव में लगती है उन्हें तो वोट करने का मौका मिलता है। हम लोगों को नहीं मिल पाता है।
जनपद के एक आला अधिकारी की सुरक्षा में लगे आगरा निवासी पुलिस कर्मी ने बताया कि आठ साल से पुलिस विभाग में नौकरी कर रहा हूं। आज तक मतादान का अवसर नहीं मिला। बताया कि कई बार मतदान करने का मन होता है लेकिन जा ही नहीं पाते।
एक थाने में तैनात एसआई ने बताया कि पिछले 26 साल से पुलिस की नौकरी में हैं। इस दौरान करीब 20 चुनाव भी करवा चुके हैं लेकिन मतदान का अवसर नहीं मिला।
चुनाव ड्यूटी में लगाए गए मतदान कार्मिकों को चाहे वह पुलिस विभाग के हों या किसी और विभाग के सभी को चुनाव ड्यूटी पर रवाना होने से पहले पोस्टल बैलेट से मतदान करने की प्रक्रिया बताई जाती है।
ताकि वह लोग सही से मतदान कर सकें। इसके बावजूद ज्यादातर लोग मतदान नहीं कर पाते हैं। पिछले चुनाव में चारों विधानसभा क्षेत्रों में पुलिस कर्मचारियों समेत कुल 6 हजार 10 कार्मिकों को पोस्टल बैलेट दिए गए थे। इसमें पुलिस विभाग के लोग भी शामिल थे।
महज एक हजार सात सौ 90 पोस्टल बैलेट ही वापस आए। इससे चार हजार से ज्यादा पोस्टल बैलेट बरबाद हो गए।
पुलिस कर्मियों को नहीं मिलता मतदान का मौका
मतदान में लगे पुलिस कर्मियों को ही मिलते पोस्टल बैलेट