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स्वच्छता को गंगा के तटवर्ती 60 गांव चयनित
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गंगा के तटवर्ती गांवों में स्वच्छता की अलख जगाई जाएगी। इसके लिए सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (एसएलडब्ल्यूएम) प्लान के तहत पांच वर्ष की योजना बनाकर कार्य किया जाएगा। प्लान में जिले के 60 गांव चयनित किए गए हैं।
बुधवार को यूनीसेफ की ओर से डिवीजनल रिसोर्स पर्सन ने राजेपुर में एडीओ के साथ बैठक कर कार्ययोजना बनाई। ट्रायल के तौर पर आठ गांवों में प्रोजेक्टर के माध्यम से पांच दिन जागरूकता अभियान चलेगा।
गंगा स्वच्छता के लिए जिले के 60 गांव एसएलडब्ल्यूएम प्लान में चयनित किए गए हैं। इनमें ब्लाक राजेपुर क्षेत्र के सर्वाधिक गांव शामिल हैं। प्लान के तहत इन गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
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इसके साथ ग्राम पंचायत स्तर से गांव में रिसोर्स रिकवरी सेंटर, नाली निर्माण के साथ ही इसके स्थायित्व के कमियों के मूल्यांकन एवं सुुधार के लिए पांच वर्ष की कार्ययोजना भी बनेगी। इसमें घरेलू स्तर पर प्रथक्करण, घरों में कूड़े का संग्रहण, कूड़ा ले जाने को परिवहन, उपचार, रिसाइकिल व पुनरुपयोग शामिल होगा।
इसके लिए यूनीसेफ आईईडी की ओर से डिवीजनल रिसोर्स पर्सन शांतनु कुमार शाक्य ने यहां आकर अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि प्लान में गंगा के तटवर्ती 60 गांव चयनित किए गए हैं। मनरेगा, पंचायती राज व स्वच्छ भारत मिशन आदि विभागों के सहयोग से इस पर काम कराया जाएगा।
स्वच्छता के लिए ग्रामीणों का जागरूक होना आवश्यक है। इसके लिए शुरुआती दौर में 8 गांवों में पांच दिन ट्रायल होगा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया है। गांवों में प्रोजेक्टर लगाकर लोगों को गंदगी से होने वाले दुष्प्रभाव व इससे निजात के उपाय की जानकारी दी जाएगी।
इसके साथ ही गांव में नाली, शौचालय आदि की दिक्कत आने पर उसका निस्तारण भी होगा। इससे गांवों में सफाई के साथ गंगा को भी स्वच्छ रखा जा सकेगा। इसके लिए उन्होंने राजेपुर में एडीओ पंचायत, एपीओ मनरेगा व प्रधानों के साथ मीटिंग की। बुधवार से गांवों में प्रोजेक्टर लगाकर लोगों को जागरूक किया गया।
स्वच्छता को गंगा के तटवर्ती 60 गांव चयनित
प्रोजेक्टर से ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक
आठ गांवों में पांच दिन चलेगा ट्रायल
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बुधवार को यूनीसेफ की ओर से डिवीजनल रिसोर्स पर्सन ने राजेपुर में एडीओ के साथ बैठक कर कार्ययोजना बनाई। ट्रायल के तौर पर आठ गांवों में प्रोजेक्टर के माध्यम से पांच दिन जागरूकता अभियान चलेगा।
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गंगा स्वच्छता के लिए जिले के 60 गांव एसएलडब्ल्यूएम प्लान में चयनित किए गए हैं। इनमें ब्लाक राजेपुर क्षेत्र के सर्वाधिक गांव शामिल हैं। प्लान के तहत इन गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।
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इसके साथ ग्राम पंचायत स्तर से गांव में रिसोर्स रिकवरी सेंटर, नाली निर्माण के साथ ही इसके स्थायित्व के कमियों के मूल्यांकन एवं सुुधार के लिए पांच वर्ष की कार्ययोजना भी बनेगी। इसमें घरेलू स्तर पर प्रथक्करण, घरों में कूड़े का संग्रहण, कूड़ा ले जाने को परिवहन, उपचार, रिसाइकिल व पुनरुपयोग शामिल होगा।
इसके लिए यूनीसेफ आईईडी की ओर से डिवीजनल रिसोर्स पर्सन शांतनु कुमार शाक्य ने यहां आकर अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि प्लान में गंगा के तटवर्ती 60 गांव चयनित किए गए हैं। मनरेगा, पंचायती राज व स्वच्छ भारत मिशन आदि विभागों के सहयोग से इस पर काम कराया जाएगा।
स्वच्छता के लिए ग्रामीणों का जागरूक होना आवश्यक है। इसके लिए शुरुआती दौर में 8 गांवों में पांच दिन ट्रायल होगा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया है। गांवों में प्रोजेक्टर लगाकर लोगों को गंदगी से होने वाले दुष्प्रभाव व इससे निजात के उपाय की जानकारी दी जाएगी।
इसके साथ ही गांव में नाली, शौचालय आदि की दिक्कत आने पर उसका निस्तारण भी होगा। इससे गांवों में सफाई के साथ गंगा को भी स्वच्छ रखा जा सकेगा। इसके लिए उन्होंने राजेपुर में एडीओ पंचायत, एपीओ मनरेगा व प्रधानों के साथ मीटिंग की। बुधवार से गांवों में प्रोजेक्टर लगाकर लोगों को जागरूक किया गया।
स्वच्छता को गंगा के तटवर्ती 60 गांव चयनित
प्रोजेक्टर से ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक
आठ गांवों में पांच दिन चलेगा ट्रायल