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रामनगरिया में पुण्य की डुबकी के साथ बही श्रद्धा की धारा
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फर्रुखाबाद। पांचालघाट पर बसी मेला श्रीरामनगरिया में सुबह गंगा स्नान के साथ श्रद्धा की धारा बह निकलती है। कथा, भागवत व भंडारों का आयोजन कर लोग पुण्य कमा रहे हैं। कल्पवास व मेला अंतिम दौर में है। शनिवार को मेले में खासी भीड़ रही। कल्पवास क्षेत्र में कथा, कन्याभोज व भंडारों का सिलसिला चल रहा है। बच्चों व युवाओं ने झूले व सर्कस का आनंद लिया।
पंच रामानंदी निर्मोही अनी अखाड़ा की ओर से संत नारायण दास बटेश्वर धाम की अध्यक्षता में शाही शोभायात्रा निकाली गई। हनुमानजी के चिह्न वाले सात निशान लेकर संत करतब दिखाते चल रहे थे। वहीं, रास्ते में कीचड़ भरा होने से नाराजगी जाहिर की गई। सुरक्षा व्यवस्था न मिलने पर संतों ने कोतवाली में घुसकर रोष जताया। इस पर सिपाही से नोकझोंक भी हुई। जानकारी पर कोतवाली प्रभारी ने शोभायात्रा के साथ दो सिपाही भेजे। मेला भ्रमण के साथ पांचवीं सीढ़ी के गंगा तट पर जाकर संतों ने महंत सतीश महाराज के साथ निशानों की पूजा अर्चना की। आश्रम पर पहुंचकर शोभायात्रा का समापन हुआ।
तेेराबाई त्यागी खालसा बरगदियाघाट की ओर से संत बालकदास की अध्यक्षता में शोभायात्री निकाली गई। ठाकुरजी की पालकी के साथ चल रहे संत बैंडबाजे की धुन पर झूमे। तेेरा तलवार, पटेबाजी, गदका आदि करतब देखने के लिए भीड़ लगी रही। गंगा तट पर पहुंचकर महंत विष्णुदास के साथ संतों ने हनुमानजी के चिह्न वाले तीन निशानों की पूजा की।
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पंच रामानंदी निर्मोही अनी अखाड़ा की ओर से संत नारायण दास बटेश्वर धाम की अध्यक्षता में शाही शोभायात्रा निकाली गई। हनुमानजी के चिह्न वाले सात निशान लेकर संत करतब दिखाते चल रहे थे। वहीं, रास्ते में कीचड़ भरा होने से नाराजगी जाहिर की गई। सुरक्षा व्यवस्था न मिलने पर संतों ने कोतवाली में घुसकर रोष जताया। इस पर सिपाही से नोकझोंक भी हुई। जानकारी पर कोतवाली प्रभारी ने शोभायात्रा के साथ दो सिपाही भेजे। मेला भ्रमण के साथ पांचवीं सीढ़ी के गंगा तट पर जाकर संतों ने महंत सतीश महाराज के साथ निशानों की पूजा अर्चना की। आश्रम पर पहुंचकर शोभायात्रा का समापन हुआ।
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तेेराबाई त्यागी खालसा बरगदियाघाट की ओर से संत बालकदास की अध्यक्षता में शोभायात्री निकाली गई। ठाकुरजी की पालकी के साथ चल रहे संत बैंडबाजे की धुन पर झूमे। तेेरा तलवार, पटेबाजी, गदका आदि करतब देखने के लिए भीड़ लगी रही। गंगा तट पर पहुंचकर महंत विष्णुदास के साथ संतों ने हनुमानजी के चिह्न वाले तीन निशानों की पूजा की।
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