{"_id":"69a5f0191f6f59519000a91a","slug":"100-crore-worth-of-orders-for-zardozi-and-textile-printing-stalled-farrukhabad-news-c-22-1-sknp1018-109305-2026-03-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Farrukhabad News: जरदोजी व कपड़ा छपाई के 100 करोड़ के ऑर्डर रुके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Farrukhabad News: जरदोजी व कपड़ा छपाई के 100 करोड़ के ऑर्डर रुके
Tue, 03 Mar 2026 01:46 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Tue, 03 Mar 2026 01:46 AM IST
विज्ञापन
फोटो-19 शहर के एक कारखाने में सूखते कपड़े। संवाद
फर्रुखाबाद। पश्चिमी देशों में युद्ध शुरू होने के बाद जरदोजी व कपड़ा छपाई के 100 करोड़ से अधिक के ऑर्डर फंस गए। डीजल महंगा होने से भाड़ा बढ़ना तय है। दुबई फ्रीपोर्ट बंद होने से बड़ा माल ही नहीं बल्कि कूरियर सेवाएं तक बंद हो गई हैं। पहले अमेरिका के टैरिफ और अब युद्ध की वजह से दोनों ही कारोबार में बर्बादी के संकेत दिख रहे हैं। इससे कारोबारी चिंतित हैं।
जिले में जरदोजी और ब्लॉक प्रिंटिंग (कपड़ा छपाई) ओडीओपी योजना में शामिल हैं। कपड़ा छपाई के 200 से अधिक और जरदोजी के 150 से अधिक कारखाने हैं। जरदोजी का काम मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के हजारों घरों में होता है। इस काम में महिलाएं, बच्चे भी घरों में काम करते हैं। छपाई और जरदोजी में एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। अमेरिकी टैरिफ के झटके से कारोबार उबर भी न पाया था कि खाड़ी अमेरिका और इजराइल व ईरान में युद्ध शुरू होते ही खाड़ी देशों में हालात खराब हो गए। सबसे अधिक दुबई में ईरान के हमले ने हालात खराब कर दिए। जरदोजी और गृह वस्त्र तथा छपाई कला का खाड़ी बाजारों से गहरा नाता है। दुपट्टे, स्कार्फ, कुर्ता-कपड़ा और डिजाइनयुक्त छपे वस्त्रों की मांग बेइंतहा है। इस कारोबार पर तीन दिन में ही करीब 100 करोड़ रुपये के ऑर्डर फिलहाल रुक गए हैं। आने वाले दिनों में हालात और खराब होते दिख रहे हैं।
युद्ध से हालात खराब, अभी से फंसने लगे ऑर्डर
फोटो-20 कपिल साध
नोएडा में रह रहे शहर के सधवाड़ा निवासी कपिल साध कपड़ा के बड़े निर्यातक हैं। बताते हैं कि युद्ध से हालात खराब होने लगे। अभी से ऑर्डर फंसने लगे हैं। फर्रुखाबादी कारखानों में छपे कपड़े नोएडा में वस्त्र का रूप लेते हैं। इसके बाद उन्हें अमेरिका समेत खाड़ी देशों में भेजा जाता है। नया ऑर्डर नहीं मिल रहा, पुराना जाना बंद हो गया। लागत में भी बढ़ोतरी होना तय है। इससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी।
विज्ञापन
व्यापार पर हो रही दोतरफा मार, होगी दिक्कत
फोटो-21 अमर साध
कपड़ा छपाई कारोबारी अमर साध कहते हैं कि फिलहाल तीन दिन पहले मिला ऑर्डर छप रहा है। नया काम नहीं आया है। बताया कि दुबई पोर्ट ड्यूटी फ्री है। लिहाजा भारी मात्रा में माल दुबई के रास्ते खाड़ी देशों में जाता है। कुरियर तक बंद हो गए हैं। व्यापार पर दोतरफा मार है। माल बन चुका उसे भेजने में दिक्कत, नया मिल नहीं रहा। इससे भुगतान रुकेंगे।
इंडो-यूएस व्यापार समझौते पर टैरिफ सख्ती, वुमन प्रिंटेड गारमेंट कारोबार
चार फरवरी को घोषित भारत-अमेरिका (इंडो-यूएस) व्यापार सहयोग ढांचा सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम था। मगर 21 फरवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक टैरिफ को 15 फीसदी तक बढ़ाने के संकेत दिए। इससे चिंता पैदा हो गई। निर्माता व निर्यातक कपिल साध कहते हैं कि इस टैरिफ का सीधा प्रभाव लागत पर पड़ेगा। वुमन प्रिंटेड रेडीमेड गारमेंट निर्यातकों के दृष्टिकोण से ठीक साबित नहीं होगा।
विज्ञापन
जिले में जरदोजी और ब्लॉक प्रिंटिंग (कपड़ा छपाई) ओडीओपी योजना में शामिल हैं। कपड़ा छपाई के 200 से अधिक और जरदोजी के 150 से अधिक कारखाने हैं। जरदोजी का काम मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के हजारों घरों में होता है। इस काम में महिलाएं, बच्चे भी घरों में काम करते हैं। छपाई और जरदोजी में एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। अमेरिकी टैरिफ के झटके से कारोबार उबर भी न पाया था कि खाड़ी अमेरिका और इजराइल व ईरान में युद्ध शुरू होते ही खाड़ी देशों में हालात खराब हो गए। सबसे अधिक दुबई में ईरान के हमले ने हालात खराब कर दिए। जरदोजी और गृह वस्त्र तथा छपाई कला का खाड़ी बाजारों से गहरा नाता है। दुपट्टे, स्कार्फ, कुर्ता-कपड़ा और डिजाइनयुक्त छपे वस्त्रों की मांग बेइंतहा है। इस कारोबार पर तीन दिन में ही करीब 100 करोड़ रुपये के ऑर्डर फिलहाल रुक गए हैं। आने वाले दिनों में हालात और खराब होते दिख रहे हैं।
विज्ञापन
युद्ध से हालात खराब, अभी से फंसने लगे ऑर्डर
फोटो-20 कपिल साध
नोएडा में रह रहे शहर के सधवाड़ा निवासी कपिल साध कपड़ा के बड़े निर्यातक हैं। बताते हैं कि युद्ध से हालात खराब होने लगे। अभी से ऑर्डर फंसने लगे हैं। फर्रुखाबादी कारखानों में छपे कपड़े नोएडा में वस्त्र का रूप लेते हैं। इसके बाद उन्हें अमेरिका समेत खाड़ी देशों में भेजा जाता है। नया ऑर्डर नहीं मिल रहा, पुराना जाना बंद हो गया। लागत में भी बढ़ोतरी होना तय है। इससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी।
विज्ञापन
व्यापार पर हो रही दोतरफा मार, होगी दिक्कत
फोटो-21 अमर साध
कपड़ा छपाई कारोबारी अमर साध कहते हैं कि फिलहाल तीन दिन पहले मिला ऑर्डर छप रहा है। नया काम नहीं आया है। बताया कि दुबई पोर्ट ड्यूटी फ्री है। लिहाजा भारी मात्रा में माल दुबई के रास्ते खाड़ी देशों में जाता है। कुरियर तक बंद हो गए हैं। व्यापार पर दोतरफा मार है। माल बन चुका उसे भेजने में दिक्कत, नया मिल नहीं रहा। इससे भुगतान रुकेंगे।
इंडो-यूएस व्यापार समझौते पर टैरिफ सख्ती, वुमन प्रिंटेड गारमेंट कारोबार
चार फरवरी को घोषित भारत-अमेरिका (इंडो-यूएस) व्यापार सहयोग ढांचा सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम था। मगर 21 फरवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक टैरिफ को 15 फीसदी तक बढ़ाने के संकेत दिए। इससे चिंता पैदा हो गई। निर्माता व निर्यातक कपिल साध कहते हैं कि इस टैरिफ का सीधा प्रभाव लागत पर पड़ेगा। वुमन प्रिंटेड रेडीमेड गारमेंट निर्यातकों के दृष्टिकोण से ठीक साबित नहीं होगा।

फोटो-19 शहर के एक कारखाने में सूखते कपड़े। संवाद

फोटो-19 शहर के एक कारखाने में सूखते कपड़े। संवाद