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छात्रों ने विवि के मुख्य गेट का रास्ता रोक किया प्रदर्शन
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Jul 2018 10:53 PM IST
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद
- फोटो : amar ujala
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पुनर्मूल्यांकन का परिणाम घोषित किए जाने के बाद बुधवार प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिसिया कार्रवाई का दंश झेलना पड़ा है। छात्रों का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन ने डरा-धमका कर खदेड़ दिया। इस दौरान हुई हल्की धक्का-मुक्की में अविनाश सिंह, प्रफुल्ल चौधरी अभिषेक तिवारी समेत कई अन्य छात्रों को चोटें आई हैं। धरनास्थल पर छात्र अविनाश सिंह बेहोश हो गए। खबर लिखे जाने तक बेहोश छात्र अविनाश की हालत सामान्य बताई जा रही है। छात्रों का यह भी आरोप है कि पुलिस अपराधियों जैसा व्यवहार किया है, जबकि वह न्याय मांगने आए थे।
सैंपलिंग पुनर्मूल्यांकन की उत्तर पुस्तिकाओं को दिखाए जाने व बढ़ने-घटने वाले अंकों की उत्तर पुस्तिकाओं दिखाए जाने की मांग को लेकर छात्रों ने बुधवार को विवि प्रशासन से मुलाकात की। मामला हल न होने पर छात्रों का समूह विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से निकल कर बाहर आ गया। छात्र कुलपति व विश्वविद्यालय प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए मुख्य गेट पर पहुंच गए। छात्रों का समूह विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर आने जाने का रास्ता रोक सड़क पर बैठ गया। सूचना पर बड़ी संख्या में पुलिस भी पहुंच गई। इसके उपरांत विश्वविद्यालय की ओर से प्रोफेसर हिमांशु शेखर सिंह के नेतृत्व में शिक्षकों के दल ने छात्रों से आधा घंटे से अधिक तक बातचीत की, मगर छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे।
बाद में पुलिस प्रशासन की ओर से सीओ सिटी धनंजय कुशवाहा ने आक्रोशित छात्र-छात्राओं से बातचीत की। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चार दिन बाद आने की बात कही जा रही थी। छात्रों की ओर से आज ही निणर्य किए जाने की मांग की जा रही थी। अवध विवि के मुख्य गेट पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पुलिस व विश्वविद्यालय के अधिकारियों से वार्ता के दौरान एक उत्तर पुस्तिका की पीडीएफ भी दिखाई। इसमें परीक्षक की ओर से मुख्य पृष्ठ पर पांच व अंदर के पृष्ठों पर तीन नंबर अंकित थे। वार्ता के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों की ओर से संबंधित परीक्षक को ब्लैक लिस्टेड करने की बात कही गई।
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हालांकि छात्रों की ओर से यह सवाल किया गया कि यह मामला तो पकड़ में आ गया लेकिन 30 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं में ऐसी कितनी उत्तर पुस्तिकाएं होंगी।घंटों की मंत्रणा के बाद जब छात्र अपनी मांगाें पर अडिग रहे तो पुलिस प्रशासन व विश्वविद्यालय प्रशासन ने संयुक्त रूप से वार्ता की। जैसा कि छात्रों का आरोप है कि पुलिस व विश्वविद्यालय की वार्ता के बाद लौटे पुलिस कर्मियों ने पहले छात्र-छात्राओं को डराया व धमकाया और बल पूर्वक धरना स्थल से जबरन हटा दिया। छात्र अभिषेक तिवारी का कहना है कि इनमें तीन छात्रों को चोटें आई हैं।
धरने के दौरान छात्र अविनाश सिंह बेहोश हो गए। बाद में छात्रों की ओर से चिकित्सकों को दिखाया गया। खबर लिखे तक अविनाश की हालत सामान्य थी। धरने के दौरान मुख्य रूप से मीनाक्षी उपाध्याय, अविनाश सिंह, अभिषेक तिवारी, रंजीत चौधरी, प्रफुल्ल चौधरी समेत कई छात्र उपस्थित रहे।
लखनऊ विवि की घटना के मद्देनजर सतर्क रहा पुलिस प्रशासन
विगत सप्ताह लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र व शिक्षकों के बीच हुई बड़ी घटना के मद्देनजर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय रहा। धरना शुरू होने से पहले ही आसपास की चौकियों के प्रभारी व पुलिस बल मौके पर पहुंच गए थे। धरने के शुरू होते ही पुलिस बलों की संख्या बढ़ा दी गई थी। मौके पर सीओ सिटी घंटों तक छात्रों व बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ जमे रहे।
छात्रों से ज्ञापन विवि प्रशासन को सौंपने के साथ चार दिन का समय दिए जाने की बात कही गई। इस पर कुछ छात्र बीच में आक्रोशित हो गए और गेट के अंदर प्रवेश करने वालों को रोकने लगे। छात्रों को डांट-फटकार कर आवागमन अवरुद्ध करने से रोका गया। बाद में छात्र मान गए।- धनंजय कुशवाहा, सीओ सिटी, फैजाबाद।
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सैंपलिंग पुनर्मूल्यांकन की उत्तर पुस्तिकाओं को दिखाए जाने व बढ़ने-घटने वाले अंकों की उत्तर पुस्तिकाओं दिखाए जाने की मांग को लेकर छात्रों ने बुधवार को विवि प्रशासन से मुलाकात की। मामला हल न होने पर छात्रों का समूह विश्वविद्यालय के मुख्य भवन से निकल कर बाहर आ गया। छात्र कुलपति व विश्वविद्यालय प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए मुख्य गेट पर पहुंच गए। छात्रों का समूह विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर आने जाने का रास्ता रोक सड़क पर बैठ गया। सूचना पर बड़ी संख्या में पुलिस भी पहुंच गई। इसके उपरांत विश्वविद्यालय की ओर से प्रोफेसर हिमांशु शेखर सिंह के नेतृत्व में शिक्षकों के दल ने छात्रों से आधा घंटे से अधिक तक बातचीत की, मगर छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे।
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बाद में पुलिस प्रशासन की ओर से सीओ सिटी धनंजय कुशवाहा ने आक्रोशित छात्र-छात्राओं से बातचीत की। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चार दिन बाद आने की बात कही जा रही थी। छात्रों की ओर से आज ही निणर्य किए जाने की मांग की जा रही थी। अवध विवि के मुख्य गेट पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पुलिस व विश्वविद्यालय के अधिकारियों से वार्ता के दौरान एक उत्तर पुस्तिका की पीडीएफ भी दिखाई। इसमें परीक्षक की ओर से मुख्य पृष्ठ पर पांच व अंदर के पृष्ठों पर तीन नंबर अंकित थे। वार्ता के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों की ओर से संबंधित परीक्षक को ब्लैक लिस्टेड करने की बात कही गई।
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हालांकि छात्रों की ओर से यह सवाल किया गया कि यह मामला तो पकड़ में आ गया लेकिन 30 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं में ऐसी कितनी उत्तर पुस्तिकाएं होंगी।घंटों की मंत्रणा के बाद जब छात्र अपनी मांगाें पर अडिग रहे तो पुलिस प्रशासन व विश्वविद्यालय प्रशासन ने संयुक्त रूप से वार्ता की। जैसा कि छात्रों का आरोप है कि पुलिस व विश्वविद्यालय की वार्ता के बाद लौटे पुलिस कर्मियों ने पहले छात्र-छात्राओं को डराया व धमकाया और बल पूर्वक धरना स्थल से जबरन हटा दिया। छात्र अभिषेक तिवारी का कहना है कि इनमें तीन छात्रों को चोटें आई हैं।
धरने के दौरान छात्र अविनाश सिंह बेहोश हो गए। बाद में छात्रों की ओर से चिकित्सकों को दिखाया गया। खबर लिखे तक अविनाश की हालत सामान्य थी। धरने के दौरान मुख्य रूप से मीनाक्षी उपाध्याय, अविनाश सिंह, अभिषेक तिवारी, रंजीत चौधरी, प्रफुल्ल चौधरी समेत कई छात्र उपस्थित रहे।
लखनऊ विवि की घटना के मद्देनजर सतर्क रहा पुलिस प्रशासन
विगत सप्ताह लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र व शिक्षकों के बीच हुई बड़ी घटना के मद्देनजर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय रहा। धरना शुरू होने से पहले ही आसपास की चौकियों के प्रभारी व पुलिस बल मौके पर पहुंच गए थे। धरने के शुरू होते ही पुलिस बलों की संख्या बढ़ा दी गई थी। मौके पर सीओ सिटी घंटों तक छात्रों व बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ जमे रहे।
छात्रों से ज्ञापन विवि प्रशासन को सौंपने के साथ चार दिन का समय दिए जाने की बात कही गई। इस पर कुछ छात्र बीच में आक्रोशित हो गए और गेट के अंदर प्रवेश करने वालों को रोकने लगे। छात्रों को डांट-फटकार कर आवागमन अवरुद्ध करने से रोका गया। बाद में छात्र मान गए।- धनंजय कुशवाहा, सीओ सिटी, फैजाबाद।