फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Responsibility of two hospitals handling the same radiologist

एक ही रेडियोलॉजिस्ट संभाल रहे दो अस्पतालों की जिम्मेदारी

Fri, 26 Nov 2021 12:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Nov 2021 12:36 AM IST
विज्ञापन
Responsibility of two hospitals handling the same radiologist
अयोध्या। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना मरीजों के लिए किसी किले को भेदने से कम नहीं है। यहां अल्ट्रासाउंड कराने के लिए दो अस्पतालों की भीड़ जुटती है, लेकिन जांच करने के लिए एक ही चिकित्सक की तैनाती है।
विज्ञापन

मरीजों की जांच के अलावा मेडिकोलीगल का भी भार एकमात्र चिकित्सक के कंधे पर ही है। ऐसे में मरीजों को जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कुछ तो थक-हारकर निजी केंद्रों पर जाने को विवश होते हैं।
विज्ञापन

जिला अस्पताल में रेडियोलॉजी विभाग में दो चिकित्सक के पद हैं। जिसके सापेक्ष एकमात्र चिकित्सक डॉ. वीके ओझा की तैनाती है। मंडल मुख्यालय होने के कारण जिला अस्पताल में ही लगभग सभी विभागों में मरीजों की हर समय भीड़ रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

212 बेड का अस्पताल होने के कारण भर्ती मरीजों की संख्या भी पर्याप्त रहती है। बगल में स्थित जिला महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से अल्ट्रासाउंड सेवाएं लंबे समय से ठप हैं।
वहां के मरीजों को भी जिला अस्पताल में ही जांच के लिए भेजा जाता है। जबकि, जिला अस्पताल के सर्जरी व मेडिसिन विभाग के ही तमाम मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए पर्याप्त संख्या में प्रतिदिन रहते हैं।
दो अस्पतालों की भीड़ होने से प्रतिदिन काफी संख्या में मरीज सुबह आठ बजे से ही जमा हो जाते हैं। घंटों इंतजार करने के बाद जांच के लिए उनका नंबर आता है।
कई मरीजों का नंबर आते-आते समय भी समाप्त हो जाता है और उन्हें अगले दिन भी चक्कर लगाना पड़ता है। कुछ मरीज परेशान होकर निजी केंद्रों में चले जाते हैं। कुछ तमाम दिक्कतें झेलते हुए जांच कराने को विवश होते हैं।
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. वीके ओझा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड जांच के लिए कक्ष बड़ा होना चाहिए, लेकिन यहां का कक्ष बहुत छोटा है। इसी में जांच की जाती है और स्टाफ भी बैठकर कागजी कार्य पूरा करता है।
बाहर भी मरीजों को बैठने का पर्याप्त इंतजाम नहीं है। कुछ लोग जगह न मिलने पर जमीन पर ही बैठ जाते हैं। मूलभूत सुविधाओं की भी कमी होने से महिला-पुरुष मरीजों को दिक्कत होती है।
सोहावल से गुरुवार को आई मनीषा ने बताया कि प्रसव होना है। अल्ट्रासाउंड जांच के लिए करीब दो घंटे से बैठे हैं, अभी तक जांच नहीं हो सकी। बहादुरगंज की ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि जांच के लिए काफी देर से बैठे हैं।
पर्चा जमा किया है, लेकिन नंबर नहीं आया है। पहाड़गंज की परागी देवी ने बताया कि बहुत दिन से पेट में दर्द है। डॉक्टर को दिखाया तो अल्ट्रासाउंड कराने को कहा गया है। जांच के लिए काफी देर से बैठे हैं।
मिर्जापुर निवासी अर्चना ने बताया कि पेट में दर्द होने के कारण अल्ट्रासाउंड कराना है। सुबह नौ बजे से ही खाली पेट में आकर बैठे हैं, पानी पी रहे हैं, लेकिन न ही लघुशंका का इंतजाम है, न ही जांच हो पा रही है।

रेडियोलॉजिस्ट के दो पद के सापेक्ष एक की ही तैनाती है। महिला अस्पताल के मरीजों की भी यहीं जांच होती है। अधिक भीड़ होने के कारण प्रतिदिन 40-50 मरीजों की जांच कराई जाती है। मेडिकोलीगल भी अयोध्या सहित आसपास के जिलों से भी आता है। स्थिति से शासन को अवगत कराया गया है।-डॉ. सीबीएन त्रिपाठी, सीएमएस, जिला अस्पताल, अयोध्या
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed