{"_id":"5f19b3538ebc3e636d3acbcf","slug":"ram-mandir-faizabad-news-lko532116312","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब राजस्थान में होगी राम मंदिर के शेष पत्थरों की तराशी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब राजस्थान में होगी राम मंदिर के शेष पत्थरों की तराशी
Thu, 23 Jul 2020 09:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2020 09:27 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या राम जन्मभूमि राम मंदिर के शेष पत्थरों की तराशी अब राजस्थान में ही किए जाने की योजना है। यहीं से पत्थर तराश कर सीधे रामजन्मभूमि परिसर पहुंच जाएंगे। राम मंदिर के शिल्पकार चंद्रकांत सोमपुरा से मुलाकात कर लौटे रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला के सुपरवाइजर अन्नू भाई सोमपुरा ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पत्थरों की खरीद व तराशी के लिए रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक समिति का गठन कर दिया है। मंदिर निर्माण कार्यशाला के सुपरवाइजर अनु भाई सोमपुरा ने कहा है कि परिवर्तित मॉडल के आधार पर पत्थरों की व्यवस्था करने और मंदिर निर्माण पूरा करने में 4 साल का वक्त लग सकता है।
श्री राम जन्मभूमि परिसर की व्यवस्था ट्रस्ट के हाथ में आने के बाद से लगातार संतों महंतों और अयोध्यावासियों ने श्री राम जन्म भूमि पर विशाल मंदिर के निर्माण की मांग रखी थी। जिसे ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने अपनी दूसरी बैठक में पुराने मंदिर मॉडल में परिवर्तन का निर्णय लिया।
विज्ञापन
परिवर्तित मॉडल के अनुसार राम मंदिर में अब तीन की जगह 5 शिखर बनाए जाएंगे। मंदिर की ऊंचाई में 33 फीट की वृद्धि की गई है। पत्थरों की व्यवस्था अब ठेके पर कराई जा सकती है। ट्रस्टियों के निर्देश की प्रतीक्षा की जा रही है।
मंदिर मॉडल का प्रारूप पूरी तरह तैयार होने के बाद ट्रस्ट के साथ बैठक कर पत्थरों को राजस्थान में ही तराश कर रामजन्मभूमि परिसर लाने का निर्णय लिया जाएगा। मंदिर निर्माण कार्यशाला में जितने पत्थर रखे हैं, उन्हें राम जन्मभूमि पर पहुंचाया जाएगा। शेष पत्थरों को तराशने की व्यवस्था राजस्थान में की जाएगी। वहां से सीधे पत्थरों को राम जन्मभूमि परिसर लाया जाएगा।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि पत्थरों की खरीद व तराशी के लिए रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक समिति का गठन कर दिया है। मंदिर निर्माण कार्यशाला के सुपरवाइजर अनु भाई सोमपुरा ने कहा है कि परिवर्तित मॉडल के आधार पर पत्थरों की व्यवस्था करने और मंदिर निर्माण पूरा करने में 4 साल का वक्त लग सकता है।
विज्ञापन
श्री राम जन्मभूमि परिसर की व्यवस्था ट्रस्ट के हाथ में आने के बाद से लगातार संतों महंतों और अयोध्यावासियों ने श्री राम जन्म भूमि पर विशाल मंदिर के निर्माण की मांग रखी थी। जिसे ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने अपनी दूसरी बैठक में पुराने मंदिर मॉडल में परिवर्तन का निर्णय लिया।
विज्ञापन
परिवर्तित मॉडल के अनुसार राम मंदिर में अब तीन की जगह 5 शिखर बनाए जाएंगे। मंदिर की ऊंचाई में 33 फीट की वृद्धि की गई है। पत्थरों की व्यवस्था अब ठेके पर कराई जा सकती है। ट्रस्टियों के निर्देश की प्रतीक्षा की जा रही है।
मंदिर मॉडल का प्रारूप पूरी तरह तैयार होने के बाद ट्रस्ट के साथ बैठक कर पत्थरों को राजस्थान में ही तराश कर रामजन्मभूमि परिसर लाने का निर्णय लिया जाएगा। मंदिर निर्माण कार्यशाला में जितने पत्थर रखे हैं, उन्हें राम जन्मभूमि पर पहुंचाया जाएगा। शेष पत्थरों को तराशने की व्यवस्था राजस्थान में की जाएगी। वहां से सीधे पत्थरों को राम जन्मभूमि परिसर लाया जाएगा।