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पुनर्मूल्यांकन में 161 उत्तर पुस्तिकाओं के अंक बढ़े
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Jul 2018 11:45 PM IST
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद
- फोटो : amar ujala
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की ओर से किए गए मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन में बड़ा खेल सामने आया है। पुनर्मूल्यांकन को भेजी गई 831 में से 161 उत्तर पुस्तिकाओं के नंबर बढ़ गए हैं। परीक्षा समिति की बैठक में परीक्षा नियंत्रक एमपी सिंह की ओर से बताया गया है कि 161 उत्तर पुस्तिकाओं में से 131 उत्तर पुस्तिकाओं में एक से चार प्रतिशत तक अंकों की वृद्धि हुई है। नौ उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रतिशत तक अंकों में वृद्धि हुई है तथा 21 उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रतिशत से अधिक अंकों की वृद्धि हुई है। इन 21 में से 16 उत्तर पुस्तिकाएं एक ही परीक्षक की ओर से जांची गई हैं।
मामले में परीक्षक का पारिश्रमिक रोके जाने के साथ भविष्य में परीक्षक को मूल्यांकन से विरत करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा पुनर्मूल्यांकन में भेजे गई 831 उत्तर पुस्तिकाओं में से सिर्फ 197 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच सही पाई गई है। इन उत्तर पुस्तिकाओं के अंक में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। अवध विश्वविद्यालय की ओर से वर्ष 2018 की मुख्य परीक्षा परिणाम घोषित किए जाने के बाद एक लाख से अधिक फेल थे। इसमें असंतुष्ट छात्रों की ओर से विवि परिसर में धरना-प्रदर्शन किया गया था। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले 100, फिर 400 व अंत में 831 उत्तर पुस्तिकाओं का सैंपलिंग मूल्यांकन कराने के लिए बाहरी परीक्षकों को भेजा था।
यह उत्तर पुस्तिकाएं बुधवार को विश्वविद्यालय पहुंच चुकी थी। परीक्षा समिति की बैठक के बाद सोमवार को पुनर्मूल्यांकन की उत्तर पुस्तिकाओं का परिणाम सार्वजनिक कर दिया गया है। मीडिया प्रभारी केके वर्मा के अनुसार परीक्षा नियंत्रक प्रो. एमपी सिंह ने सैंपलिंग मूल्यांकन के परिणामों से समिति को अवगत कराते हुए बताया कि 831 उत्तर पुस्तिकाओं में से सैंपलिंग मूल्यांकन के पश्चात 197 उत्तर पुस्तिकाओं के अंक अपरिवर्तित रहे। 473 उत्तर पुस्तिकाओं में सैंपलिंग मूल्यांकन के उपरांत एक से छह प्रतिशत तक अंक घट गए। 131 उत्तर पुस्तिकाओं में एक से चार प्रतिशत तक अंकों की वृद्धि हुई है।
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नौ उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रतिशत तक अंकों में वृद्धि हुई व 21 उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रतिशत से अधिक अंकों की वृद्धि हुई। जिसमें से 16 उत्तर पुस्तिकायें बीएससी तृतीय वर्ष गणित तृतीय प्रश्न पत्र से संबंधित और एक ही परीक्षक के द्वारा मूल्यांकित की गई पायी गयीं। सैंपलिंग मूल्यांकन के इन परिणामों के आधार पर कुलपति की ओर से दिए गए निर्देशोें के अनुक्रम में जांच करने पर ज्ञात हुआ कि लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज के इस परीक्षक की ओर से गणित विषय की कुल 300 उत्तर पुस्तिकाएं ही मूल्यांकित की गयी हैं।
परीक्षा समिति ने सैंपलिंग मूल्यांकन की उक्त सांख्यिकी से अवगत होने के पश्चात व्यापक विचार-विमर्श के उपरांत परीक्षा समिति ने संबंधित शिक्षक को मूल्यांकन में लापरवाही का दोषी मानते हुए, इन्हें भविष्य में मूल्यांकन कार्यों से विरत किए जाने के साथ-साथ मूल्यांकन कार्य के लिए विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित पारिश्रमिक के भुगतान को रोके जाने का निर्णय लिया। साथ ही परीक्षा समिति ने कुलपति को अधिकृत किया कि परीक्षक की ओर से बरती गई लापरवाही, जिसके कारण विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई, से समस्त राज्य विश्वविद्यालयों को अवगत कराते हुए इन्हें भविष्य में मूल्यांकन कार्यों से वंचित किए जाने का अनुरोध पत्र प्रेषित किया जाए।
दागी परीक्षक द्वारा जांची गई 300 उत्तर पुस्तिकाओं का होगा पुनर्मूल्यांकन
परीक्षा समिति ने यह भी निर्णय लिया कि क्रिश्चियन कॉलेज लखनऊ के परीक्षक की ओर से बरती गयी घोर लापरवाही से छात्रों का अहित न हो इसलिए उक्त परीक्षक की ओर से मूल्यांकित समस्त 300 उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराते हुए पुनर्मूल्यांकन में प्राप्त अंकों को ही अंतिम रूप से छात्रों के अंक-पत्र पर अंकित किया जाए। परीक्षा समिति ने यह भी निर्णय लिया कि विभिन्न विषयों के अवशेष 14 छात्र जिनके अंकों में 10 प्रतिशत तक या उससे अधिक वृद्धि संभव है, उनके अनुक्रमांकों की सूची विश्वविद्यालय के सूचना पटल/वेबसाइट पर जारी करते हुए उन्हें चैलेंज इवैल्यूवेशन (मूल्यांकन को चुनौती) की प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करने की सलाह दी जाए।
फीस जमा करने के लिए दिया अंतिम अवसर
200 महाविद्यालयों की ओर से परीक्षा संबंधी बकाया शुल्क संबंधित प्रकरण पर विचार करते हुए परीक्षा समिति ने निर्णय लिया कि ऐसे समस्त महाविद्यालयों को बकाया शुल्क जमा करने का अवसर देते हुए 16, 17 एवं 18 जुलाई, 2018 को परिसर के संत कबीर सभागार में इन महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक आहूत कर इन्हें अंतिम अवसर प्रदान किया जाए। साथ ही तब तक के लिए संबंधित महाविद्यालयों के अंकपत्रों को रोक लिया जाय। इस अंतिम अवसर के बाद भी यदि महाविद्यालय परीक्षा शुल्क संबंधी खाते को दुरुस्त करने में असफल रहते है, तो ऐसे महाविद्यालयों की सूची को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रदर्शित करते हुए छात्रों को इन महाविद्यालयों में प्रवेश न लेने की सलाह दी जाए।
आवासीय परिसर में 10 से चलेंगी कक्षाएं
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में आवासीय विषयों की कक्षाएं 10 जुलाई से शुरू हो जाएंगी। सोमवार को कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने सभी विभागाध्यक्षों, समन्यवयकों एवं निदेशकों के साथ बैठक कर निर्देश जारी किए हैं कि शासन की मंशानुरूप 10 जुलाई से कक्षाएं शुरू कर दी जाएं। उन्होंने प्रोफेसरों व रीडरों को हिदायत दी है कि 10 जुलाई से अपनी निर्धारित कक्षाओं में पहुंचे।
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मामले में परीक्षक का पारिश्रमिक रोके जाने के साथ भविष्य में परीक्षक को मूल्यांकन से विरत करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा पुनर्मूल्यांकन में भेजे गई 831 उत्तर पुस्तिकाओं में से सिर्फ 197 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच सही पाई गई है। इन उत्तर पुस्तिकाओं के अंक में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। अवध विश्वविद्यालय की ओर से वर्ष 2018 की मुख्य परीक्षा परिणाम घोषित किए जाने के बाद एक लाख से अधिक फेल थे। इसमें असंतुष्ट छात्रों की ओर से विवि परिसर में धरना-प्रदर्शन किया गया था। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले 100, फिर 400 व अंत में 831 उत्तर पुस्तिकाओं का सैंपलिंग मूल्यांकन कराने के लिए बाहरी परीक्षकों को भेजा था।
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यह उत्तर पुस्तिकाएं बुधवार को विश्वविद्यालय पहुंच चुकी थी। परीक्षा समिति की बैठक के बाद सोमवार को पुनर्मूल्यांकन की उत्तर पुस्तिकाओं का परिणाम सार्वजनिक कर दिया गया है। मीडिया प्रभारी केके वर्मा के अनुसार परीक्षा नियंत्रक प्रो. एमपी सिंह ने सैंपलिंग मूल्यांकन के परिणामों से समिति को अवगत कराते हुए बताया कि 831 उत्तर पुस्तिकाओं में से सैंपलिंग मूल्यांकन के पश्चात 197 उत्तर पुस्तिकाओं के अंक अपरिवर्तित रहे। 473 उत्तर पुस्तिकाओं में सैंपलिंग मूल्यांकन के उपरांत एक से छह प्रतिशत तक अंक घट गए। 131 उत्तर पुस्तिकाओं में एक से चार प्रतिशत तक अंकों की वृद्धि हुई है।
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नौ उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रतिशत तक अंकों में वृद्धि हुई व 21 उत्तर पुस्तिकाओं में 10 प्रतिशत से अधिक अंकों की वृद्धि हुई। जिसमें से 16 उत्तर पुस्तिकायें बीएससी तृतीय वर्ष गणित तृतीय प्रश्न पत्र से संबंधित और एक ही परीक्षक के द्वारा मूल्यांकित की गई पायी गयीं। सैंपलिंग मूल्यांकन के इन परिणामों के आधार पर कुलपति की ओर से दिए गए निर्देशोें के अनुक्रम में जांच करने पर ज्ञात हुआ कि लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज के इस परीक्षक की ओर से गणित विषय की कुल 300 उत्तर पुस्तिकाएं ही मूल्यांकित की गयी हैं।
परीक्षा समिति ने सैंपलिंग मूल्यांकन की उक्त सांख्यिकी से अवगत होने के पश्चात व्यापक विचार-विमर्श के उपरांत परीक्षा समिति ने संबंधित शिक्षक को मूल्यांकन में लापरवाही का दोषी मानते हुए, इन्हें भविष्य में मूल्यांकन कार्यों से विरत किए जाने के साथ-साथ मूल्यांकन कार्य के लिए विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित पारिश्रमिक के भुगतान को रोके जाने का निर्णय लिया। साथ ही परीक्षा समिति ने कुलपति को अधिकृत किया कि परीक्षक की ओर से बरती गई लापरवाही, जिसके कारण विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई, से समस्त राज्य विश्वविद्यालयों को अवगत कराते हुए इन्हें भविष्य में मूल्यांकन कार्यों से वंचित किए जाने का अनुरोध पत्र प्रेषित किया जाए।
दागी परीक्षक द्वारा जांची गई 300 उत्तर पुस्तिकाओं का होगा पुनर्मूल्यांकन
परीक्षा समिति ने यह भी निर्णय लिया कि क्रिश्चियन कॉलेज लखनऊ के परीक्षक की ओर से बरती गयी घोर लापरवाही से छात्रों का अहित न हो इसलिए उक्त परीक्षक की ओर से मूल्यांकित समस्त 300 उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराते हुए पुनर्मूल्यांकन में प्राप्त अंकों को ही अंतिम रूप से छात्रों के अंक-पत्र पर अंकित किया जाए। परीक्षा समिति ने यह भी निर्णय लिया कि विभिन्न विषयों के अवशेष 14 छात्र जिनके अंकों में 10 प्रतिशत तक या उससे अधिक वृद्धि संभव है, उनके अनुक्रमांकों की सूची विश्वविद्यालय के सूचना पटल/वेबसाइट पर जारी करते हुए उन्हें चैलेंज इवैल्यूवेशन (मूल्यांकन को चुनौती) की प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करने की सलाह दी जाए।
फीस जमा करने के लिए दिया अंतिम अवसर
200 महाविद्यालयों की ओर से परीक्षा संबंधी बकाया शुल्क संबंधित प्रकरण पर विचार करते हुए परीक्षा समिति ने निर्णय लिया कि ऐसे समस्त महाविद्यालयों को बकाया शुल्क जमा करने का अवसर देते हुए 16, 17 एवं 18 जुलाई, 2018 को परिसर के संत कबीर सभागार में इन महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक आहूत कर इन्हें अंतिम अवसर प्रदान किया जाए। साथ ही तब तक के लिए संबंधित महाविद्यालयों के अंकपत्रों को रोक लिया जाय। इस अंतिम अवसर के बाद भी यदि महाविद्यालय परीक्षा शुल्क संबंधी खाते को दुरुस्त करने में असफल रहते है, तो ऐसे महाविद्यालयों की सूची को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रदर्शित करते हुए छात्रों को इन महाविद्यालयों में प्रवेश न लेने की सलाह दी जाए।
आवासीय परिसर में 10 से चलेंगी कक्षाएं
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में आवासीय विषयों की कक्षाएं 10 जुलाई से शुरू हो जाएंगी। सोमवार को कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने सभी विभागाध्यक्षों, समन्यवयकों एवं निदेशकों के साथ बैठक कर निर्देश जारी किए हैं कि शासन की मंशानुरूप 10 जुलाई से कक्षाएं शुरू कर दी जाएं। उन्होंने प्रोफेसरों व रीडरों को हिदायत दी है कि 10 जुलाई से अपनी निर्धारित कक्षाओं में पहुंचे।