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श्रीराम मंदिर परिसर के बाहर 100 मीटर की परिधि में नहीं हो सकेगा नया निर्माण
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अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बन रहे अयोध्या के राममंदिर को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में जाना जाएगा। इसकी तैयारी अयोध्या विकास प्राधिकरण कर रहा है।
प्राधिकरण ने शासन के निर्देश पर राममंदिर के इर्द गिर्द मंदिर व पर्यटकों की सुरक्षा के लिए नई नियमावली तैयार कर ली है। इसमें श्रीराम मंदिर को पर्यटन की दृष्टि से राष्ट्रीय धरोहर के रूप में दर्शाया गया है।
साथ ही नियमावली में मंदिर परिसर की अंतिम सीमा के बाद की 100 मीटर परिधि का क्षेत्र निषिद्घ क्षेत्र के रूप में जाना जाएगा। इस 100 मीटर की परिधि में किसी प्रकार का कोई नया निर्माण नहीं हो सकेगा।
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साथ ही निषिद्घ क्षेत्र के बाद का 200 मीटर का इलाका नियंत्रित क्षेत्र कहलाएगा। इसमें भवनों की अधिकतम ऊंचाई 12.5 मीटर से अधिक नहीं होगी।
अयोध्या विकास प्राधिकरण ने अपनी 78 वीं बोर्ड की बैठक में नई नियमावली तैयारी कराने का संस्तुति दे दी थी। इसके लिए प्रशासन, सुरक्षा, टाउन प्लानिंग सहित अन्य अहम विभागों की देखरेख में एक कमेटी गठित की गई।
अब इस कमेटी ने मंदिर व पर्यटकों की सुरक्षा व सुविधा की दृष्टि से नई नियमावली तैयार कर ली है। नई नियमावली को अयोध्या में पर्यटकों की भारी आमद के चलते राष्ट्रीय धरोहर के रूप में दर्शाया गया है।
साथ ही अयोध्या के राममंदिर परिसर के आसपास के क्षेत्र की 100 मीटर की परिधि को निषिद्घ क्षेत्र घोषित किया गया है। इसमें किसी प्रकार का नया निर्माण नहीं हो सकेगा।
साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से प्राधिकरण को यह भी अधिकार होगा कि जो आपत्ति भवन होंगे, वो भी गिराया जा सकेगा। निषिद्घ क्षेत्र में भवनों की मरम्मत के लिए भवन स्वामी को जिलाधिकारी व अयोध्या विकास प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी।
इसके साथ मंदिर परिसर की 100 मीटर की परिधि के बाद का 200 मीटर क्षेत्र नियंत्रित सीमा कहलाएगा। इसमें भवनों का निर्माण संभव हो सकेगा लेकिन भवनों की अधिकतम ऊंचाई 12.5 मीटर ही होगी।
इस इलाके में भी आपत्ति भवनों को ढहाने का अधिकार प्राधिकरण के पास होगा। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने श्रीराम मंदिर के आसपास के इलाके के लिए नई नियमावली तैयार कर ली है।
इसमें परिसर की अंतिम सीमा से 300 मीटर तक की दूरी को निषिद्घ व नियंत्रित सीमा के बीच में विभक्त किया गया है। इसमें श्रीराम मंदिर परिसर की अंतिम सीमा जानने के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण ने श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से मंदिर का कुल क्षेत्रफल मांगा है।
ट्रस्ट की ओर से श्रीराम मंदिर का क्षेत्रफल मिलने के बाद चारो तरफ से अंतिम सीमा का निर्धारण हो सकेगा। अंतिम सीमा के मिलते ही नियमावली को पूर्ण कर लिया जाएगा।
इसके बाद अयोध्या विकास प्राधिकरण अपनी बोर्ड की बैठक में नई नियमावली को पास कर शासन को भेज देगा। शासन की अनुमति के बाद नई नियमावली लागू हो जाएगी।
अयोध्या विकास प्राधिकरण ने श्रीराम मंदिर के लिए नई नियमावली तैयार कर ली है। मंदिर की अंतिम सीमा के बाद 100 मीटर की परिधि निषिद्घ क्षेत्र कहलाएगी। 100 मीटर के बाद का 200 मीटर का क्षेत्रफल नियंत्रित सीमा कहलाएगा। प्रथम 100 मीटर की परिधि में किसी प्रकार का नया निर्माण नहीं हो सकेगा जबकि बाद के 200 मीटर में भवनों की अधिकतम ऊंचाई 12.5 मीटर होगी।-आरपी सिंह, सचिव, अयोध्या विकास प्राधिकरण
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प्राधिकरण ने शासन के निर्देश पर राममंदिर के इर्द गिर्द मंदिर व पर्यटकों की सुरक्षा के लिए नई नियमावली तैयार कर ली है। इसमें श्रीराम मंदिर को पर्यटन की दृष्टि से राष्ट्रीय धरोहर के रूप में दर्शाया गया है।
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साथ ही नियमावली में मंदिर परिसर की अंतिम सीमा के बाद की 100 मीटर परिधि का क्षेत्र निषिद्घ क्षेत्र के रूप में जाना जाएगा। इस 100 मीटर की परिधि में किसी प्रकार का कोई नया निर्माण नहीं हो सकेगा।
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साथ ही निषिद्घ क्षेत्र के बाद का 200 मीटर का इलाका नियंत्रित क्षेत्र कहलाएगा। इसमें भवनों की अधिकतम ऊंचाई 12.5 मीटर से अधिक नहीं होगी।
अयोध्या विकास प्राधिकरण ने अपनी 78 वीं बोर्ड की बैठक में नई नियमावली तैयारी कराने का संस्तुति दे दी थी। इसके लिए प्रशासन, सुरक्षा, टाउन प्लानिंग सहित अन्य अहम विभागों की देखरेख में एक कमेटी गठित की गई।
अब इस कमेटी ने मंदिर व पर्यटकों की सुरक्षा व सुविधा की दृष्टि से नई नियमावली तैयार कर ली है। नई नियमावली को अयोध्या में पर्यटकों की भारी आमद के चलते राष्ट्रीय धरोहर के रूप में दर्शाया गया है।
साथ ही अयोध्या के राममंदिर परिसर के आसपास के क्षेत्र की 100 मीटर की परिधि को निषिद्घ क्षेत्र घोषित किया गया है। इसमें किसी प्रकार का नया निर्माण नहीं हो सकेगा।
साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से प्राधिकरण को यह भी अधिकार होगा कि जो आपत्ति भवन होंगे, वो भी गिराया जा सकेगा। निषिद्घ क्षेत्र में भवनों की मरम्मत के लिए भवन स्वामी को जिलाधिकारी व अयोध्या विकास प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी।
इसके साथ मंदिर परिसर की 100 मीटर की परिधि के बाद का 200 मीटर क्षेत्र नियंत्रित सीमा कहलाएगा। इसमें भवनों का निर्माण संभव हो सकेगा लेकिन भवनों की अधिकतम ऊंचाई 12.5 मीटर ही होगी।
इस इलाके में भी आपत्ति भवनों को ढहाने का अधिकार प्राधिकरण के पास होगा। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने श्रीराम मंदिर के आसपास के इलाके के लिए नई नियमावली तैयार कर ली है।
इसमें परिसर की अंतिम सीमा से 300 मीटर तक की दूरी को निषिद्घ व नियंत्रित सीमा के बीच में विभक्त किया गया है। इसमें श्रीराम मंदिर परिसर की अंतिम सीमा जानने के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण ने श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से मंदिर का कुल क्षेत्रफल मांगा है।
ट्रस्ट की ओर से श्रीराम मंदिर का क्षेत्रफल मिलने के बाद चारो तरफ से अंतिम सीमा का निर्धारण हो सकेगा। अंतिम सीमा के मिलते ही नियमावली को पूर्ण कर लिया जाएगा।
इसके बाद अयोध्या विकास प्राधिकरण अपनी बोर्ड की बैठक में नई नियमावली को पास कर शासन को भेज देगा। शासन की अनुमति के बाद नई नियमावली लागू हो जाएगी।
अयोध्या विकास प्राधिकरण ने श्रीराम मंदिर के लिए नई नियमावली तैयार कर ली है। मंदिर की अंतिम सीमा के बाद 100 मीटर की परिधि निषिद्घ क्षेत्र कहलाएगी। 100 मीटर के बाद का 200 मीटर का क्षेत्रफल नियंत्रित सीमा कहलाएगा। प्रथम 100 मीटर की परिधि में किसी प्रकार का नया निर्माण नहीं हो सकेगा जबकि बाद के 200 मीटर में भवनों की अधिकतम ऊंचाई 12.5 मीटर होगी।-आरपी सिंह, सचिव, अयोध्या विकास प्राधिकरण