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ट्रॉमा सेंटर में खुले में फेंका जा रहा मेडिकल कचरा
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अयोध्या। ट्रॉमा सेंटर में खुले में मेडिकल कचरा फेंका जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश एवं एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के कड़े रुख के बावजूद भी दर्शन नगर स्थित ट्रॉमा सेंटर में लापरवाही बरती जा रही है। इससे लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
अस्पतालों में खुले में फेंके गए मेडिकल कचरे से संक्रमित होकर लोगों को गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से बचाने के लिए सख्त नियम बने हैं। कचरे के उठान तक इसको नियमानुसार सुरक्षित रखने का भी मानक है, जिसमें कचरे को अलग-अलग थैलों में रखकर बंद कमरे में रखा जाता है।
लेकिन राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज, दर्शननगर स्थित ट्रॉमा सेंटर में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के नियमों को ताक पर रखकर खुले में मेडिकल कचरा डालकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। जबकि मेडिकल कचरे के निस्तारण के प्रति लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर बीते दिनों एनजीटी द्वारा काफी सख्ती बरती गई है और संबंधित अधिकारियों पर व्यक्तिगत तौर पर जुर्माना भी लगाया है।
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शुक्रवार को ट्रॉमा सेंटर में हालात बेहद खराब दिखे। ट्रॉमा सेंटर के दीवार व मुख्य मार्ग के बगल ही एक डस्टबिन जमीन पर पड़ा लिया, जिसकी ट्रॉली टूटी हुई थी।
इसी के बगल में सिरिंज, निडिल, ग्लूकोज चढ़ाने वाली नली, इंजेक्शन, खून लगा हुआ कपड़ा, ग्लब्स, विगो आदि खुले में पड़े मिले। मरीजों की दूषित पट्टियां भी सड़क पर फेंकी जा रही हैं।
इंजेक्शन की शीशी खुले में फेंकी जा रही हैं। ऐसे में यहां गुजरने वाले लोग बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। सुई भी पांव या अन्य अंग में लगने से बीमारियों की चपेट में आने का भय बना रहता है।
इन स्थानों पर छुट्टा जानवर भी टहलते रहते हैं, जो कचरे में मुंह मारते हैं। इस कारण पशुओं की भी जान का खतरा बना हुआ है। सरकारी अस्पतालों में जब यह स्थिति है तो निजी क्षेत्रों के अस्पतालों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
मेडिकल कचरा उठान के लिए स्पेक्ट्रम सोल्यूशन नामक संस्था को काम आवंटित किया गया है, जो प्रतिदिन कचरा ले जाती है। यह चूक किन परिस्थितियों में हुई है। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रोफेसर विजय कुमार, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, अयोध्या
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अस्पतालों में खुले में फेंके गए मेडिकल कचरे से संक्रमित होकर लोगों को गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से बचाने के लिए सख्त नियम बने हैं। कचरे के उठान तक इसको नियमानुसार सुरक्षित रखने का भी मानक है, जिसमें कचरे को अलग-अलग थैलों में रखकर बंद कमरे में रखा जाता है।
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लेकिन राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज, दर्शननगर स्थित ट्रॉमा सेंटर में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के नियमों को ताक पर रखकर खुले में मेडिकल कचरा डालकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। जबकि मेडिकल कचरे के निस्तारण के प्रति लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों पर बीते दिनों एनजीटी द्वारा काफी सख्ती बरती गई है और संबंधित अधिकारियों पर व्यक्तिगत तौर पर जुर्माना भी लगाया है।
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शुक्रवार को ट्रॉमा सेंटर में हालात बेहद खराब दिखे। ट्रॉमा सेंटर के दीवार व मुख्य मार्ग के बगल ही एक डस्टबिन जमीन पर पड़ा लिया, जिसकी ट्रॉली टूटी हुई थी।
इसी के बगल में सिरिंज, निडिल, ग्लूकोज चढ़ाने वाली नली, इंजेक्शन, खून लगा हुआ कपड़ा, ग्लब्स, विगो आदि खुले में पड़े मिले। मरीजों की दूषित पट्टियां भी सड़क पर फेंकी जा रही हैं।
इंजेक्शन की शीशी खुले में फेंकी जा रही हैं। ऐसे में यहां गुजरने वाले लोग बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। सुई भी पांव या अन्य अंग में लगने से बीमारियों की चपेट में आने का भय बना रहता है।
इन स्थानों पर छुट्टा जानवर भी टहलते रहते हैं, जो कचरे में मुंह मारते हैं। इस कारण पशुओं की भी जान का खतरा बना हुआ है। सरकारी अस्पतालों में जब यह स्थिति है तो निजी क्षेत्रों के अस्पतालों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
मेडिकल कचरा उठान के लिए स्पेक्ट्रम सोल्यूशन नामक संस्था को काम आवंटित किया गया है, जो प्रतिदिन कचरा ले जाती है। यह चूक किन परिस्थितियों में हुई है। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-प्रोफेसर विजय कुमार, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, अयोध्या