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31 जुलाई को रामनगरी से निकलेगी महाशंखनाद यात्रा
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अयोध्या। रामनगरी से 31 जुलाई को रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में महा शंखनाद यात्रा निकलेगी। ये यात्रा छह वर्ष तक देश के कोने-कोने में भ्रमण कर सवा लाख पौधे रोपेगी।
इसके साथ ही जगह-जगह शिविर लगाकर शंखनाद, गोष्ठी, कथा व प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। यात्रा का समापन 2025 में प्रयागराज में भव्यता से किया जाएगा।
ये जानकारी पत्रकारों को देते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत दिलीप दास ने बताया कि शंखनाद यात्रा के माध्यम से पूरे देश में सवा लाख औषधीय पौध रोपने का लक्ष्य है।
महंत दिलीप दास ने बताया कि प्रतिदिन 51 पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों का रोपण ही नहीं किया जाएगा बल्कि प्रत्येक पौधे को एक व्यक्ति द्वारा गोद भी लिया जाएगा ताकि इनका संरक्षण हो सके।
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हरिशंकरी, पंचवटी वृक्षों का रोपण जगह-जगह करने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त देश के कोने-कोने में स्थान-स्थान पर शिविर लगाकर वृक्षों की उपयोगिता लोगों को बताई जाएगी।
उन्होंने कहा कि शंखनाद चिकित्सा, अध्यात्म एवं आयुर्वेद विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत फलदायी है। चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से देखें तो शंखनाद करने वालों को गले व फेफड़े के रोग नहीं होते। शंखनाद से चेहरे, श्वांस तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का व्यायाम होता है। अध्यात्म में भी शंख को आयु वर्द्धक व समृद्धि दायक बताया गया है।
वास्तु दोष, पितृ दोष, ग्रह शांति के लिए भी शंखनाद अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने बताया कि यात्रा के शुभारंभ पर 31 जुलाई को दंतधावन कुंड पर पौधरोपण किया जाएगा।
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इसके साथ ही जगह-जगह शिविर लगाकर शंखनाद, गोष्ठी, कथा व प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। यात्रा का समापन 2025 में प्रयागराज में भव्यता से किया जाएगा।
ये जानकारी पत्रकारों को देते हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत दिलीप दास ने बताया कि शंखनाद यात्रा के माध्यम से पूरे देश में सवा लाख औषधीय पौध रोपने का लक्ष्य है।
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महंत दिलीप दास ने बताया कि प्रतिदिन 51 पौधे लगाए जाएंगे। इन पौधों का रोपण ही नहीं किया जाएगा बल्कि प्रत्येक पौधे को एक व्यक्ति द्वारा गोद भी लिया जाएगा ताकि इनका संरक्षण हो सके।
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हरिशंकरी, पंचवटी वृक्षों का रोपण जगह-जगह करने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त देश के कोने-कोने में स्थान-स्थान पर शिविर लगाकर वृक्षों की उपयोगिता लोगों को बताई जाएगी।
उन्होंने कहा कि शंखनाद चिकित्सा, अध्यात्म एवं आयुर्वेद विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत फलदायी है। चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से देखें तो शंखनाद करने वालों को गले व फेफड़े के रोग नहीं होते। शंखनाद से चेहरे, श्वांस तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का व्यायाम होता है। अध्यात्म में भी शंख को आयु वर्द्धक व समृद्धि दायक बताया गया है।
वास्तु दोष, पितृ दोष, ग्रह शांति के लिए भी शंखनाद अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने बताया कि यात्रा के शुभारंभ पर 31 जुलाई को दंतधावन कुंड पर पौधरोपण किया जाएगा।