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टूटी पटरी से गुजरी किसान एक्सप्रेस, हादसा टला
फैजाबाद
Updated Thu, 02 Feb 2017 10:42 PM IST
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फैजाबाद में गुरुवार को प्लेटफार्म नंबर एक पर टूटी पटरी की मरम्मत करते कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
तमाम संरक्षा तैयारियों को धता बताते हुए जर्जर रेलवे ट्रैक के टूटने का सिलसिला थम नहीं रहा है। किसान एक्सप्रेस गुरुवार को दोपहर में यहां अतिसंवेदनशील फैजाबाद जंक्शन के प्लेटफॉर्म एक की टूटी पटरी से गुजर गई। गनीमत रही कि स्पीड धीमी थी, वरना हादसा हो सकता था।
ट्रैक टूटने का पता ट्रेन गुजरने के बाद हुआ तो इंजीनियरिंग महकमे में हड़कंप मच गया। इस मामले में डीआरएम कार्यालय से भी जांच रिपोर्ट तलब की गई है। लापरवाही का आलम यह है कि पटरी जहां टूटी थी, वहां से चंद कदम के फासले पर 11 जनवरी को साबरमती एक्सप्रेस पटरी टूटने से डिरेल होते-होते बची थी।
धनबाद से फिरोजपुर जाने वाली अप किसान एक्सप्रेस (13307) ट्रेन करीब डेढ़ घंटे की देरी से दोपहर 12:35 बजे प्लेटफॉर्म एक पर आई। दस किमी गति के कॉशन से ट्रेन रेंगते हुए गुजर गई। इसके बाद प्लेटफॉर्म एक के बीचोबीच रेलवे पुस्तकालय के सामने वेंडरों ने सबसे पहले टूटा ट्रैक देखा तो इसकी सूचना स्टेशन मास्टर कार्यालय में दी।
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इसके बाद हलचल मच गई। यह घटना वहीं हुई थी, जहां से तीन मीटर दूर इंजीनियरिंग विभाग ने बीते 11 जनवरी को टूटे ट्रैक को एक घंटे की मशक्कत के बाद कैंपिंग कोच लगाकर क्लैंप से पटरी को बांधा था। सवाल उठ रहा है कि जहां पूरा महकमा बैठता है, वहीं जब जर्जर ट्रैक का पता नहीं चल रहा तो संरक्षा जांच का क्या मतलब?
बताते हैं कि 12:50 बजे चीफ पीवे नंदन सिंह ने एक नंबर से ट्रेनों का संचालन रुकवा दिया और डेढ़ बजे के करीब ट्रैक मैन, गैंगमैनों ने चीफ पीवे की उपस्थिति में ट्रैक में छेद कर क्लैंप कसने का कार्य शुरू कर दिया। इस दौरान सभी ट्रेनें दो नंबर से गुजारी गयीं।
हाल यह है कि स्टेशन के यार्ड के ट्रैक काफी जर्जर हो गये हैं। इसे बदलने का प्रस्ताव धूल फांक रहा है। एक नंबर ट्रैक के स्लीपर दबाव से जगह-जगह बैठ गये हैं। इससे ट्रैक लहरदार हो गया है। यार्ड की रीमॉडलिंग शुरू होने का दावा वर्षों से हो रहा है।
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ट्रैक टूटने का पता ट्रेन गुजरने के बाद हुआ तो इंजीनियरिंग महकमे में हड़कंप मच गया। इस मामले में डीआरएम कार्यालय से भी जांच रिपोर्ट तलब की गई है। लापरवाही का आलम यह है कि पटरी जहां टूटी थी, वहां से चंद कदम के फासले पर 11 जनवरी को साबरमती एक्सप्रेस पटरी टूटने से डिरेल होते-होते बची थी।
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धनबाद से फिरोजपुर जाने वाली अप किसान एक्सप्रेस (13307) ट्रेन करीब डेढ़ घंटे की देरी से दोपहर 12:35 बजे प्लेटफॉर्म एक पर आई। दस किमी गति के कॉशन से ट्रेन रेंगते हुए गुजर गई। इसके बाद प्लेटफॉर्म एक के बीचोबीच रेलवे पुस्तकालय के सामने वेंडरों ने सबसे पहले टूटा ट्रैक देखा तो इसकी सूचना स्टेशन मास्टर कार्यालय में दी।
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इसके बाद हलचल मच गई। यह घटना वहीं हुई थी, जहां से तीन मीटर दूर इंजीनियरिंग विभाग ने बीते 11 जनवरी को टूटे ट्रैक को एक घंटे की मशक्कत के बाद कैंपिंग कोच लगाकर क्लैंप से पटरी को बांधा था। सवाल उठ रहा है कि जहां पूरा महकमा बैठता है, वहीं जब जर्जर ट्रैक का पता नहीं चल रहा तो संरक्षा जांच का क्या मतलब?
बताते हैं कि 12:50 बजे चीफ पीवे नंदन सिंह ने एक नंबर से ट्रेनों का संचालन रुकवा दिया और डेढ़ बजे के करीब ट्रैक मैन, गैंगमैनों ने चीफ पीवे की उपस्थिति में ट्रैक में छेद कर क्लैंप कसने का कार्य शुरू कर दिया। इस दौरान सभी ट्रेनें दो नंबर से गुजारी गयीं।
हाल यह है कि स्टेशन के यार्ड के ट्रैक काफी जर्जर हो गये हैं। इसे बदलने का प्रस्ताव धूल फांक रहा है। एक नंबर ट्रैक के स्लीपर दबाव से जगह-जगह बैठ गये हैं। इससे ट्रैक लहरदार हो गया है। यार्ड की रीमॉडलिंग शुरू होने का दावा वर्षों से हो रहा है।