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निजी अस्पतालों की निगरानी करेगी आठ सदस्यीय टीम
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अयोध्या। जिलाधिकारी व आईएमए की बैठक के उपरांत निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं देने को हरी झंडी जरूर दे दी गई है। लेकिन इन अस्पतालों में कोरोना से बचाव के मानकों की निगरानी के लिए आठ सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो अस्पतालों में भ्रमण करके अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगी। लॉकडाउन के दौरान मानकों को ध्यान में रखकर इलाज करने के लिए आईएमए ने सभी निजी अस्पतालों को एडवायजरी जारी किया है।
लॉकडाउन के दौरान सामान्य मरीजों के इलाज में आ रही समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से जिले के सभी नर्सिंग होम को आकस्मिक सेवाएं प्रदान करने की छूट दी गई है। यह निर्णय जिला प्रशासन व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मध्य हुई बैठक में लेने के बाद सेवाएं बहाल की गई हैं।
अस्पतालों में लॉकडाउन व कोरोना बचाव के सभी मानकों का अनुसरण करते हुए ही सेवाएं देने की छूट दी गई है। इसकी निगरानी के लिए आठ सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। आईएमए अध्यक्ष डॉ. एसएम द्विवेदी व सचिव डॉ. शिवेंद्र सिंहा ने बताया कि टीम में एसीएमओ डॉ. अजय मोहन, जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. नानक सरन, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. शिवेंद्र सिंहा, डॉ. नीरज सिंह, जय सिंह व ओमप्रकाश सिंह शामिल हैं। जो क्लीनिक व अस्पतालों की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर जिलाधिकारी व सीएमओ को रिपोर्ट सौंपेंगे।
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बताया कि इसी को ध्यान में रखकर अस्पतालों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। सभी चिकित्सक सिर्फ आकस्मिक सेवाएं ही प्रदान करेंगे। यदि संभव हो तो मरीजों को फोन पर अलग-अलग समय पर बुलाएंगे। प्रतिष्ठानों पर थर्मल स्क्रीनिंग, मास्क, सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था हो। प्रत्येक मरीज व तीमारदार को मॉस्क उपलब्ध कराया जाय। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जाय।
भर्ती मरीजों के बिस्तर की दूरी 5-6 फिट हो। प्रतिष्ठान पर स्टाफ की समस्या कम हो। सभी चिकित्सक व स्टाफ के लिए पीपीई किट उपलब्ध कराई जाय। 6-8 घंटे के अंतराल पर परिसर को सैनिटाइज किया जाय। यदि मरीज ग्रीन जोन से है और कोरोना संभावित नहीं है तो उसकी कोरोना जांच कराना अनिवार्य नहीं है। संदिग्ध व्यक्ति को गेट से ही सरकारी चिकित्सालय या आइसोलेशन में भेजा जाय। सामान्य मरीज को देखने के लिए पीपीई किट की जरूरत नहीं है। 65 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के चिकित्सक सिर्फ टेलीफोन से सलाह दे सकते हैं।
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लॉकडाउन के दौरान सामान्य मरीजों के इलाज में आ रही समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से जिले के सभी नर्सिंग होम को आकस्मिक सेवाएं प्रदान करने की छूट दी गई है। यह निर्णय जिला प्रशासन व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मध्य हुई बैठक में लेने के बाद सेवाएं बहाल की गई हैं।
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अस्पतालों में लॉकडाउन व कोरोना बचाव के सभी मानकों का अनुसरण करते हुए ही सेवाएं देने की छूट दी गई है। इसकी निगरानी के लिए आठ सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। आईएमए अध्यक्ष डॉ. एसएम द्विवेदी व सचिव डॉ. शिवेंद्र सिंहा ने बताया कि टीम में एसीएमओ डॉ. अजय मोहन, जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. नानक सरन, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. शिवेंद्र सिंहा, डॉ. नीरज सिंह, जय सिंह व ओमप्रकाश सिंह शामिल हैं। जो क्लीनिक व अस्पतालों की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर जिलाधिकारी व सीएमओ को रिपोर्ट सौंपेंगे।
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बताया कि इसी को ध्यान में रखकर अस्पतालों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। सभी चिकित्सक सिर्फ आकस्मिक सेवाएं ही प्रदान करेंगे। यदि संभव हो तो मरीजों को फोन पर अलग-अलग समय पर बुलाएंगे। प्रतिष्ठानों पर थर्मल स्क्रीनिंग, मास्क, सैनिटाइजर आदि की व्यवस्था हो। प्रत्येक मरीज व तीमारदार को मॉस्क उपलब्ध कराया जाय। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जाय।
भर्ती मरीजों के बिस्तर की दूरी 5-6 फिट हो। प्रतिष्ठान पर स्टाफ की समस्या कम हो। सभी चिकित्सक व स्टाफ के लिए पीपीई किट उपलब्ध कराई जाय। 6-8 घंटे के अंतराल पर परिसर को सैनिटाइज किया जाय। यदि मरीज ग्रीन जोन से है और कोरोना संभावित नहीं है तो उसकी कोरोना जांच कराना अनिवार्य नहीं है। संदिग्ध व्यक्ति को गेट से ही सरकारी चिकित्सालय या आइसोलेशन में भेजा जाय। सामान्य मरीज को देखने के लिए पीपीई किट की जरूरत नहीं है। 65 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के चिकित्सक सिर्फ टेलीफोन से सलाह दे सकते हैं।