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Ayodhya News: रामायणकालीन वृक्षों से हरा-भरा होगा रामंदिर परिसर
Fri, 06 Oct 2023 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 06 Oct 2023 12:49 AM IST
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अयोध्या। राममंदिर न सिर्फ भव्यता व स्थापत्य कला की दृष्टि से विश्व में मिसाल कायम करने वाला होगा, बल्कि यहां से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रसारित होगा। राम जन्मभूमि परिसर इको फ्रेंडली होगा। परिसर के 70 फीसदी भाग में हरियाली होगी। यहां रामायण कालीन वृक्षों को रोपित किया जाएगा। अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति पत्र मिल चुका है।
राममंदिर निर्माण में ऐसी कोई भी वस्तु का प्रयोग नहीं किया जा रहा, जो पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाली हो। मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर से ही इसकी झलक देखने को मिलती रही है। नींव खोदाई में बाधा बनने वाले कई सौ साल पुराने पीपल, बरगद, पाकड़, नीम आदि वृक्षों को काटा नहीं गया, बल्कि अन्यत्र शिफ्ट कर रोपित कर दिया गया, जो आज भी संरक्षित हैं। इसी तरह परिसर में नए वृक्षों को रोपित किए जाने की तैयारी है। यहां नवग्रह वाटिका, नक्षत्र वाटिका, हरिशंकरी वाटिका आदि विकसित किए जाने की योजना है।
अयोध्या मंडल के प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी टीएन सिंह ने बताया कि मंदिर का क्षेत्रफल पहले 1,43,665 वर्ग मीटर था, जो विस्तारीकरण के बाद अब 2,78,455 वर्ग मीटर हो गया है। विस्तारीकरण क्षेत्र के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति मांगी गई थी।
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रामायण में वर्णित हैं 88 प्रकार के वृक्ष
वाल्मीकि रामायण में 88 प्रकार के वृक्षों का वर्णन हैं। परिसर में रामायण कालीन इन सभी वृक्षों को रोपित किए जाने की योजना है। हालांकि वन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि रामायण कालीन वृक्षों की कुछ प्रजातियां अब विलुप्त हो चुकी हैं। परिसर में इन्हें नए सिरे से उगाने का प्रयास किया जाएगा। पीपल, कदंब, पारिजात, अशोक, रूद्राक्ष आदि के पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि पूरा परिसर रामायण काल का अहसास कराता दिखे।
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राममंदिर निर्माण में ऐसी कोई भी वस्तु का प्रयोग नहीं किया जा रहा, जो पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाली हो। मंदिर निर्माण के शुरुआती दौर से ही इसकी झलक देखने को मिलती रही है। नींव खोदाई में बाधा बनने वाले कई सौ साल पुराने पीपल, बरगद, पाकड़, नीम आदि वृक्षों को काटा नहीं गया, बल्कि अन्यत्र शिफ्ट कर रोपित कर दिया गया, जो आज भी संरक्षित हैं। इसी तरह परिसर में नए वृक्षों को रोपित किए जाने की तैयारी है। यहां नवग्रह वाटिका, नक्षत्र वाटिका, हरिशंकरी वाटिका आदि विकसित किए जाने की योजना है।
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अयोध्या मंडल के प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी टीएन सिंह ने बताया कि मंदिर का क्षेत्रफल पहले 1,43,665 वर्ग मीटर था, जो विस्तारीकरण के बाद अब 2,78,455 वर्ग मीटर हो गया है। विस्तारीकरण क्षेत्र के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति मांगी गई थी।
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रामायण में वर्णित हैं 88 प्रकार के वृक्ष
वाल्मीकि रामायण में 88 प्रकार के वृक्षों का वर्णन हैं। परिसर में रामायण कालीन इन सभी वृक्षों को रोपित किए जाने की योजना है। हालांकि वन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि रामायण कालीन वृक्षों की कुछ प्रजातियां अब विलुप्त हो चुकी हैं। परिसर में इन्हें नए सिरे से उगाने का प्रयास किया जाएगा। पीपल, कदंब, पारिजात, अशोक, रूद्राक्ष आदि के पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि पूरा परिसर रामायण काल का अहसास कराता दिखे।