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पिता और पुत्रों को 13 साल बाद मिला न्याय
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2015 11:49 PM IST
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राष्ट्रीय लोक अदालत ने जिले में भी लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई। किसी को 20 साल बाद अदालत का चक्कर लगाने से निजात मिली तो किसी को पंद्रह वर्षों से लंबित कोर्ट में मकान के बंटवारे का विवाद सुलह समझौते के जरिए निस्तारित किया गया।
शहर के ककरही बाजार निवासी प्रमोद कुमार और उनके पिता चंदी प्रसाद ने शत्रुहन प्रसाद, राम गोपाल, श्रीराम, शिवशंकर, महेश, दिनेश, मुकेश के खिलाफ पुश्तैनी मकान के बंटवारे के बाबत वाद वर्ष 2002 में दायर किया।
यह वाद सिविल जज (सीडि) रवींद्र गुप्ता की कोर्ट में विचाराधीन था। वकीलों की हड़ताल व अन्य वजह से यह मुकदमा निस्तारित नहीं हो पा रहा था। लोक अदालत में पक्षों के मध्य सुलह होने से मामले का निस्तारण हुआ।
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गोशाईगंज थानाक्षेत्र के तेलियागढ़ निवासी मनोज कुमार 26 फरवरी 1995 को रेलगाड़ी में खाद्य सामग्री बेचते हुए पकड़े गए थे। इनके पास सामग्री बेचने का लाइसेंस नहीं था। यह वाद एसीजेएम पारुल अत्री की कोर्ट में था।
मनोज ने परेशान होकर अपना जुर्म स्वीकार कर लिया इससे लोक अदालत में इनका मामला भी निपट गया। शहर के कोठापार्चा निवासी शौकत अली, मो. अली, वाहिद अली व राजू के खिलाफ 14 मार्च 2000 को कोर्ट के आदेश पर एफआईआर मारपीट में दर्ज हुई थी।
यह मुकदमा सीजेएम देवकांत शुक्ल की अदालत में विचाराधीन था। लगातार पंद्रह साल से तीन लोग कोर्ट का चक्कर लगा रहे थे। दौरान मुकदमा मो. अली की मौत हो गई। लोक अदालत में अन्य तीनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया।
इससे तीनों को राहत मिली। वादकारी शौकत अली का कहना था कि वह बच्चों के पेट पर पत्थर बांधकर कोर्ट आते थे। ताज मोहम्मद निवासी कोपेपुर थाना पटरंगा के ऊपर आरोप था कि उन्होंने 16 जुलाई 1999 को इसी गांव की रहने वाली अतीकुलनिशां को मारपीट कर चोट पहुंचाई थी।
अतीकुल की तहरीर पर ताज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। यह वाद एसीजेएम पारुल अत्री की कोर्ट में विचाराधीन था। इसमें भी जुर्म स्वीकारोक्ति के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया।
इसी तरह रौनाही थानाक्षेत्र के दिगंबरपुर निवासी ताहिर की आरा मशीन प्रभागीय वनाधिकारी एसआर प्रजापति ने 30 मार्च 1999 को सीज कर दी थी। इस आरा मशीन का पंजीकरण नहीं था। अवैध चिरान होती थी। इन्हें भी लोक अदालत में सीजेएम देवकांत शुक्ल की अदालत से न्याय मिला।
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शहर के ककरही बाजार निवासी प्रमोद कुमार और उनके पिता चंदी प्रसाद ने शत्रुहन प्रसाद, राम गोपाल, श्रीराम, शिवशंकर, महेश, दिनेश, मुकेश के खिलाफ पुश्तैनी मकान के बंटवारे के बाबत वाद वर्ष 2002 में दायर किया।
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यह वाद सिविल जज (सीडि) रवींद्र गुप्ता की कोर्ट में विचाराधीन था। वकीलों की हड़ताल व अन्य वजह से यह मुकदमा निस्तारित नहीं हो पा रहा था। लोक अदालत में पक्षों के मध्य सुलह होने से मामले का निस्तारण हुआ।
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गोशाईगंज थानाक्षेत्र के तेलियागढ़ निवासी मनोज कुमार 26 फरवरी 1995 को रेलगाड़ी में खाद्य सामग्री बेचते हुए पकड़े गए थे। इनके पास सामग्री बेचने का लाइसेंस नहीं था। यह वाद एसीजेएम पारुल अत्री की कोर्ट में था।
मनोज ने परेशान होकर अपना जुर्म स्वीकार कर लिया इससे लोक अदालत में इनका मामला भी निपट गया। शहर के कोठापार्चा निवासी शौकत अली, मो. अली, वाहिद अली व राजू के खिलाफ 14 मार्च 2000 को कोर्ट के आदेश पर एफआईआर मारपीट में दर्ज हुई थी।
यह मुकदमा सीजेएम देवकांत शुक्ल की अदालत में विचाराधीन था। लगातार पंद्रह साल से तीन लोग कोर्ट का चक्कर लगा रहे थे। दौरान मुकदमा मो. अली की मौत हो गई। लोक अदालत में अन्य तीनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया।
इससे तीनों को राहत मिली। वादकारी शौकत अली का कहना था कि वह बच्चों के पेट पर पत्थर बांधकर कोर्ट आते थे। ताज मोहम्मद निवासी कोपेपुर थाना पटरंगा के ऊपर आरोप था कि उन्होंने 16 जुलाई 1999 को इसी गांव की रहने वाली अतीकुलनिशां को मारपीट कर चोट पहुंचाई थी।
अतीकुल की तहरीर पर ताज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। यह वाद एसीजेएम पारुल अत्री की कोर्ट में विचाराधीन था। इसमें भी जुर्म स्वीकारोक्ति के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया।
इसी तरह रौनाही थानाक्षेत्र के दिगंबरपुर निवासी ताहिर की आरा मशीन प्रभागीय वनाधिकारी एसआर प्रजापति ने 30 मार्च 1999 को सीज कर दी थी। इस आरा मशीन का पंजीकरण नहीं था। अवैध चिरान होती थी। इन्हें भी लोक अदालत में सीजेएम देवकांत शुक्ल की अदालत से न्याय मिला।