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रामनगरी के मठ-मंदिरों की बनेगी डिजिटल कुंडली

Thu, 09 Jun 2022 12:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jun 2022 12:18 AM IST
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Digital Kundli will be made of Ramnagari's monasteries-temples
अयोध्या। प्रदेश सरकार ऑनलाइन एकीकृत मंदिर सूचना प्रणाली विकसित करने के लिए तैयार है। इसके लिए समस्त जिलों को निर्देशित भी किया जा चुका है। इसी क्रम में धर्मनगरी अयोध्या में प्राचीन मंदिरों की सूची तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है।
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रामनगरी के प्राचीन मठ-मंदिरों की डिजिटल कुंडली तैयार की जाएगी। जिसमें मंदिरों का विवरण, इतिहास व मानचित्र अपलोड किया जाएगा। पर्यटकों को एक क्लिक पर पूरी जानकारी उपलब्ध होगी।
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रामनगरी को मंदिरों का शहर कहा जाता है। यहां छोटे-बड़े करीब आठ हजार मंदिर हैं। इनमें से कई मंदिरों की अपनी पौराणिक मान्यता है तो कुछ मंदिर 200 लेकर 500 साल तक पुराने भी हैं।
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अयोध्या के मंदिरों की न सिर्फ प्राचीन मान्यता है बल्कि इनकी स्थापत्य कला भी बेजोड़ है जो इन्हें भव्य बनाती है। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी, कनकभवन, वाल्मीकि रामायण भवन, मणिराम दास की छावनी, दशरथ महल, बिड़ला मंदिर, सियाराम किला, लक्ष्मण किला सहित अन्य कई मंदिर हैं जो श्रद्धा व आस्था का प्रधान केंद्र तो हैं ही, इनकी स्थापत्य कला व भव्यता भी भक्तों को आकर्षित करती है।
अगले दो साल में राम जन्मभूमि परिसर में भव्य राम मंदिर का निर्माण भी पूरा हो जाएगा। राममंदिर न सिर्फ भव्यता बल्कि तकनीक के मामले में भी अव्वल होगा।
चूंकि अयोध्या में राममंदिर निर्माण के साथ ही भक्तों व पर्यटकों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। ऐसे में अयोध्या केे विश्वस्तरीय पर्यटन नगरी बनाने का भी काम तेज हो गया है।
पर्यटकों के लिए सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। इसी क्रम में रामनगरी के मठ-मंदिरों की सूची भी तैयार की जा रही है। जिला प्रशासन ने मंदिरों का डाटा उपलब्ध कराने का आदेश मातहतों को जारी किया है।
ऑनलाइन एकीकृत मंदिर सूचना प्रणाली के क्रम में क्षेत्र के मंदिरों की सूची, विवरण, इतिहास, मुख्यालय से दूरी और प्रमुख मार्गों से मंदिर की दूरी के बारे में जानकारी अपलोड की जाएगी। इसके साथ-साथ पर्यटकों की सुविधा के लिए मार्ग मानचित्र भी अपलोड किए जाएंगे।
अयोध्या आने वाले पर्यटकों को हर प्रमुख मंदिरों के बारे में एक क्लिक करते ही संपूर्ण जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। जिला सूचना अधिकारी डॉ. मुरलीधर सिंह ने बताया कि शासन से पूरे प्रदेश के ऐतिहासिक व पौराणिक मंदिरों की सूची बनाने का आदेश आया है।
अयोध्या में संस्कृति विभाग सूचनाएं एकत्र कर रहा है, आवश्यकता होगी तो सूचना विभाग इसमें मदद करेगा। पौराणिक मंदिरों की जानकारी राजस्व अभिलेखों में भी देनी होगी। हर मंदिर के बारे में कम से कम 250 शब्दों की टिप्पणी भी अंकित की जाएगी।
जिसमें मंदिर की पौराणिक महत्ता, मंदिर में साल भर में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम, श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधा भी शामिल होगी। इसके पीछे रामनगरी में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने की सरकार की मंशा है।
रामनगरी में कई मंदिर ऐसे हैं जिनका उल्लेख शास्त्रों, पुराणों में दर्ज हैं। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी, कनकभवन, रामलला व छोटी देवकाली मंदिर न सिर्फ भक्तों की आस्था का केंद्र है बल्कि रामनगरी की पौराणिकता के भी गवाह है।
नयाघाट स्थित नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना महाराज कुश ने की थी। छोटी देवकाली में माता पार्वती स्वयं विराजती हैं, ऐसी मान्यता है। कैकेयी ने कनकभवन माता सीता को मुंह दिखाई में दिया था।
क्षीरेश्वरनाथ की स्थापना महाराज दशरथ द्वारा किए जाने का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। रामचरित मानस में लिखा है कि अयोध्या के उत्तर दिशा में सरयू प्रवाहित हैं। सरयू सदियों से भक्तों की आस्था का केंद्र है।

वाल्मीकि रामायण भवन में रामायण के सभी 24 हजार श्लोक अंकित हैं। इसके अलावा कालेराम मंदिर, दशरथ महल, शेषावतार मंदिर, लाल साहब दरबार, जालपा देवी सहित सैकड़ों की संख्या में ऐसे मंदिर हैं जो रामनगरी की पौराणिकता के गवाह हैं।
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