फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   पूस में नहीं बरसे मेघ, गेहूं की फसल होगी प्रभावित

पूस में नहीं बरसे मेघ, गेहूं की फसल होगी प्रभावित

Tue, 22 Jan 2019 12:32 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jan 2019 12:32 AM IST
विज्ञापन
पूस में नहीं बरसे मेघ, गेहूं की फसल होगी प्रभावित
पूस में नहीं बरसे मेघ, गेहूं की फसल होगी प्रभावित
विज्ञापन

अयोध्या। पूस माह बीत चुका है लेकिन ओला, कोहरा सहित आसमान से बरसात की एक बूंद भी नहीं गिरी। मौसम की यह बेरुखी किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही है।

कृषि विभाग ने लक्ष्य के अनुसार आच्छादन तो शत-प्रतिशत कर लिया है लेकिन उत्पादन प्रभावित होने की उम्मीद है। बरसात न होने से गेहूं की फसल को सबसे अधिक नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।
विज्ञापन


वहीं, असिंचित क्षेत्रों में चना, मटर, मसूर, राई, सरसों आदि का उत्पादन भी घटने के संकेत हैं। हालांकि मौसम विभाग ने अब एक-दो दिन में छिटपुट बरसात के संकेत दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मौजूदा वर्ष में शासन की ओर से फसलों के आच्छादन के लिए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष बोआई करके कृषि विभाग भले ही वाहवाही बटोर रहा है, लेकिन मौसम ने यदि करवट नहीं बदली तो उसके मंसूबों पर पानी फिरने के आसार हैं।

इस बार कड़ाके की ठंडक का इंतजार करते हुए लगभग ठंड का मौसम ही गुजर रहा है। दिसंबर के मध्य तक लोगों को दिन में ऊनी कपड़े भारी लग रहे थे और रात के तापमान में नमी रहती थी।

अभी भी पूस का महीना भी बीत चुका है, लेकिन बरसात तो दूर आसमान में बादल तक नहीं छाए, जो कि फसलों के लिए अशुभ माना जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में कहावत भी है कि, चार बूंद जब बरसै पूसा, आधा गेहूं आधा भूसा।

अर्थात पूस मास में चार बूंद बरसात भी होने से गेहूं की पैदावार अच्छी होती है, लेकिन जिले में 111125 हेक्टेयर गेहूं की बोआई कर चुके किसानों के अरमान पर मौसम की बेरुखी पानी फेर रही है।

बरसात न होने से किसानों को बार-बार गेहूं की सिंचाई करना पड़ रहा है, जिससे लागत मूल्य भी बढ़ रहा है। इसके अलावा कल्ला कम निकलने व दानों के पतले होने की आशंका है।

वहीं, असिंचित क्षेत्रों में बोई गई दलहन व तिलहनी फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि जनवरी के मध्य तक बरसात नहीं हुई तो गेहूं के साथ ही कुछ दलहनी, तिलहनी फसलें भी चौपट हो सकती हैं।

हालांकि नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ. सीताराम मिश्र ने 22, 23 व 25, 26 को छिटपुट वर्षा की संभावना जताई है।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान इसको ध्यान में रखते हुए गेहूं की फसल की सिंचाई आवश्यकतानुसार ही करें। इस सप्ताह बदली छाए रहने की संभावना है।

इसलिए सरसों की वर्तमान में फूल वाली फसल में माहूं कीट लगने की दशा से फसल बचाने के लिए डाईमिथोएट 30 ईसी एक लीटर या मोनोक्रोटोफास 36 एसएल एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

जिन आम की फसल में बौर हों उन्हें तोड़कर फेंक दें। वर्षा के दृष्टिगत चने की फसल की सिंचाई आवश्यकतानुसार फूल आने से पहले करें, फूल आते समय सिंचाई करने से नुकसान हो सकता है।


जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह ने कहा कि जनवरी माह बीतने के कगार है लेकिन बरसात नहीं हुई। इससे गेहूं की फसल को नुकसान की संभावना जताई जा रही है। साथ ही असिंचित क्षेत्रों में दलहन व तिलहनी फसलों का भी उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed