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मनगरी में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:06 AM IST
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अयोध्या। शास्त्रों में भगवान राम और कृष्ण के बीच अभिन्नता प्रतिपादित है। इसकी तस्दीक जन्माष्टमी के मौके पर पूरी शिद्दत से होती है। हर वर्ष की तरह इस बार भी कनकभवन, मणिरामदास की छावनी, दशरथ महल बड़ास्थान, हरिधाम गोपाल मंदिर, लक्ष्मण किला, श्रीरामबल्लभाकुंज जैसी भगवान राम की प्रमुख पीठों सहित अन्य राम मंदिरों में भी कृष्ण जन्मोत्सव उसी भाव-चाव से मनाने की तैयारी मुखर हो रही है, जिस तरह राम जन्मोत्सव मनाया जाता है।
दशरथमहल बड़ास्थान में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है। बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में प्रतिदिन सायंकाल 5 बजे से रात्रि 7.30 बजे तक श्रीकृष्ण लीला का मंचन हो रहा है। वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा मनोहारी श्रीकृष्ण लीला का मंचन भक्तों के श्रद्धाकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां तीन सितंबर की मध्य रात्रि में 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य कहते हैं कि भगवान राम व कृष्ण में अभिन्नता स्वाभाविक है। भगवान कृष्ण भी उसी सर्वव्यापी ब्रह्म के पूर्णावतार हैं, जिसके राम जी। समाज शास्त्रीय दृष्टि से राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, तो कृष्ण लीला पुरुषोत्तम। राम और श्रीकृष्ण के नाम में भी भेद नहीं है। राम माने जिसमें योगी लोग रमण करें तो कृष्ण में भी योगी लोग रमण करते हैं।
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संत बंगाली बाबा का स्थान गुरूधाम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है। गुरुधाम के संस्थापक सिद्ध संत सच्चिदानंद दास बंगाली बाबा जी का भी जन्म सन 1900 में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन ही हुआ था। बाबा के भक्त कृष्ण जन्माष्टमी पर्व को आविर्भाव महोत्सव के रूप में मनाते चले आ रहे हैं।
चार दिवसीय उत्सव का शुभारंभ शनिवार से हुआ। 71 घंटे का अखंड नाम संकीर्तन के साथ ही उत्सव का श्रीगणेश हो चुका है। मंदिर के व्यवस्थापक गदाधर दास ने बताया कि गुरुदेव का आविर्भाव महोत्सव एवं जन्माष्टमी का पर्व तीन सितंबर को मनाया जाएगा। वहीं श्रीरामबल्लभाकुंज, मणिरामदास की छावनी, बृजमोहन कुंज, राधा-माधव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में जन्माष्टमी पर्व को लेकर उत्सव का श्रीगणेश हो चुका है।
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दशरथमहल बड़ास्थान में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है। बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में प्रतिदिन सायंकाल 5 बजे से रात्रि 7.30 बजे तक श्रीकृष्ण लीला का मंचन हो रहा है। वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा मनोहारी श्रीकृष्ण लीला का मंचन भक्तों के श्रद्धाकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां तीन सितंबर की मध्य रात्रि में 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
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महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य कहते हैं कि भगवान राम व कृष्ण में अभिन्नता स्वाभाविक है। भगवान कृष्ण भी उसी सर्वव्यापी ब्रह्म के पूर्णावतार हैं, जिसके राम जी। समाज शास्त्रीय दृष्टि से राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, तो कृष्ण लीला पुरुषोत्तम। राम और श्रीकृष्ण के नाम में भी भेद नहीं है। राम माने जिसमें योगी लोग रमण करें तो कृष्ण में भी योगी लोग रमण करते हैं।
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संत बंगाली बाबा का स्थान गुरूधाम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है। गुरुधाम के संस्थापक सिद्ध संत सच्चिदानंद दास बंगाली बाबा जी का भी जन्म सन 1900 में कृष्ण जन्माष्टमी के दिन ही हुआ था। बाबा के भक्त कृष्ण जन्माष्टमी पर्व को आविर्भाव महोत्सव के रूप में मनाते चले आ रहे हैं।
चार दिवसीय उत्सव का शुभारंभ शनिवार से हुआ। 71 घंटे का अखंड नाम संकीर्तन के साथ ही उत्सव का श्रीगणेश हो चुका है। मंदिर के व्यवस्थापक गदाधर दास ने बताया कि गुरुदेव का आविर्भाव महोत्सव एवं जन्माष्टमी का पर्व तीन सितंबर को मनाया जाएगा। वहीं श्रीरामबल्लभाकुंज, मणिरामदास की छावनी, बृजमोहन कुंज, राधा-माधव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में जन्माष्टमी पर्व को लेकर उत्सव का श्रीगणेश हो चुका है।