चंपत राय की अपील: 22 जनवरी के बाद आएं अयोध्या, जहां हैं वहीं पर कीजिए भजन-कीर्तन, दरवाजे पर जलाएं दीये
महासचिव चंपत राय ने एक्स अकाउंट पर जारी बयान में कहा, 'हम नही जानते अयोध्या में 22 जनवरी को 25 हजार लोग आयेंगे या 25 लाख, लेकिन हमारा निवेदन यहीं है कि 22 जनवरी के बाद अयोध्या आएं।
विस्तार
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से श्रीराम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां तेज हो गईं हैं। इस बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक्स अकाउंट पर जारी बयान में कहा, 'हम नही जानते अयोध्या में 22 जनवरी को 25 हजार लोग आयेंगे या 25 लाख, लेकिन हमारा निवेदन यहीं है कि 22 जनवरी के बाद अयोध्या आएं। आप अपने स्थान पर आनंद मनाइये, भजन कीर्तन कीजिए, त्योहार मनाइये और अपने घरों के दरवाजे दीपक से प्रकाशित कीजिए।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए मेहमानों को आमंत्रण भेजने का क्रम तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में ट्रस्ट की ओर से मंदिर आंदोलन में जान गंवाने वाले कारसेवकों के परिजनों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। 1990 के गोलीकांड में मारे गए शरद व रामकुमार कोठारी की बहन पूर्णिमा कोठारी रविवार को अयोध्या पहुंचीं। उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मुलाकात की। रामलला के दर्शन भी किए।
हम नही जानते अयोध्या में 22 जनवरी को 25 हज़ार लोग आयेंगे या 25 लाख। लेकिन हमारा निवेदन यहीं है कि 22 जनवरी के बाद अयोध्या आयें।
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आप अपने स्थान पर आनंद मनाइये, भजन कीर्तन कीजिए, त्यौहार मनाइये और अपने घरों के दरवाजे दीपक से प्रकाशित कीजिए।pic.twitter.com/LufborIZRO— Champat Rai (@ChampatRaiVHP) December 4, 2023
अमर उजाला को बताया कि राममंदिर निर्माण से उनके भाइयों का सपना पूरा हो रहा है। उनके सपने को पूरा होते देखना जीवन का सबसे सुखद क्षण है। ट्रस्ट की ओर से उन्हें व परिजनों को प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है। समारेाह में वे भी रामलला के भक्तों की सेवा के लिए 10 दिवसीय जलपान शिविर लगाने जा रही हैं। इसकी अनुमति ट्रस्ट की ओर से मिल गई है। यह शिविर 16 से 24 जनवरी तक लगाया जाएगा।
संग्रहालय में सहेजा जाए मंदिर आंदोलन का इतिहास
पूर्णिमा कोठारी ने कहा कि राममंदिर आंदोलन स्वतंत्रता आंदोलन से कम नहीं था। श्रीराम के प्रति आस्था का चरम इस कदर था कि पांच सौ सालों तक चले संघर्ष में लाखों ने जान गंवाई। युवा पीढ़ी मंदिर आंदोलन को याद रखे इसलिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अपील है कि संग्रहालय बनाकर आंदोलन का सुदीर्घ इतिहास संरक्षित किया जाना चाहिए। इसको लेकर उनकी चंपत राय से बात भी हुई है। उन्होंने संग्रहालय के निर्माण के लिए आश्वस्त किया है।